इमरान हाशमी ने बैड-बॉय इमेज को तोड़ने के लिए किया लंबा संघर्ष, आज नेगेटिव किरदारों से बटोर रहे हैं वाहवाही
सारांश
Key Takeaways
- इमरान हाशमी ने अपनी सीरियल-किसर इमेज से बाहर निकलने के लिए संघर्ष किया।
- उन्होंने नेगेटिव किरदारों में भी दर्शकों का दिल जीता।
- उनकी यात्रा प्रेरणादायक है और यह दिखाती है कि बदलाव हमेशा संभव है।
- इमरान की फिल्में उनकी अभिनय क्षमता को दर्शाती हैं।
- एक अभिनेता के लिए ग्रोथ और पहचान की आवश्यकता होती है।
मुंबई, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा में किसी भी अभिनेता या अभिनेत्री के लिए टाइपकास्ट होना सबसे बड़ी चुनौती होती है। चाहे किसी भूमिका में कितनी भी सफलता मिली हो, हर कलाकार अलग-अलग किरदार निभाने की ख्वाहिश रखता है।
बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी के साथ भी यही हुआ, जिन्होंने अपनी सीरियल-किसर की छवि को बदलने के लिए एक कठिन यात्रा की।
24 मार्च को जन्मे इमरान हाशमी का सफर 'सीरियल-किसर' की सीमित छवि से निकलकर एक गंभीर और बहुमुखी अभिनेता बनने तक का है। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि करियर के पहले दशक में उन्होंने अपनी इस छवि का भरपूर लाभ उठाया, लेकिन दर्शकों की बदलती रुचियों को देखते हुए उन्हें खुद को बदलना पड़ा।
उनके लिए अपनी छवि को बदलना आसान नहीं था, क्योंकि उन्होंने पर्दे पर 7-8 साल तक लगातार अपनी बैड-बॉय की छवि को बनाए रखा। यही कारण था कि इस छवि को तोड़ने में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी।
इमरान ने साल 2003 में फिल्म 'फुटपाथ' से अपने करियर की शुरुआत की और उसके बाद 'मर्डर' फिल्म से रातोंरात प्रसिद्धि हासिल की। उन्होंने 'अक्सर', 'जहर', और 'आशिक बनाया आपने' जैसी फिल्मों में काम किया। उन्हें सफलता और धन दोनों की प्राप्ति हुई। इमरान ने स्वीकारा कि उन्होंने सिनेमा में खुद को स्थिर करने के लिए इस इमेज का पूरा फायदा उठाया, लेकिन एक कलाकार के रूप में वे अपनी ग्रोथ महसूस नहीं कर पा रहे थे। फिल्म 'जन्नत' और 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' जैसी फिल्मों ने उनकी छवि को सुधारने में मदद की।
अभिनेता के अभिनय में बड़ा मोड़ फिल्म 'आवारापन' से आया, जिसमें उन्होंने एक गंभीर और भावुक युवक का किरदार निभाया। इसके बाद 'जन्नत' और 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' जैसी फिल्मों ने साबित कर दिया कि वे सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं हैं। इमरान हाशमी के नेगेटिव किरदार को भी दर्शकों ने बहुत सराहा। उन्होंने 'टाइगर 3' में आतिश रहमान, 'एक थी डायन' में बिजॉय चरण माथुर, और हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'हक' में मोहम्मद अब्बास खान की भूमिका निभाकर दर्शकों की सोच को बदलकर रख दिया।