सेलिना जेटली की भावनाएं: विदेश में बिताए समय और कुमाऊं की यादें
सारांश
Key Takeaways
- सेलिना जेटली की पहचान का संघर्ष और उनके भावनात्मक अनुभव।
- विदेश में बिताए समय की तुलना कुमाऊं की यादों से।
- परिवार और घर की महत्ता पर उनके विचार।
मुंबई, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री सेलिना जेटली ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने जीवन के उतार-चढ़ाव, विदेश में बिताए समय और अपनी पहचान के संघर्षों पर विचार किया। उन्होंने भारत में वापसी के बारे में अपनी भावनाओं, खालीपन और उदासी को व्यक्त किया।
सेलिना ने साझा किया कि जब कोई व्यक्ति विदेश में इतना समय बिताता है जितना उसने अपने बचपन में अपने माता-पिता के साथ बिताया, तो वह अपनी जड़ों और पहचान के बारे में असमंजस में पड़ जाता है। उन्होंने ऑस्ट्रिया (आल्प्स) की प्राकृतिक सुंदरता की तुलना अपने बचपन के खूबसूरत कुमाऊं के पहाड़ों और जंगलों से की। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि वर्षों तक विदेश में रहने के बावजूद, वहां उन्हें केवल 'पीटर की भारतीय पत्नी' के रूप में ही पहचाना गया।
वे लिखती हैं, "पीटर हाग से विवाह के बाद ऑस्ट्रेलिया और फिर ऑस्ट्रिया में बस गईं, लेकिन समय के साथ 'घर' जैसा अहसास कम होता गया।"
अभिनेत्री ने अपनी मां की याद करते हुए लिखा, "आप एक ही इंसान को दो बार नहीं पा सकते, यहां तक कि उसी इंसान को भी नहीं। मां के साथ बिताया समय मेरे लिए सबसे प्रिय था। अब जब मां-पिता और परिवार के सदस्य नहीं हैं, तो पुराना घर और एहसास वापस नहीं आता। कभी-कभी लोग ठीक होना भी नहीं चाहते, क्योंकि दर्द ही खोई हुई चीज से उनका आखिरी रिश्ता बन जाता है।"
एक सैनिक की बेटी होने के नाते उनका बचपन कई स्थानों पर बीता। कोई स्थायी घर नहीं था, लेकिन माता-पिता ने हर जगह प्यार और खुशियां दीं। सेलिना ने लिखा, "अब विदेशी शादी और परिवार की कमी के कारण मुझे लगता है मेरा घर अब कहीं नहीं है। न ही मैं पूरी भारतीय हूं और न ही पूरी विदेशी। मैं दो दुनियाओं का एक हिस्सा हूं, लेकिन सचाई यह है कि अब कोई भी जगह पूरी तरह से घर जैसी नहीं लगती।"
सेलिना ने अपने पहाड़ों, जंगलों, बाघों और बचपन की यादों को घर का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि भारत लौटने पर उन्हें उम्मीद थी कि पुराना अपनापन मिलेगा, लेकिन सब कुछ बदल चुका है। उन्होंने लिखा, "अब मैं खुद से पूछती हूं कि मैं सच में कहां की हूं।"