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कुब्रा सैत: दर्शकों के लिए ओटीटी और फिल्मी पर्दे के बीच का चयन अब है पूरी स्वतंत्रता

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कुब्रा सैत: दर्शकों के लिए ओटीटी और फिल्मी पर्दे के बीच का चयन अब है पूरी स्वतंत्रता

सारांश

कुब्रा सैत ने दर्शकों की आज़ादी पर जोर दिया है कि वे फिल्म और ओटीटी के बीच चयन कर सकते हैं। कहानी का भावनात्मक जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण है, और इससे माध्यम का महत्व कम हो जाता है।

मुख्य बातें

दर्शकों की आज़ादी: दर्शक अपने पसंद के अनुसार फिल्म या ओटीटी का चयन कर सकते हैं।
भावनात्मक जुड़ाव: कहानी का भावनात्मक संबंध सबसे महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया का प्रभाव: सोशल मीडिया ने कलाकारों पर दबाव बढ़ाया है।
आत्मविश्वास: आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा असली सुरक्षा है।

मुंबई, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की दुनिया में लगातार परिवर्तन हो रहा है। अब दर्शकों के पास यह चुनने की स्वतंत्रता है कि वे किस कहानी को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं या फिर अपने फोन या टीवी पर। इस बदलाव के संदर्भ में, अभिनेत्री कुब्रा सैत ने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं, जो फिल्म और ओटीटी के बीच की बहस में एक नया दृष्टिकोण पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि कहानी और पात्रों के साथ भावनात्मक संबंध सबसे महत्वपूर्ण होता है, और यह माध्यम इस संबंध को प्रभावित नहीं करता।

कुब्रा सैत ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "दर्शकों के पास अब पूरी आज़ादी है कि वे किसी भी माध्यम का चयन कर सकें। यदि कहानी दिल को छूती है, तो यह मायने नहीं रखता कि वह फिल्म के पर्दे पर है या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर। असली सवाल यह है कि दर्शक कहानी से कितनी गहराई से जुड़ते हैं और किरदारों को कितनी गहराई से महसूस करते हैं।"

जब उनसे पूछा गया कि फिल्म बनाम ओटीटी में कौन बेहतर है, तो कुब्रा ने कहा, "इसमें कोई विजेता या हारने वाला नहीं है। दोनों माध्यमों का अपना महत्व है और दर्शक अपने अनुभव के अनुसार इसे चुनते हैं।"

कुब्रा ने यह भी कहा, "वास्तविक भावनात्मक जुड़ाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। चाहे कहानी फिल्म में हो या ओटीटी पर, दर्शक का अनुभव यह तय करता है कि वे कितने प्रभावित होते हैं। यदि कहानी दिल को छूती है, किरदार जीवंत लगते हैं और दर्शक उसमें खुद को जोड़ पाते हैं, तो माध्यम का कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।"

सोशल मीडिया के प्रभाव पर कुब्रा ने कहा, "आज के समय में सोशल मीडिया ने अभिनेत्रियों और कलाकारों के लिए बॉडी स्टैंडर्ड्स के दबाव को बढ़ा दिया है। लोग प्लेटफॉर्म को ही दोष देते हैं, जबकि असल में हम खुद को लेकर असुरक्षा महसूस करते हैं। मेरा मानना है कि आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा ही असली सुरक्षा है।"

उन्होंने कहा, "मैं अपने शरीर को केवल बेसिक फिटनेस तक सीमित रखती हूं। यदि कोई अन्य व्यक्ति अपने तरीके से फिटनेस या लुक बनाए रखता है, तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है। हमें दूसरों की तुलना में खुद को आंकना बंद करना चाहिए और अपनी जिंदगी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। असुरक्षा या सुरक्षा अंदर से आती है, सोशल मीडिया से नहीं।"

कुब्रा ने कहा कि कलाकारों को सोशल मीडिया या बाहरी दबाव असुरक्षित महसूस करवा सकते हैं, लेकिन यदि वे अपने आप पर भरोसा रखें तो कोई भी प्लेटफॉर्म उन्हें कमजोर नहीं कर सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां वे अपनी पसंद के अनुसार कहानी का अनुभव कर सकते हैं। यह दर्शाता है कि बदलते समय के साथ, कहानी और पात्रों के साथ भावनात्मक जुड़ाव ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुब्रा सैत का मानना है कि ओटीटी और फिल्म दोनों का महत्व है?
हां, कुब्रा ने कहा कि दोनों माध्यमों का अपना महत्व है और दर्शक अपने अनुभव के अनुसार चुनते हैं।
कुब्रा सैत ने सोशल मीडिया के बारे में क्या कहा?
कुब्रा ने बताया कि सोशल मीडिया ने बॉडी स्टैंडर्ड्स के दबाव को बढ़ा दिया है, लेकिन आत्मविश्वास ही असली सुरक्षा है।
क्या कहानी का माध्यम महत्वपूर्ण है?
कुब्रा का मानना है कि यदि कहानी दिल को छूती है, तो माध्यम का कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
राष्ट्र प्रेस
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