तापसी पन्नू 'फ्रॉम पिंक टू पावर' पैनल में, सिनेमा में महिलाओं की रूढ़ियाँ तोड़ने पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री तापसी पन्नू 20 से 23 अगस्त 2026 के बीच नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक फिल्म फेस्टिवल में 'फ्रॉम पिंक टू पावर: ब्रेकिंग स्टीरिओटाइप थ्रू सिनेमा' नामक विशेष पैनल सेशन का हिस्सा बनेंगी। इस सेशन में सिनेमा के ज़रिए महिला किरदारों की पारंपरिक छवियों को चुनौती देने और दर्शकों की सोच बदलने की संभावनाओं पर गहन विमर्श होगा।
पैनल में क्या होगा खास
इस विशेष सेशन में तापसी अपनी फिल्मी यात्रा, करियर को दिशा देने वाले निर्णयों और पारंपरिक सोच से इतर भूमिकाएँ चुनने के जोखिम पर बात करेंगी। साथ ही वे यह भी साझा करेंगी कि सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सवाल उठाना और दर्शकों को प्रेरित करना किस हद तक ज़िम्मेदारी का काम है।
तापसी पन्नू की राय — स्टीरियोटाइप तोड़ना एक सचेत जोखिम
सेशन में शामिल होने पर अपनी उत्सुकता ज़ाहिर करते हुए तापसी ने कहा, "मेरे लिए, स्टीरियोटाइप्स को तोड़ना हमेशा एक रिस्क लेने और एक ऐसी महिला का किरदार अदा करने से हुआ है, जो शायद उस वर्जन में फिट न हो जिसकी लोग उम्मीद करते हैं। इस सेशन में बात होगी कि कैसे सिनेमा गहराई से जमी हुई रूढ़ियों पर सवाल उठा सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "पिंक और थप्पड़ जैसी फिल्में एक बड़ी बहस का हिस्सा बनी थीं क्योंकि उन फिल्मों में मेरे द्वारा निभाए गए किरदारों को एक तय सांचे पर फिट करने के लिए नहीं बनाया गया था। मैं हमेशा से मानती हूं कि सिनेमा तब और ज़्यादा दिलचस्प होता है, जब हम महिलाओं को कम कमज़ोरियों वाली, पेचीदा, महत्वाकांक्षी और बेधड़क अपने जैसी दिखाने की इजाज़त देते हैं।"
हालिया फिल्म 'अस्सी' में निडर वकील की भूमिका
उल्लेखनीय है कि तापसी पन्नू हाल ही में अनुभव सिन्हा निर्देशित कोर्टरूम ड्रामा फिल्म 'अस्सी' में नज़र आई थीं, जिसमें उन्होंने एक निडर वकील का किरदार निभाया जो गैंगरेप सर्वाइवर को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती है। यह भूमिका भी उनकी उस सोच का विस्तार है जो महिला पात्रों को शक्तिशाली और जटिल रूप में प्रस्तुत करती है।
फेस्टिवल का आयोजन और व्यापक संदर्भ
यह फिल्म फेस्टिवल 20 अगस्त से 23 अगस्त 2026 तक डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियाँ भाग लेंगी। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब हिंदी सिनेमा में महिला-केंद्रित कहानियों की माँग और स्वीकार्यता दोनों तेज़ी से बढ़ रही हैं। तापसी की यह भागीदारी उद्योग में बदलाव की उस व्यापक बहस को और धार देगी।