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प्रतीक चौधरी: 'फॉलोअर्स से ऑडियंस मिलती है, पर लंबी रेस के लिए एक्टिंग ही असली हथियार'

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प्रतीक चौधरी: 'फॉलोअर्स से ऑडियंस मिलती है, पर लंबी रेस के लिए एक्टिंग ही असली हथियार'

सारांश

प्रतीक चौधरी का मानना है कि सोशल मीडिया फॉलोअर्स निर्माताओं के लिए भले ही 'इन्वेस्टमेंट' हों, असली करियर एक्टिंग की बुनियाद पर टिकता है। टाइपकास्टिंग को वे अभिशाप नहीं, दमदार परफॉर्मेंस की तारीफ मानते हैं।

मुख्य बातें

प्रतीक चौधरी के अनुसार, निर्माता अभिनेताओं के सोशल मीडिया फॉलोअर्स को शो के लिए तैयार दर्शक-आधार के रूप में देखते हैं।
चौधरी का मानना है कि एक्टिंग इंडस्ट्री में टिके रहने की पहली और सबसे ज़रूरी शर्त है — लुक्स, फिटनेस और फॉलोअर्स बाद में आते हैं।
टाइपकास्टिंग को उन्होंने दमदार परफॉर्मेंस की तारीफ बताया, न कि करियर की बाधा।
उन्होंने अमरीश पुरी , प्रेम चोपड़ा और शक्ति कपूर का उदाहरण देते हुए कहा कि नेगेटिव रोल में उनकी छाप आज भी अमिट है।
चौधरी के किरदार संजीव और अश्विन आज भी दर्शक उन्हें उन्हीं नामों से बुलाते हैं।

टेलीविजन अभिनेता प्रतीक चौधरी ने 28 अक्टूबर 2026 को मुंबई में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज के दौर में शो के निर्माता किसी अभिनेता को चुनते समय उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स को एक तैयार दर्शक-आधार के रूप में देखते हैं — लेकिन उनके अनुसार, इंडस्ट्री में टिके रहने का एकमात्र भरोसेमंद रास्ता अभिनय की गहरी पकड़ है।

मेकर्स के लिए फॉलोअर्स क्यों बने 'इन्वेस्टमेंट'

चौधरी ने समझाया कि किसी अभिनेता के जितने अधिक फॉलोअर्स होते हैं, निर्माताओं को उम्मीद रहती है कि शो को उतने ही अधिक दर्शक स्वाभाविक रूप से मिलेंगे। इस नज़रिए से एक अभिनेता का सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म निर्माताओं के लिए एक प्रकार के निवेश की भूमिका निभाने लगा है।

हालाँकि चौधरी ने स्पष्ट किया कि वे इस सोच पर अंधा भरोसा नहीं करते। उन्होंने कहा, 'मैं बस यही कहना चाहता हूं कि अगर आपका काम अच्छा है, भले ही आज आपका समय ठीक नहीं है या काम नहीं मिल रहा है, लेकिन एक दिन आपका समय भी आएगा और काम भी मिलेगा। फिर आपको फर्क नहीं पड़ेगा कि आपके कितने फॉलोअर्स हैं।'

एक्टिंग पहली प्राथमिकता, बाकी सब बाद में

जब उनसे पूछा गया कि यदि किसी अभिनेता के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं, लेकिन अभिनय कमज़ोर है, तो क्या उन्हें अधिक अवसर मिल सकते हैं — तो चौधरी का जवाब स्पष्ट था।

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इंडस्ट्री में रहने के लिए हर किसी को एक्टिंग तो आनी ही चाहिए। क्योंकि अगर आप इसमें ही निपुण नहीं हैं, तो लंबी रेस का हिस्सा नहीं बन पाओगे। एक्टिंग निश्चित रूप से सबसे पहली प्राथमिकता है। उसके बाद बाकी सब चीजें आती हैं, चाहे वो आपके लुक्स हों, फिटनेस हो या हेल्थ।'

टाइपकास्टिंग: अभिशाप नहीं, तारीफ

टेलीविजन इंडस्ट्री में टाइपकास्ट होने की समस्या पर चौधरी ने एक दिलचस्प दृष्टिकोण रखा। उनका कहना था कि जब कोई अभिनेता किसी किरदार में इतनी गहरी छाप छोड़ता है कि दर्शक उसे दूसरे रोल में देख ही नहीं पाते, तो वह दरअसल उस अभिनेता की ताकत का प्रमाण है।

चौधरी ने अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा और शक्ति कपूर जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा, 'जब भी कोई एक्टर नेगेटिव रोल करता है… सबसे पहले हमारे दिमाग में उनका वही किरदार आता है। यह किरदार और परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। अगर आपने इतनी दमदार परफॉर्मेंस दी है कि दर्शकों के लिए आपको दूसरे रोल में स्वीकार करना मुश्किल हो जाए, तो यह भी एक तरह की तारीफ ही है।'

संजीव और अश्विन — दर्शकों के दिल में बसे किरदार

चौधरी ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके द्वारा निभाए गए किरदार संजीव और अश्विन आज भी दर्शकों की यादों में ताजा हैं। उन्होंने कहा, 'आज भी मेरे फैंस मुझे संजीव या अश्विन कहकर बुलाते हैं और उन किरदारों के बारे में बहुत बात करते हैं।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही स्थिति केवल टेलीविजन तक सीमित नहीं है, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में भी देखने को मिलती है। चौधरी के अनुसार, हर अभिनेता को टाइपकास्टिंग को शिकायत नहीं, बल्कि एक उपलब्धि की तरह देखना चाहिए। आगे आने वाले समय में वे किस तरह के किरदारों में खुद को आज़माते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि फॉलोअर-काउंट से भी होने लगा है। विरोधाभास यह है कि जिन अभिनेताओं ने दशकों में अपना नाम बनाया, उनके पास कोई इंस्टाग्राम नहीं था — फिर भी वे 'लंबी रेस' जीते। मुख्यधारा की बहस अक्सर इस तथ्य को नजरअंदाज करती है कि सोशल मीडिया मेट्रिक्स दर्शकों की संख्या बढ़ा सकते हैं, पर दर्शक की वफादारी सिर्फ परफॉर्मेंस से आती है। टाइपकास्टिंग को 'तारीफ' कहने वाला यह नज़रिया एक आत्मविश्वासी कलाकार का है, लेकिन यह भी पूछने की ज़रूरत है कि क्या इंडस्ट्री उन्हें नए रोल में आज़माने का साहस दिखाती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतीक चौधरी के अनुसार सोशल मीडिया फॉलोअर्स और एक्टिंग में क्या ज़्यादा ज़रूरी है?
प्रतीक चौधरी के अनुसार एक्टिंग पहली और सबसे ज़रूरी प्राथमिकता है। फॉलोअर्स निर्माताओं को तैयार ऑडियंस देते हैं, लेकिन इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिकने के लिए अभिनय की पक्की पकड़ अनिवार्य है।
निर्माता अभिनेताओं के सोशल मीडिया फॉलोअर्स क्यों देखते हैं?
चौधरी के मुताबिक, जितने अधिक फॉलोअर्स, उतने अधिक संभावित दर्शक — इसलिए निर्माताओं के नज़रिए से किसी अभिनेता का सोशल मीडिया एक तरह का निवेश बन गया है जो शो की व्यूअरशिप सुनिश्चित करने में मदद करता है।
प्रतीक चौधरी ने टाइपकास्टिंग को तारीफ क्यों कहा?
चौधरी का मानना है कि यदि दर्शक किसी अभिनेता को किसी खास किरदार से इस कदर जोड़ लें कि उसे दूसरे रोल में स्वीकार न कर पाएं, तो यह उस परफॉर्मेंस की शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने इसे बाधा नहीं, बल्कि उपलब्धि बताया।
प्रतीक चौधरी ने किन दिग्गज अभिनेताओं का उदाहरण दिया?
उन्होंने अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा और शक्ति कपूर का ज़िक्र किया — तीनों विलेन रोल के लिए प्रसिद्ध। चौधरी ने कहा कि इन कलाकारों की छाप इतनी गहरी है कि उनका नाम लेते ही उनका नेगेटिव किरदार जेहन में आता है।
प्रतीक चौधरी के कौन-से किरदार दर्शकों को सबसे ज़्यादा याद हैं?
चौधरी ने बताया कि उनके द्वारा निभाए गए संजीव और अश्विन के किरदार आज भी दर्शकों की यादों में ताजा हैं। उन्होंने कहा कि उनके फैंस आज भी उन्हें इन्हीं नामों से पुकारते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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