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'समर ऑफ 77' में स्वानंद किरकिरे और सुधीर मिश्रा फिर साथ, इमरजेंसी दौर की कहानी को संगीत से जीवंत करेंगे

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'समर ऑफ 77' में स्वानंद किरकिरे और सुधीर मिश्रा फिर साथ, इमरजेंसी दौर की कहानी को संगीत से जीवंत करेंगे

सारांश

स्वानंद किरकिरे और सुधीर मिश्रा पाँचवीं बार साथ आ रहे हैं। इमरजेंसी काल की पृष्ठभूमि में बनी 'समर ऑफ 77' में किरकिरे के छह गाने कहानी को संगीत के ज़रिए जीवंत करेंगे — जहाँ संगीत, कविता और अभिव्यक्ति जनता की आवाज़ थे।

मुख्य बातें

स्वानंद किरकिरे और सुधीर मिश्रा आगामी राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ 'समर ऑफ 77' में साथ काम कर रहे हैं।
यह दोनों का पाँचवाँ प्रोजेक्ट है; सीरीज़ 1975-1977 के इमरजेंसी काल पर आधारित है।
किरकिरे ने सीरीज़ के लिए छह गाने कंपोज़ किए हैं, जिनमें से तीन को उन्होंने स्वयं गाया है।
पिछली सफल परियोजनाओं में 'हजारों ख्वाहिश ऐसी' का 'बावरा मन' और 'खोया खोया चांद' शामिल हैं।
सीरीज़ में आठ एपिसोड होंगे, जो इमरजेंसी काल के युवाओं के विद्रोह और सपनों को दर्शाएँगे।

मुंबई, 5 मई 2026 — प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार और लेखक स्वानंद किरकिरे और प्रख्यात फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा आगामी राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ 'समर ऑफ 77' में अपने सहयोग को नए सिरे से शुरू कर रहे हैं। यह उनका पाँचवाँ प्रोजेक्ट है, जो 1975 से 1977 के इमरजेंसी काल की पृष्ठभूमि में आठ एपिसोड के साथ आएगा।

किरकिरे के साथ काम का अनुभव

स्वानंद किरकिरे ने सुधीर मिश्रा के साथ अपने सहयोग को अत्यंत सार्थक बताया। उन्होंने कहा, ''सुधीर मिश्रा कहानी को ईमानदारी और गहराई के साथ प्रस्तुत करते हैं, जो उन्हें एक अलग पहचान देता है। ऐसे निर्देशक के साथ काम करना हमेशा सीखने वाला अनुभव होता है, क्योंकि वह हर पहलू को संवेदनशीलता से समझते हैं।''

पिछले सफल सहयोग

किरकिरे और मिश्रा ने इससे पहले कई यादगार परियोजनाओं में साथ काम किया है। 'हजारों ख्वाहिश ऐसी' का लोकप्रिय गीत 'बावरा मन' और फिल्म 'खोया खोया चांद' उनके सफल सहयोग के प्रमुख उदाहरण हैं। इन प्रोजेक्ट्स ने दर्शकों को गहराई से जोड़ा था और संगीत को कहानी का अभिन्न अंग बनाया था।

संगीत को कहानी का केंद्र

किरकिरे ने बताया कि सुधीर मिश्रा की विशेषता यह है कि वह अपनी फिल्मों में संगीत को पूरा स्पेस देते हैं। उन्होंने कहा, ''आज के समय में जहाँ कई बार संगीत सिर्फ़ एक औपचारिकता बनकर रह जाता है, वहीं सुधीर उसे कहानी का अहम हिस्सा बनाते हैं। जब निर्देशक संगीत पर भरोसा करते हैं, तो एक संगीतकार को भी कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।''

'समर ऑफ 77' की पृष्ठभूमि

यह सीरीज़ इमरजेंसी काल (1975-1977) पर केंद्रित है, जो उस दौर के युवाओं की सोच, उनके विद्रोह, सपनों और पहचान की तलाश को दर्शाएगी। इस ऐतिहासिक अवधि में संगीत, कविता और अभिव्यक्ति ने जनता की आवाज़ बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संगीत रचना की चुनौती और प्रेरणा

किरकिरे ने अपनी पिछली फिल्म 'बैंडवाले' के बाद ऐसे प्रोजेक्ट की तलाश में थे जहाँ संगीत कहानी का अभिन्न अंग बने। 'समर ऑफ 77' ने उन्हें यह अवसर दिया। उन्होंने कहा, ''इस तरह की कहानी के लिए संगीत बनाना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें उस दौर की आत्मा को पकड़ना ज़रूरी होता है।''

छह गानों की रचना

इस सीरीज़ के लिए किरकिरे ने कुल छह गाने कंपोज़ किए हैं, जिनमें से तीन गानों को उन्होंने अपनी आवाज़ से भी गाया है। यह संगीतात्मक योगदान सीरीज़ को इमरजेंसी काल की सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ेगा, जहाँ संगीत प्रतिरोध और अभिव्यक्ति का माध्यम था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सांस्कृतिक क्षण था जहाँ कला और संगीत ने प्रतिरोध का रूप लिया। स्वानंद किरकिरे जैसे संगीतकारों को फिर से उस भूमिका को स्मरण करना महत्वपूर्ण है। सुधीर मिश्रा की शक्ति यह है कि वह संगीत को केवल पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि कहानी का हृदय बनाते हैं — जो आज के ऐसे समय में दुर्लभ है जब संगीत अक्सर सिर्फ़ सजावट बनकर रह गया है। यह सहयोग दिखाता है कि कला का राजनीतिक महत्व कभी खत्म नहीं होता।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'समर ऑफ 77' क्या है?
'समर ऑफ 77' एक आठ एपिसोड की राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ है जो 1975 से 1977 के इमरजेंसी काल पर आधारित है। यह सीरीज़ उस दौर के युवाओं की सोच, विद्रोह, सपनों और पहचान की तलाश को दर्शाएगी।
स्वानंद किरकिरे और सुधीर मिश्रा ने पहले कौन-कौन से प्रोजेक्ट साथ में किए हैं?
किरकिरे और मिश्रा ने 'हजारों ख्वाहिश ऐसी' (जिसमें लोकप्रिय गीत 'बावरा मन' था) और फिल्म 'खोया खोया चांद' सहित कई यादगार परियोजनाओं में साथ काम किया है। 'समर ऑफ 77' उनका पाँचवाँ प्रोजेक्ट है।
'समर ऑफ 77' के लिए स्वानंद किरकिरे ने कितने गाने बनाए हैं?
स्वानंद किरकिरे ने इस सीरीज़ के लिए कुल छह गाने कंपोज़ किए हैं, जिनमें से तीन गानों को उन्होंने अपनी आवाज़ से भी गाया है।
इमरजेंसी काल में संगीत की क्या भूमिका थी?
इमरजेंसी काल (1975-1977) में संगीत, कविता और अभिव्यक्ति ने जनता की आवाज़ बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह सीरीज़ इसी सांस्कृतिक प्रतिरोध को दर्शाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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