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शबाब साबरी जन्मदिन विशेष: 'हमका पीनी है' से बॉलीवुड में धमाल, सूफी घराने की विरासत को दी नई उड़ान

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शबाब साबरी जन्मदिन विशेष: 'हमका पीनी है' से बॉलीवुड में धमाल, सूफी घराने की विरासत को दी नई उड़ान

सारांश

सहारनपुर के साबरी घराने से निकले शबाब साबरी ने उस्ताद राशिद खान की शास्त्रीय तालीम और 'दबंग' के 'हमका पीनी है' के ज़रिए बॉलीवुड में अपनी जगह बनाई। आज 47वें जन्मदिन पर उनका सफ़र — सूफी विरासत से डिजिटल मंच तक — प्रेरणादायक है।

मुख्य बातें

शबाब साबरी का जन्म 6 जुलाई 1979 को सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ; पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी प्रतिष्ठित कव्वाली गायक थे।
महज 14 वर्ष की आयु में उस्ताद राशिद खान (रामपुर-सहसवान घराना) से शास्त्रीय संगीत की तालीम ली।
वर्ष 2010 में फिल्म 'दबंग' के गीत 'हमका पीनी है' ने उन्हें बॉलीवुड में स्थापित किया; संगीतकार साजिद-वाजिद का अहम योगदान।
प्रमुख गीतों में 'नस नस में' (वेलकम बैक, 2015), 'जलते दिए' (प्रेम रतन धन पायो, 2015), 'दिल मेरा मुफ्त का' (एजेंट विनोद, 2012) शामिल।
वर्ष 2026 में 'रब रूठा' और 'माही वे' एकल गीतों से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय।

सूफी संगीत की समृद्ध परंपरा से निकलकर बॉलीवुड के पार्श्वगायन में अपनी खास जगह बनाने वाले शबाब साबरी आज 6 जुलाई 2026 को अपना 47वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 6 जुलाई 1979 को जन्मे शबाब साबरी का संगीत से नाता विरासत में मिला — उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी भारत के सबसे प्रतिष्ठित सूफी और कव्वाली गायकों में शुमार थे। वर्ष 2010 में फिल्म 'दबंग' के गीत 'हमका पीनी है' ने उन्हें करोड़ों श्रोताओं का चहेता बना दिया।

सूफी घराने की विरासत और बचपन की तालीम

साबरी परिवार ने 'भर दो झोली मेरी' जैसी कालजयी कव्वालियों से दुनिया भर के मंचों पर सूफी संगीत को नई ऊँचाई दी। संगीत की इस समृद्ध परंपरा में पले-बढ़े शबाब का बचपन से ही गायन की ओर गहरा रुझान था। हालाँकि परिवार शुरू में उन्हें इस क्षेत्र के संघर्षों से दूर रखना चाहता था, लेकिन उनकी लगन देखकर उन्हें विधिवत शास्त्रीय शिक्षा दिलाई गई।

महज 14 वर्ष की आयु में शबाब साबरी ने रामपुर-सहसवान घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान से संगीत की तालीम ली। इस प्रशिक्षण ने उनकी गायकी को वह गहराई दी जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी।

मुंबई का संघर्ष और बॉलीवुड में पदार्पण

शास्त्रीय शिक्षा पूरी करने के बाद शबाब ने अपने पिता के साथ देश-विदेश के अनेक मंचों पर लाइव प्रस्तुतियाँ दीं और मंचीय गायन की बारीकियाँ सीखीं। पिता के निधन के बाद पूरा परिवार मुंबई आ गया। यहाँ शुरुआती संघर्ष के दौरान उन्होंने अपनी शास्त्रीय गायकी को फिल्मी संगीत के अनुरूप ढाला।

वर्ष 2010 में संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद ने उन्हें सलमान खान अभिनीत फिल्म 'दबंग' में 'हमका पीनी है' गाने का अवसर दिया। यह गीत रिलीज़ के बाद जबरदस्त लोकप्रिय हुआ और शबाब साबरी को बॉलीवुड में एक नई पहचान मिली। शबाब सलमान खान और साजिद-वाजिद को अपने करियर में महत्वपूर्ण योगदान देने का श्रेय देते हैं।

चर्चित गीतों का सफ़र

बॉलीवुड में पैर जमाने के बाद शबाब साबरी ने एक के बाद एक कई यादगार गीत दिए। उन्होंने सलमान खान की फिल्म 'वीर' (2010) में ठुमरी शैली का गीत 'पवन उड़ावे बतिया' और फिल्म 'जय हो' (2014) में 'तेरे नैना मार ही डालेंगे' गाया।

संगीतकार प्रीतम के निर्देशन में फिल्म 'एजेंट विनोद' (2012) के लिए 'दिल मेरा मुफ्त का' और हिमेश रेशमिया के संगीत में फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' (2015) के लिए 'जलते दिए' जैसे गीतों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को साबित किया। जॉन अब्राहम अभिनीत फिल्म 'वेलकम बैक' (2015) के गीत 'नस नस में' में उनके स्वर को नसीरुद्दीन शाह और अनिल कपूर जैसे वरिष्ठ अभिनेताओं पर भी फिल्माया गया।

सामाजिक सरोकार और डिजिटल सफ़र

पार्श्वगायन के साथ-साथ शबाब साबरी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने मुंबई में आयोजित प्रथम भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट श्रृंखला के लिए स्वेच्छा से थीम गीत गाया। वर्ष 2026 में भी वह 'रब रूठा' और 'माही वे' जैसे नए एकल गीतों के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रूप से श्रोताओं से जुड़े हुए हैं।

सूफी विरासत की जड़ों से उठकर बॉलीवुड की मुख्यधारा में अपनी आवाज़ का लोहा मनवाने वाले शबाब साबरी का यह सफ़र बताता है कि घराने की तालीम और व्यक्तिगत मेहनत मिलकर किस तरह एक कलाकार को अलग मुकाम पर ले जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि तुलना हमेशा दिग्गजों से होती रही। 'हमका पीनी है' जैसे हल्के-फुल्के गीत से पहचान मिलना और साथ ही 'पवन उड़ावे बतिया' जैसी ठुमरी गाना — यह विरोधाभास दिखाता है कि उन्होंने कभी अपनी शास्त्रीय जड़ें नहीं छोड़ीं। डिजिटल युग में स्वतंत्र एकल गीतों की ओर उनका रुझान यह भी संकेत देता है कि अगली पीढ़ी के सूफी-पॉप कलाकार फिल्मी निर्भरता से आगे बढ़ रहे हैं।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शबाब साबरी कौन हैं और उनकी पहचान क्यों है?
शबाब साबरी एक भारतीय पार्श्वगायक हैं जो साबरी घराने की सूफी-कव्वाली परंपरा से आते हैं। वर्ष 2010 में फिल्म 'दबंग' के गीत 'हमका पीनी है' ने उन्हें बॉलीवुड में व्यापक पहचान दिलाई।
शबाब साबरी ने संगीत की शिक्षा कहाँ से ली?
शबाब साबरी ने 14 वर्ष की आयु में रामपुर-सहसवान घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान से संगीत की विधिवत तालीम ली। इससे पहले उनके पिता मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी ने उन्हें सूफी-कव्वाली की बुनियाद दी।
शबाब साबरी के सबसे प्रसिद्ध बॉलीवुड गाने कौन-से हैं?
'हमका पीनी है' (दबंग, 2010), 'पवन उड़ावे बतिया' (वीर, 2010), 'दिल मेरा मुफ्त का' (एजेंट विनोद, 2012), 'तेरे नैना मार ही डालेंगे' (जय हो, 2014), 'नस नस में' (वेलकम बैक, 2015) और 'जलते दिए' (प्रेम रतन धन पायो, 2015) उनके चर्चित गीतों में शामिल हैं।
साबरी घराने की विरासत क्या है?
साबरी घराना भारत के सबसे प्रतिष्ठित सूफी-कव्वाली परिवारों में से एक है। मोहम्मद इकबाल साबरी और उस्ताद अफजल साबरी ने 'भर दो झोली मेरी' जैसी कालजयी कव्वालियों को दुनिया भर के मंचों पर प्रस्तुत कर सूफी संगीत को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
शबाब साबरी अभी क्या कर रहे हैं?
वर्ष 2026 में शबाब साबरी 'रब रूठा' और 'माही वे' जैसे नए एकल गीतों के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं। इसके अलावा वह लाइव संगीत मंचों पर भी प्रस्तुतियाँ देते रहते हैं और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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