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'जुबली' की तीन साल की यात्रा: भारतीय सिनेमा का सुनहरा युग

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'जुबली' की तीन साल की यात्रा: भारतीय सिनेमा का सुनहरा युग

सारांश

2023 में प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई 'जुबली' ने भारतीय सिनेमा के सुनहरे युग को फिर से जीवंत किया। इस सीरीज ने विभाजन की पीड़ा और बॉलीवुड के शुरुआती संघर्षों को दर्शाया है। जानिए इसके अनकहे पहलुओं के बारे में।

मुख्य बातें

जुबली ने भारतीय सिनेमा के सुनहरे युग को फिर से जीवंत किया।
इसमें विभाजन की त्रासदी और बॉलीवुड के प्रारंभिक संघर्षों को दर्शाया गया है।
मुख्य कलाकारों ने अपने अभिनय से सीरीज को उत्कृष्ट बनाया है।
सीरीज ने रिलीज के बाद अपार सराहना प्राप्त की।
सोशल मीडिया पर इसके संवाद और दृश्य आज भी चर्चित हैं।

मुंबई, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कहा जाता है कि सिनेमा समाज का वास्तविक प्रतिबिंब होता है। निर्देशक अपनी दृष्टि से उन कहानियों और पल को उजागर करते हैं, जो आम जन तक पहुँच नहीं पाते। इसी भावना के साथ, वर्ष 2023 में अजेजन प्राइम वीडियो पर पीरियड ड्रामा वेब सीरीज 'जुबली' का विमोचन किया गया।

यह सीरीज 1940-50 के दशक के भारतीय सिनेमा के सुनहरे युग को दर्शाती है। इसमें देश के विभाजन की पीड़ा, बॉलीवुड की आंतरिक राजनीति और ग्लैमर की दुनिया को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।

मुख्य भूमिकाओं में अदिति राव हैदरी, अपरशक्ति खुराना, सिद्धांत गुप्ता, वामीका गब्बी और प्रसेनजित चटर्जी जैसे कलाकारों ने अपनी अदाकारी से उस समय के सिनेमा को जीवंत किया।

मंगलवार को इस सीरीज ने अपनी रिलीज के तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर प्राइम वीडियो ने इन्स्टाग्राम पर पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने सीरीज के पात्रों की खूबसूरत तस्वीरें साझा कीं और लिखा, "हमने जब से कहानियों, रोशनी और सितारों के सुनहरे दौर में कदम रखा है, आज 3 साल पूरे हो गए हैं।"

इस सीरीज का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है, जबकि इसका लेखन सौमिक सेन, विक्रमादित्य मोटवानी और अतुल सभरवाल ने किया है। निर्माण में विक्रमादित्य मोटवानी, शिबाशीष सरकार, सृष्टि बहल और विक्रम मल्होत्रा का योगदान रहा है।

इस सीरीज में कुल 10 एपिसोड हैं, जिन्हें रिलीज के बाद अपार सराहना मिली थी। आज भी इसके कुछ यादगार दृश्य और संवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनते रहते हैं।

यह सीरीज विभाजन के दौरान फिल्म इंडस्ट्री की स्थिति, स्टूडियो सिस्टम और बॉलीवुड के प्रारंभिक संघर्ष को दर्शाती है। कहानी में श्रीकांत रॉय, जो रॉय टॉकीज के मालिक हैं, एक नए कलाकार (मदन कुमार) की खोज में निकलते हैं। बिनोद दास, एक प्रतिभाशाली थिएटर कलाकार (जमशेद खान) को लाता है, लेकिन एक प्रेम कहानी, विभाजन के दंगों और साजिश के चलते बिनोद खुद 'मदन कुमार' बनकर सुपरस्टार बन जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'जुबली' ने भारतीय सिनेमा के इतिहास को एक नई रोशनी में प्रस्तुत किया है। यह सीरीज न केवल देश के विभाजन के समय की कहानियों को दर्शाती है, बल्कि बॉलीवुड के संघर्षों को भी उजागर करती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 'जुबली' एक ऐतिहासिक ड्रामा है?
'जुबली' एक पीरियड ड्रामा है जो 1940-50 के दशक के भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर को दर्शाता है।
'जुबली' में कौन-कौन से कलाकार हैं?
इसमें अदिति राव हैदरी, अपरशक्ति खुराना, सिद्धांत गुप्ता, वामीका गब्बी और प्रसेनजित चटर्जी जैसे कलाकार शामिल हैं।
क्या इस सीरीज को आलोचकों की सराहना मिली है?
हाँ, 'जुबली' को रिलीज के बाद व्यापक प्रशंसा मिली थी और इसके दृश्य और संवाद आज भी चर्चा में रहते हैं।
'जुबली' का निर्देशन किसने किया है?
'जुबली' का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है।
सीरीज की कहानी किस पर आधारित है?
'जुबली' की कहानी विभाजन के समय की फिल्म इंडस्ट्री और उसके संघर्षों पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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