'आर्टिस्ट' कहने में असहजता: कोंकणा सेन शर्मा ने साझा की अपनी सोच
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा ने अपने बेबाक विचार, शानदार अभिनय और अनोखी फिल्मों के लिए हमेशा पहचान बनाई है। इस समय, वह अपनी नई स्ट्रीमिंग फिल्म 'एक्यूज्ड' के प्रमोशन में व्यस्त हैं। उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ की गई एक विशेष बातचीत में अपनी आत्म-आलोचना के बारे में बताया और कहा कि कई बार खुद को आर्टिस्ट कहना उन्हें अजीब लगता है।
फिल्म के प्रचार के दौरान कोंकणा ने यह भी कहा, ''बाहर की दुनिया मुझे जिस नजर से देखती है, मैं खुद को उस नजर से नहीं देख पाती। मुझे अपनी सामाजिक पहचान के बारे में सोचने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। मैं खुद को एक साधारण इंसान की तरह देखती हूं, जो निरंतर सीखने और खुद को समझने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए, कई बार मुझे खुद को आर्टिस्ट कहना थोड़ा बनावटी लगता है।''
जब राष्ट्र प्रेस ने उनसे आत्म-आलोचना के बारे में पूछा, तो कोंकणा ने उत्तर दिया, ''आत्म-आलोचना और आत्मचिंतन से इंसान बेहतर बनता है। यह मान लेना कि हम परफेक्ट हैं, यह गलत है। खुद से सवाल करना, अपनी गलतियों को पहचानना और समय के साथ सोच में बदलाव लाना आगे बढ़ने की प्रक्रिया है।''
कोंकणा ने कहा, ''लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं, उस पर हमारा बहुत कम नियंत्रण होता है। कोई भी इंसान अपनी इमेज को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकता। समाज, मीडिया और दर्शक अपने नजरिए से किसी भी कलाकार की छवि बना लेते हैं। ऐसे में, अगर कोई कलाकार हमेशा इस चिंता में रहे कि दुनिया उसे कैसे देखती है, तो वह खुद से दूर हो जाएगा। बेहतर यही है कि इंसान अपने भीतर की दुनिया को मजबूत बनाए और बाहरी राय को खुद पर हावी न होने दे।''
उन्होंने कहा, ''कभी-कभी बनाई गई इमेज को तोड़ना आवश्यक होता है। एक ही तरह की सोच या इमेज में बंधकर रहना कलाकार के साथ-साथ इंसान के लिए भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए मैं कोशिश करती हूं कि लोगों की राय से ज्यादा अपनी आंतरिक आवाज पर ध्यान दूं। मेरे लिए मानसिक शांति अधिक महत्वपूर्ण है।''
कोंकणा सेन शर्मा की फिल्म 'एक्यूज्ड' 27 फरवरी से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी।