क्या <b>श्रद्धा</b> से ज्यादा जरूरी है <b>कमाई</b>? खाटू श्यामजी को समर्पित नए फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर बोले कन्हैया लाल
सारांश
Key Takeaways
- श्रद्धा का महत्व
- एआई का उपयोग धार्मिक कहानियों में
- भक्ति को फैलाने का प्रयास
- युवा पीढ़ी को प्रेरित करना
- धर्म और तकनीक का संगम
मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आस्था और तकनीक का अनोखा संगम देखने को मिला जब खाटू श्यामजी को समर्पित एक एआई-आधारित फिल्म थिएटर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर गायक कन्हैया लाल ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक सेवा है, जिसका उद्देश्य खाटू श्यामजी की भक्ति को विश्व के हर कोने तक पहुंचाना है।
कन्हैया लाल ने बताया, "इस फिल्म का निर्माण कमाई के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा के कारण किया गया है। यह फिल्म पूरी दुनिया को खाटू श्यामजी से जोड़ने का एक प्रयास है। इसका व्यावसायिक भविष्य क्या होगा, इस पर अभी कहना मुश्किल है, लेकिन अगर इसे सही भावना और भक्ति के साथ बनाया गया है, तो इसका प्रभाव जरूर पड़ेगा। मेरा मानना है कि जब लक्ष्य सही हो, तो माध्यम का महत्व नहीं है।"
कन्हैया लाल ने श्रद्धा और एआई के संबंध में कहा, "एआई भी इंसान द्वारा विकसित की गई तकनीक है, लेकिन जब तक इंसान के भीतर ईश्वरीय कृपा नहीं होगी, तब तक सच्ची भक्ति प्रकट नहीं हो सकती। खाटू श्यामजी के जीवन से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिनसे लोग अभी अनजान हैं। बर्बरीक का बचपन, उनके साथी, पांडवों से उनका संबंध और उन्हें मिला वरदान, इन सभी पहलुओं को एआई के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यही इस फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता है।"
जब राष्ट्र प्रेस ने उनसे पूछा कि एआई फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद उनके मन में क्या भावना थी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें जिम्मेदारी का एहसास हुआ। "भक्ति तो पहले से ही मेरे अंदर है, लेकिन यह सोचकर गर्व भी हुआ कि भगवान ने मुझे यह अवसर दिया। पहले मैं भक्ति का संदेश फैलाने के लिए जगह-जगह जाता था, अब यह संदेश घर बैठे लोगों तक पहुंचेगा।"
धार्मिक कहानियों को नए तरीके से प्रस्तुत करने पर उन्होंने कहा, "इससे पवित्रता कम नहीं होती। अगर फिल्म के माध्यम से युवा पीढ़ी भक्ति से जुड़ती है, तो यह एक सकारात्मक बदलाव है। भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है; इस बात को भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाकर साबित किया था।"
अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कन्हैया लाल ने कहा, "जब मैंने पहली बार खाटू श्यामजी के भजन गाए, तो मुझे आत्मिक संतोष मिला। मुझे यह भी एहसास हुआ कि धर्म एक संवेदनशील क्षेत्र है, जिसमें मर्यादा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। संगीत में प्रयोग की आजादी होती है, लेकिन भक्ति में एक सीमा होती है, जिसे पार नहीं किया जा सकता।"
अपने जीवन में आए बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "कई वर्षों तक मैंने बिना किसी फीस के भजन गाए। एक समय ऐसा आया जब मैंने भगवान के सामने खड़े होकर महसूस किया कि अब ईश्वर ही मेरा मार्गदर्शन करेंगे। उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और समर्पण के साथ आगे बढ़ता गया।"