5 जुलाई 2026
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शबाब साबरी जन्मदिन विशेष: 'हमका पीनी है' से बॉलीवुड में बनाई जगह, सूफी घराने की विरासत को दिया नया आयाम

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शबाब साबरी जन्मदिन विशेष: 'हमका पीनी है' से बॉलीवुड में बनाई जगह, सूफी घराने की विरासत को दिया नया आयाम

सारांश

सहारनपुर के सूफी घराने से निकलकर 'दबंग' की धुनों तक — शबाब साबरी का सफर महज एक गायक का नहीं, बल्कि एक विरासत को जीवित रखने की कोशिश है। 6 जुलाई को जन्मदिन पर जानिए कैसे उस्ताद राशिद खान की तालीम और साजिद-वाजिद की जोड़ी ने उन्हें बॉलीवुड में स्थापित किया।

मुख्य बातें

शबाब साबरी का जन्म 6 जुलाई 1979 को सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ; पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी प्रतिष्ठित कव्वाली गायक थे।
मात्र 14 वर्ष की आयु में उस्ताद राशिद खान से रामपुर-सहसवान घराने की शास्त्रीय संगीत शिक्षा ली।
वर्ष 2010 में फिल्म 'दबंग' के गीत 'हमका पीनी है' से बॉलीवुड में नई पहचान मिली; संगीत साजिद-वाजिद का था।
'जय हो' (2014), 'वेलकम बैक' (2015), 'एजेंट विनोद' (2012) और 'प्रेम रतन धन पायो' (2015) सहित कई बड़ी फिल्मों में आवाज़ दी।
2026 में 'रब रूठा' और 'माही वे' जैसे नए एकल गीतों से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय।

शबाब साबरी का जन्म 6 जुलाई 1979 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था — एक ऐसे परिवार में, जहाँ सूफी संगीत की जड़ें पीढ़ियों से गहरी थीं। उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी भारत के सबसे प्रतिष्ठित कव्वाली और सूफी गायकों में गिने जाते थे। इस संगीत-समृद्ध पृष्ठभूमि ने शबाब के भीतर गायन की ललक बचपन से ही जगा दी।

सूफी घराने से शास्त्रीय तालीम तक

साबरी परिवार ने 'भर दो झोली मेरी' जैसी कालजयी कव्वालियों को वैश्विक मंचों पर गाकर सूफी संगीत को नई ऊँचाइयाँ दी थीं। शुरुआत में परिवार चाहता था कि शबाब इस क्षेत्र के कठिन संघर्षों से दूर रहें, लेकिन उनकी अदम्य लगन को देखते हुए उन्हें विधिवत शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दिलाई गई। महज 14 वर्ष की आयु में शबाब ने रामपुर-सहसवान घराने के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान से संगीत की तालीम ली — यह प्रशिक्षण आगे चलकर उनकी गायकी की नींव बना।

मुंबई तक का सफर और बॉलीवुड में दस्तक

पिता के साथ देश-विदेश में लाइव प्रस्तुतियाँ देने के बाद शबाब साबरी ने मंचीय गायन की बारीकियाँ आत्मसात कीं। पिता के निधन के बाद पूरा परिवार मुंबई आ गया। यहाँ उन्होंने शुरुआती संघर्ष के दौरान अपनी शास्त्रीय गायकी को फिल्मी संगीत के साँचे में ढाला। वर्ष 2010 में संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद ने उन्हें सलमान खान अभिनीत फिल्म 'दबंग' में 'हमका पीनी है' गाने का अवसर दिया। रिलीज़ के बाद यह गीत जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर गया और शबाब साबरी को बॉलीवुड में एक अलग पहचान मिली।

चर्चित फिल्मों में आवाज़ का जादू

शबाब साबरी सलमान खान और संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद को अपने करियर की दिशा तय करने का श्रेय देते हैं। इसके बाद उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी आवाज़ दी — सलमान खान की फिल्म 'जय हो' (2014) में 'तेरे नैना मार ही डालेंगे', फिल्म 'वीर' (2010) में ठुमरी शैली का गीत 'पवन उड़ावे बतिया', और जॉन अब्राहम अभिनीत 'वेलकम बैक' (2015) में 'नस नस में' — जिसे नसीरुद्दीन शाह और अनिल कपूर जैसे दिग्गज अभिनेताओं पर भी फिल्माया गया।

संगीतकार प्रीतम के निर्देशन में 'दिल मेरा मुफ्त का' (फिल्म 'एजेंट विनोद', 2012) और हिमेश रेशमिया के संगीत में 'जलते दिए' (फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो', 2015) जैसे गीतों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित किया।

समाज-सेवा और डिजिटल सक्रियता

पार्श्वगायन के साथ-साथ शबाब साबरी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने मुंबई में आयोजित प्रथम भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट श्रृंखला के लिए स्वेच्छा से थीम गीत गाया। वर्ष 2026 में भी वे 'रब रूठा' और 'माही वे' जैसे नए एकल गीतों के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर श्रोताओं से जुड़े हुए हैं — यह दर्शाता है कि सूफी घराने की यह आवाज़ समय के साथ खुद को नया रूप देती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ऐसे कलाकार की है जिसने शास्त्रीय सूफी परंपरा और व्यावसायिक फिल्मी संगीत के बीच की खाई को पाटने की कोशिश की। यह उल्लेखनीय है कि जिस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में 'ऑटोट्यून' और इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का बोलबाला था, उस दौर में उन्होंने ठुमरी और कव्वाली की जड़ों को बनाए रखा। हालाँकि मुख्यधारा की चर्चा में साबरी घराने का नाम अक्सर केवल 'दबंग' तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि उनके शास्त्रीय प्रशिक्षण और लाइव प्रदर्शन की गहराई इससे कहीं अधिक है। डिजिटल युग में उनकी सक्रियता यह संकेत देती है कि सूफी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की यह यात्रा अभी जारी है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शबाब साबरी कौन हैं और उनका संगीत से क्या नाता है?
शबाब साबरी एक भारतीय पार्श्वगायक हैं, जिनका जन्म 6 जुलाई 1979 को सहारनपुर में हुआ। वे साबरी घराने से ताल्लुक रखते हैं — उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी भारत के प्रतिष्ठित सूफी व कव्वाली गायक थे।
'हमका पीनी है' गाने से शबाब साबरी को क्या मिला?
वर्ष 2010 में फिल्म 'दबंग' में संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद के निर्देशन में गाया यह गीत रिलीज़ के बाद बेहद लोकप्रिय हुआ। इसी गीत ने शबाब साबरी को बॉलीवुड पार्श्वगायन में एक अलग और स्थायी पहचान दिलाई।
शबाब साबरी ने किससे शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली?
शबाब साबरी ने मात्र 14 वर्ष की आयु में रामपुर-सहसवान घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान से संगीत की विधिवत तालीम ली। यही प्रशिक्षण उनकी गायकी की मजबूत नींव बना।
शबाब साबरी की कौन-सी अन्य प्रमुख फिल्में हैं?
शबाब साबरी ने 'जय हो' (2014) में 'तेरे नैना मार ही डालेंगे', 'वीर' (2010) में 'पवन उड़ावे बतिया', 'वेलकम बैक' (2015) में 'नस नस में', 'एजेंट विनोद' (2012) में 'दिल मेरा मुफ्त का' और 'प्रेम रतन धन पायो' (2015) में 'जलते दिए' जैसे चर्चित गीतों में आवाज़ दी।
शबाब साबरी अभी क्या कर रहे हैं?
वर्ष 2026 में शबाब साबरी 'रब रूठा' और 'माही वे' जैसे नए एकल गीतों के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। इसके अलावा वे लाइव संगीत मंचों पर भी प्रस्तुतियाँ देते रहते हैं और सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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