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जिम सर्भ का सिडनी वाला बचपन: कॉकटू, कूकाबुरा और खुले बैकयार्ड की यादें

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जिम सर्भ का सिडनी वाला बचपन: कॉकटू, कूकाबुरा और खुले बैकयार्ड की यादें

सारांश

जिम सर्भ का सिडनी वाला बचपन किसी परीकथा से कम नहीं था — कॉकटू से भरा बैकयार्ड, कूकाबुरा और वॉम्बैट के साथ पला-बढ़ा एक अभिनेता, जो अब 1990s भारत पर आधारित OTT शो 'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' लेकर आ रहा है।

मुख्य बातें

जिम सर्भ 1991 में सिडनी के उपनगरीय इलाके में शिफ्ट हुए थे, जहाँ वे एक पुरानी हवेली-नुमा इमारत में रहते थे।
उनके बैकयार्ड में कॉकटू , कूकाबुरा और आसपास वॉम्बैट जैसे वन्यजीव नियमित रूप से दिखते थे।
जिम का मानना है कि बच्चों की परवरिश प्राकृतिक परिवेश में होनी चाहिए, शहरी भागदौड़ से दूर।
बचपन में वह टीवी के शौकीन थे और घंटों खबरें व मौसम रिपोर्ट देखते थे।
जिम सर्भ का आगामी OTT शो 'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' 1990 के दशक के भारत में उदारीकरण से पहले की कहानी पर आधारित है।

अभिनेता जिम सर्भ इन दिनों अपने आगामी ओटीटी शो 'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' के प्रमोशन में जुटे हैं। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन की उन यादों को साझा किया, जो सिडनी के एक उपनगरीय इलाके में प्रकृति की गोद में बीती थीं — शहरी भागदौड़ से कोसों दूर, सरल और यादगार।

सिडनी के उपनगर में बीते वे दिन

जिम सर्भ ने बताया कि वह 1991 में सिडनी शिफ्ट हुए थे। वह शहर के व्यस्त केंद्र में नहीं, बल्कि उपनगरीय इलाके में एक पुरानी हवेली-नुमा इमारत में रहते थे। उनके अनुसार, उस इलाके में एक पब्लिक स्कूल था जहाँ सभी बच्चे आपस में घुले-मिले रहते थे।

उन्होंने कहा, 'मेरा बचपन बहुत सिंपल और प्यारा था। हमारे घर के सामने पार्क था और हर घर में बैकयार्ड था। बच्चे आसानी से एक-दूसरे के घर जा सकते थे और बाहर खेल सकते थे।'

कॉकटू, कूकाबुरा और वॉम्बैट — प्रकृति थी पड़ोसी

जिम के बचपन की सबसे अनोखी बात थी उनके घर के आसपास की वन्यजीव-समृद्ध दुनिया। उन्होंने बताया, 'हमारा बैकयार्ड कॉकटू (तोते) से भरा रहता था। अगर हम खाना फेंकते तो कूकाबुरा (एक प्रकार का पक्षी) आकर उसे खा जाते। घूमने पर वॉम्बैट भी दिख जाते थे।'

यह जीवनशैली उनके व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण रही, ऐसा उनका मानना है। उनके अनुसार, प्राकृतिक परिवेश में पले-बढ़े बच्चे जीवन को अलग नज़रिए से देखते हैं।

बच्चों को प्रकृति के करीब ले जाएं — जिम की सलाह

जिम सर्भ का मानना है कि बच्चों को शहर की भागदौड़ से दूर, प्रकृति के करीब बड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर माता-पिता को मौका मिले, तो उन्हें बच्चों को शहर से बाहर ले जाना चाहिए, ताकि उन्हें प्राकृतिक परिवेश में परवरिश मिल सके। यह विचार उनके अपने अनुभव से उपजा है।

टीवी का शौक और आधुनिक तकनीक पर राय

जिम ने यह भी स्वीकार किया कि बचपन में वह टीवी के बेहद शौकीन थे। उनकी माँ उन्हें टीवी के सामने बिठा देती थीं, और वह घंटों खबरें या मौसम की रिपोर्ट देखते रहते थे। उन्होंने माना कि अगर उस दौर में आज की आधुनिक तकनीक होती, तो वह उसे भी खूब इस्तेमाल करते।

'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' — शो की पृष्ठभूमि

जिम सर्भ इन दिनों अपने नए ओटीटी शो 'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' को लेकर उत्साहित हैं। यह शो 1990 के दशक के भारत में उदारीकरण से पहले की घटनाओं पर आधारित है। शो जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिम का प्रकृति-करीब परवरिश का अनुभव प्रासंगिक है। दिलचस्प यह भी है कि खुद जिम ने माना कि अगर तब आज की तकनीक होती, तो वे भी उसका भरपूर इस्तेमाल करते — यानी नॉस्टेल्जिया में आदर्शीकरण का भी एक पहलू है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिम सर्भ का बचपन कहाँ बीता था?
जिम सर्भ का बचपन सिडनी के उपनगरीय इलाके में बीता था, जहाँ वे 1991 में शिफ्ट हुए थे। वह शहर के व्यस्त केंद्र में नहीं, बल्कि एक पुरानी हवेली-नुमा इमारत में रहते थे।
जिम सर्भ का नया OTT शो कौन-सा है?
'मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी' जिम सर्भ का आगामी OTT शो है, जो 1990 के दशक के भारत में उदारीकरण से पहले की घटनाओं पर आधारित है। शो जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाला है।
जिम सर्भ के बचपन में कौन-से वन्यजीव थे?
जिम सर्भ के सिडनी वाले घर के बैकयार्ड में कॉकटू (तोते) भरे रहते थे, खाना फेंकने पर कूकाबुरा पक्षी आ जाते थे, और घूमने पर वॉम्बैट भी दिख जाते थे।
जिम सर्भ बच्चों की परवरिश के बारे में क्या सोचते हैं?
जिम सर्भ का मानना है कि बच्चों को शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के करीब बड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर माता-पिता को मौका मिले तो उन्हें बच्चों को शहर से बाहर ले जाना चाहिए।
क्या जिम सर्भ बचपन में टीवी देखते थे?
हाँ, जिम सर्भ ने बताया कि बचपन में वह टीवी के बेहद शौकीन थे और घंटों खबरें या मौसम की रिपोर्ट देखते रहते थे। उन्होंने यह भी माना कि अगर उस दौर में आज की आधुनिक तकनीक होती, तो वह उसे भी खूब इस्तेमाल करते।
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