खान साब बोले: बेहतर म्यूजिक समय की सीमाएँ तोड़ता है, सूफी संगीत कभी नहीं मरेगा
सारांश
मुख्य बातें
गायक खान साब ने 24 मई 2026 को पुरानी धुनों की स्थायी लोकप्रियता पर अपने विचार साझा किए और कहा कि क्लासिक गाने आज की युवा पीढ़ी से इसलिए गहराई से जुड़ते हैं क्योंकि उनमें एक कालातीत आत्मा होती है। उनके अनुसार, सच्ची भावनाओं और अमर संगीत से बने गीत किसी एक दौर तक सीमित नहीं रहते।
पुरानी धुनों की अमरता का राज़
खान साब ने कहा, "पिछली पीढ़ियों के म्यूजिक में एक अमर आत्मा थी। मोहम्मद रफी साहब हों या लता जी, उनके दौर ने ऐसी धुनें बनाईं जो कभी पुरानी नहीं पड़तीं। ऐसा म्यूजिक कभी गायब नहीं हो सकता।" उनका मानना है कि ट्रेंड भले ही बदलते रहें, संगीत का असली सार अपरिवर्तित रहता है।
उन्होंने एक दिलचस्प उपमा देते हुए कहा, "हमारी इंडस्ट्री में सिर्फ प्लेटिंग बदलती है, इंग्रीडिएंट्स वही रहते हैं।" यह टिप्पणी उनके उस व्यापक नज़रिए को दर्शाती है जिसमें वे आज के और कल के संगीत के बीच एक निरंतरता देखते हैं।
सूफी संगीत पर विशेष जोर
खान साब ने खासतौर पर सूफी संगीत की अमरता पर ज़ोर देते हुए कहा, "हमारी इंडस्ट्री में एक चीज़ कभी नहीं मरेगी और वो है सूफी म्यूजिक। सूफी म्यूजिक हमेशा ज़िंदा रहेगा।" यह बयान उनकी संगीत यात्रा के उस पहलू को उजागर करता है जो आध्यात्मिकता और लोक परंपरा से गहराई से जुड़ा है।
'आरी आरी' के रीक्रिएशन का अनुभव
फिल्म 'धुरंधर' के लिए बॉम्बे रॉकर्स के मशहूर गीत 'आरी आरी' को दोबारा रिकॉर्ड करने के अनुभव पर खान साब ने कहा कि उन्हें इस काम में दबाव नहीं, बल्कि सम्मान का अहसास हुआ। उन्होंने बताया, "जब टीम ने मुझसे संपर्क किया तो मैंने गाने की कंपोजिशन और फील को समझने पर ध्यान दिया। बॉम्बे रॉकर्स के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान और प्यार है।"
खान साब ने स्वीकार किया कि फिल्म से जुड़ने से पहले वे इस गाने से ज़्यादा परिचित नहीं थे। रिकॉर्डिंग के दौरान गायक शाश्वत ने उन्हें बताया कि उनका पंजाबी लोक अंदाज़ इस कंपोजिशन के लिए एकदम सटीक है।
रिकॉर्डिंग का सहज अनुभव
खान साब ने रिकॉर्डिंग प्रक्रिया को बेहद स्वाभाविक बताया। उन्होंने कहा, "मैंने इसे बहुत जल्दी रिकॉर्ड कर लिया। शाश्वत भाई ने लाइन-बाय-लाइन गाइड किया और कुछ ही मिनटों में सब कुछ बहुत नैचुरली हो गया।" यह सहजता उनकी संगीत समझ और लोक गायकी की जड़ों का प्रमाण है। आने वाले समय में खान साब से ऐसे और प्रयोगों की उम्मीद की जा सकती है जो परंपरा और समकालीन सिनेमा के बीच सेतु बनाएँ।