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मधुमिता की मीडिया से अपील: 'महिला निर्देशक' नहीं, सिर्फ 'निर्देशक' कहें

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मधुमिता की मीडिया से अपील: 'महिला निर्देशक' नहीं, सिर्फ 'निर्देशक' कहें

सारांश

निर्देशक मधुमिता ने 'जॉन डो' के ट्रेलर लॉन्च पर मीडिया को एक सोचने पर मजबूर करने वाला संदेश दिया — जेंडर लेबल फिल्म की पहचान से पहले उसकी छवि तय करता है। यह एक निर्देशक की पेशेवर पहचान की माँग है, न कि महिला अधिकारों की लड़ाई।

मुख्य बातें

निर्देशक मधुमिता ने मुंबई में 'जॉन डो' के ट्रेलर लॉन्च पर मीडिया से अपील की कि उन्हें 'महिला निर्देशक' नहीं, सिर्फ 'निर्देशक' कहा जाए।
उनका तर्क है कि जेंडर लेबल फिल्म के रिलीज़ से पहले ही उसकी पूर्वनिर्धारित छवि बना देता है।
फिल्म 'जॉन डो' एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, जिसमें अर्जुन दास पहली बार पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं।
फिल्म का निर्माण अर्का मीडिया वर्क्स ( 'बाहुबली' प्रोडक्शन हाउस) ने किया है; निर्माता शोबू यारलागड्डा और प्रसाद देवीनेनी हैं।
फिल्म 13 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

निर्देशक मधुमिता ने अपनी आगामी साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म 'जॉन डो' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान मीडिया और फिल्म समीक्षकों से एक सार्थक अपील की — उन्हें 'महिला निर्देशक' नहीं, बल्कि सिर्फ 'निर्देशक' कहा जाए। मुंबई में आयोजित इस इवेंट में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की पहचान से पहले जेंडर जोड़ने से फिल्म बनने से पहले ही उसकी एक पूर्वनिर्धारित छवि बन जाती है।

मधुमिता ने क्यों उठाई यह बात

मधुमिता ने कहा, 'इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मुझे एक महिला होने पर गर्व नहीं है। लेकिन जब किसी पद या पहचान के आगे जेंडर जोड़ दिया जाता है, तो कई बार फिल्म बनने से पहले ही उसकी एक छवि बना दी जाती है।' उन्होंने जोड़ा कि लोग यह मान लेते हैं कि महिला निर्देशक सिर्फ रोमांटिक या हल्की-फुल्की फिल्में ही बनाएंगी।

उनकी यह अपील सीधे और बेबाक शब्दों में आई — 'जब आप किसी फिल्म का रिव्यू करें, तो यह न लिखें कि किसी महिला निर्देशक की फिल्म अच्छी है या खराब। सिर्फ इतना लिखें कि फिल्म अच्छी है या खराब।'

फिल्म निर्माण के प्रति मधुमिता का नज़रिया

फिल्म 'केडी अंगिरा करुप्पुदुरई' से व्यापक प्रशंसा बटोर चुकीं मधुमिता ने बताया कि वह हर जॉनर की फिल्में बनाना चाहती हैं। उन्होंने कहा, 'मेरी इच्छा है कि मैं हर जॉनर की फिल्में बनाऊं और किसी भी जॉनर को बिना आजमाए न छोड़ूं। हालांकि, मेरी सभी फिल्मों में एक चीज कॉमन होगी और वह है इंसानी भावनाएं।' यही उनकी फिल्मों की यूएसपी होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग में महिला निर्देशकों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उनकी पहचान अक्सर उनके जेंडर से पहले परिभाषित होती है — एक असंतुलन जिसे मधुमिता ने सार्वजनिक मंच पर उजागर किया।

'जॉन डो' का ट्रेलर: क्या है कहानी

फिल्म 'जॉन डो' का ट्रेलर रिलीज होते ही दर्शकों के बीच जिज्ञासा बढ़ गई है। ट्रेलर की शुरुआत एक छोटे लड़के और उसकी बड़ी बहन से होती है, जो रात में बाहर निकलते हैं। बहन के व्यस्त रहने पर वह छोटे भाई को आइसक्रीम लेने भेजती है, लेकिन कुछ ही देर में वह लापता हो जाता है।

ट्रेलर में पता चलता है कि यह परिवार हाल ही में दुबई से भारत आया है। बच्चे के गायब होने की सूचना पुलिस को दी जाती है, जिसके बाद दो पुलिस अधिकारी — अर्जुन दास और संचना नटराजन — जाँच शुरू करते हैं। शुरुआती मामला जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, परतें खुलती जाती हैं और कहानी रहस्यमयी होती जाती है।

अर्जुन दास इस फिल्म में चंद्रू नाम के किरदार में हैं और यह पहली बार है जब वह पर्दे पर पुलिस अधिकारी की भूमिका में नज़र आएंगे।

फिल्म का निर्माण और रिलीज़ डेट

फिल्म 'जॉन डो' का निर्माण अर्का मीडिया वर्क्स के बैनर तले हो रहा है — यही प्रोडक्शन हाउस पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर 'बाहुबली' के पीछे था। शोबू यारलागड्डा और प्रसाद देवीनेनी फिल्म के निर्माता हैं, जबकि किशोर केदारी और मधुमिता सह-निर्माता हैं। सौम्या शर्मा क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं।

फिल्म 13 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में दर्शकों से रूबरू होगी। ट्रेलर की जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि मधुमिता की यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर बॉक्स ऑफिस पर क्या छाप छोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनके जेंडर से पहले परखा जाता है। गौरतलब है कि जब कोई पुरुष निर्देशक साइकोलॉजिकल थ्रिलर बनाता है, तो उसे 'पुरुष निर्देशक की फिल्म' नहीं कहा जाता — यह असंतुलन ही मधुमिता के सवाल की जड़ है। यह माँग सिर्फ शब्दावली की नहीं, बल्कि पेशेवर मूल्यांकन की है। मीडिया और आलोचक अगर इस अपील को गंभीरता से लें, तो यह भारतीय फिल्म पत्रकारिता में एक ज़रूरी बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मधुमिता ने मीडिया से क्या अपील की है?
मधुमिता ने मीडिया और फिल्म समीक्षकों से अपील की है कि उन्हें 'महिला निर्देशक' नहीं, सिर्फ 'निर्देशक' कहा जाए। उनका कहना है कि जेंडर लेबल फिल्म की रिलीज़ से पहले ही उसकी एक पूर्वनिर्धारित छवि बना देता है।
फिल्म 'जॉन डो' किस बारे में है?
'जॉन डो' एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है जिसमें एक बच्चे के लापता होने की गुत्थी को सुलझाने की कहानी है। दो पुलिस अधिकारी — अर्जुन दास और संचना नटराजन — जाँच करते हैं और मामला जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, रहस्यमयी होता जाता है।
'जॉन डो' कब रिलीज़ होगी और इसे किसने बनाया है?
फिल्म 13 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। इसका निर्माण अर्का मीडिया वर्क्स के बैनर तले शोबू यारलागड्डा और प्रसाद देवीनेनी ने किया है, जबकि किशोर केदारी और मधुमिता सह-निर्माता हैं।
अर्जुन दास 'जॉन डो' में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
अर्जुन दास फिल्म में 'चंद्रू' नाम के पुलिस अधिकारी की भूमिका में हैं। यह पहली बार है जब वह पर्दे पर पुलिस अधिकारी के किरदार में नज़र आएंगे।
मधुमिता ने पहले कौन-सी फिल्म बनाई है?
मधुमिता अपनी फिल्म 'केडी अंगिरा करुप्पुदुरई' के लिए व्यापक प्रशंसा बटोर चुकी हैं। 'जॉन डो' उनकी अगली बड़ी परियोजना है, जो पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज़ हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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