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आशा पारेख की आत्मकथा: गीता बाली ने रानीखेत शूटिंग पर किया था मेकअप, शम्मी कपूर से जताई थी गोद लेने की इच्छा

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आशा पारेख की आत्मकथा: गीता बाली ने रानीखेत शूटिंग पर किया था मेकअप, शम्मी कपूर से जताई थी गोद लेने की इच्छा

सारांश

आशा पारेख की आत्मकथा 'द हिट गर्ल' में एक भावुक किस्सा सामने आता है — गीता बाली ने न केवल रानीखेत की शूटिंग पर युवा आशा का मेकअप किया, बल्कि शम्मी कपूर के सामने उन्हें गोद लेने की इच्छा तक जता दी। सुनहरे दौर के सिनेमा का यह अनकहा इंसानी पहलू।

मुख्य बातें

आशा पारेख ने अपनी आत्मकथा 'द हिट गर्ल' में गीता बाली से जुड़ा भावुक किस्सा साझा किया है।
गीता बाली ने रानीखेत में 'दिल देके देखो' की शूटिंग के पहले दिन आशा पारेख का मेकअप किया था।
गीता बाली ने शम्मी कपूर के सामने आशा पारेख को गोद लेने की इच्छा व्यक्त की थी।
आशा पारेख, शम्मी कपूर को 'चाचा' और गीता बाली को 'चाची' कहकर बुलाती थीं।
आशा पारेख ने अपना फ़िल्मी सफ़र निर्देशक बिमल रॉय की फ़िल्म 'माँ' में बाल कलाकार के रूप में शुरू किया था।

अभिनेत्री आशा पारेख की आत्मकथा 'द हिट गर्ल' में दर्ज एक भावुक किस्से के अनुसार, दिग्गज अभिनेत्री गीता बाली ने एक समय उन्हें गोद लेने की इच्छा शम्मी कपूर के सामने ज़ाहिर की थी। यह उस दौर की बात है जब आशा पारेख फ़िल्म उद्योग में नई थीं और 1959 की फ़िल्म 'दिल देके देखो' की शूटिंग कर रही थीं।

फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत

आशा पारेख ने अपने अभिनय की पहली सीढ़ी तब चढ़ी, जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं। निर्देशक बिमल रॉय की फ़िल्म 'माँ' में उन्होंने बाल कलाकार की भूमिका निभाई थी। हालाँकि उनकी असली पहचान 1959 में शम्मी कपूर के साथ 'दिल देके देखो' में लीड रोल से बनी। इस फ़िल्म ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और साथ ही शम्मी कपूर के परिवार से एक ख़ास रिश्ते की नींव भी रखी।

गीता बाली से पहली मुलाक़ात

'दिल देके देखो' की शूटिंग के दौरान आशा पारेख की मुलाक़ात शम्मी कपूर की पत्नी और मशहूर अभिनेत्री गीता बाली से हुई। उस समय आशा उद्योग में नई थीं, जबकि गीता बाली पहले से अपनी एक अलग पहचान बना चुकी थीं। 'द हिट गर्ल' में आशा ने लिखा है कि गीता बाली उनके साथ हमेशा स्नेह और अपनेपन से पेश आती थीं।

रानीखेत की यादगार सुबह

आत्मकथा के अनुसार, रानीखेत में 'दिल देके देखो' की शूटिंग के पहले दिन गीता बाली ने स्वयं आशा पारेख का मेकअप किया था। उद्योग में नई होने के कारण यह पल आशा के लिए बेहद विशेष था। गीता बाली ने उन्हें शूटिंग के माहौल और काम करने के तौर-तरीक़ों से परिचित कराने में भी मदद की। धीरे-धीरे दोनों के बीच एक गहरा और प्यारा रिश्ता विकसित हो गया।

गोद लेने की अनोखी इच्छा

दोनों के बीच रिश्ते में इतना अपनापन आ गया कि गीता बाली ने एक अवसर पर शम्मी कपूर के सामने आशा को गोद लेने की इच्छा व्यक्त की। यह किस्सा आशा पारेख की ज़िंदगी की सबसे दिलचस्प यादों में शुमार है। आशा पारेख ने अपनी आत्मकथा में यह भी बताया है कि वह शम्मी कपूर को 'चाचा' और गीता बाली को 'चाची' कहकर बुलाती थीं।

करियर की उड़ान

'दिल देके देखो' की सफलता के बाद आशा पारेख के पास फ़िल्मों की कोई कमी नहीं रही। 1960 और 1970 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं। 'जब प्यार किसी से होता है', 'फिर वही दिल लाया हूँ', 'तीसरी मंज़िल', 'प्यार का मौसम', 'कटी पतंग' और 'कारवाँ' जैसी फ़िल्मों ने उन्हें दर्शकों के दिलों में एक स्थायी जगह दिलाई। उनकी आत्मकथा में दर्ज ये किस्से भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर की मानवीय और भावुक झलकियाँ प्रस्तुत करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ वरिष्ठ कलाकार नए चेहरों को सँवारने में सक्रिय भूमिका निभाते थे। गीता बाली और आशा पारेख के रिश्ते का यह किस्सा बताता है कि स्टारडम और पारिवारिक अपनापन एक साथ संभव था। आज जब इंडस्ट्री में 'नेपोटिज़्म' बनाम 'आउटसाइडर' की बहस तेज़ है, यह किस्सा याद दिलाता है कि प्रतिभा को अपनाने का जज़्बा कोई नया चलन नहीं — यह उस पीढ़ी की विरासत है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीता बाली ने आशा पारेख को गोद लेने की इच्छा कब और कहाँ जताई थी?
आशा पारेख की आत्मकथा 'द हिट गर्ल' के अनुसार, गीता बाली ने यह इच्छा शम्मी कपूर के सामने उस दौर में ज़ाहिर की थी, जब 'दिल देके देखो' की शूटिंग चल रही थी। दोनों के बीच घनिष्ठता उस समय इतनी गहरी हो गई थी कि गीता बाली उन्हें अपनी बेटी की तरह मानने लगी थीं।
आशा पारेख ने गीता बाली को किस नाम से बुलाया?
आशा पारेख अपनी आत्मकथा में बताती हैं कि वह शम्मी कपूर को 'चाचा' और गीता बाली को 'चाची' कहकर बुलाती थीं। यह रिश्ता 'दिल देके देखो' की शूटिंग के दौरान बने आपसी स्नेह का परिणाम था।
'द हिट गर्ल' आत्मकथा क्या है?
'द हिट गर्ल' अभिनेत्री आशा पारेख की आत्मकथा है, जिसमें उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर, व्यक्तिगत जीवन और 1960-70 के दशक के सिनेमा जगत से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए हैं। इसमें गीता बाली सहित कई दिग्गज हस्तियों के साथ उनके संबंधों का ज़िक्र है।
आशा पारेख का फ़िल्मी करियर कैसे शुरू हुआ?
आशा पारेख ने बिमल रॉय की फ़िल्म 'माँ' में बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया था, जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं। असली स्टारडम 1959 में 'दिल देके देखो' से मिला, जिसमें वह शम्मी कपूर के साथ लीड रोल में थीं।
आशा पारेख की कौन-सी प्रमुख फ़िल्में हैं?
'दिल देके देखो' के बाद आशा पारेख ने 'जब प्यार किसी से होता है', 'तीसरी मंज़िल', 'कटी पतंग' और 'कारवाँ' जैसी सफल फ़िल्में दीं। 1960 और 1970 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक रहीं।
राष्ट्र प्रेस
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