जब मनमोहन देसाई ने अमिताभ बच्चन को दिया था एक वचन: 'मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला'
सारांश
Key Takeaways
- मनमोहन देसाई और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा में बड़ा योगदान दिया।
- उनकी दोस्ती और विश्वास की कहानी प्रेरणादायक है।
- देसाई की कई फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं।
- उनकी पहली फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' थी।
- देसाई का निधन सिनेमा के लिए एक बड़ा नुकसान था।
मुंबई, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ जोड़ियाँ खास होती हैं। मनमोहन देसाई और अमिताभ बच्चन की जोड़ी भी ऐसी ही थी। दोनों ने मिलकर कई ऐसी फिल्में बनाई हैं जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। यही वजह है कि उनके बीच का रिश्ता केवल निर्देशक और अभिनेता का नहीं, बल्कि दोस्ती और विश्वास का भी था। इस भरोसे की सबसे बड़ी मिसाल तब देखने को मिली, जब मनमोहन देसाई ने 'अमर अकबर एंथनी' की सफलता के जश्न में अमिताभ से कहा, 'तुम मुझे छोड़कर चले जाओ तो सही, लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला।'
26 फरवरी 1937 को मुंबई में जन्मे मनमोहन देसाई ने अपने करियर की शुरुआत एक छोटे से असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में की थी। इस दौरान उन्होंने दर्शकों की पसंद को समझा और 70 और 80 के दशक में कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। उनकी 'अमर अकबर एंथनी', 'धरम वीर', 'चाचा भतीजा' और 'परवरिश' जैसी फिल्में दर्शकों के बीच बेहद सफल रहीं।
'अमर अकबर एंथनी' उनके साथ की पहली फिल्म थी, जिससे उनकी गहरी दोस्ती हुई। फिल्म की सफलता की पार्टी में मनमोहन देसाई ने कहा था, 'अब तुम मुझे छोड़कर चले जाओ तो क्या होगा, लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला।' उन्होंने इस वचन को आखिरी तक निभाया।
मनमोहन की ज्यादातर फिल्मों में अमिताभ बच्चन मुख्य अभिनेता रहे। दोनों ने मिलकर 'सुहाग', 'नसीब', 'देश प्रेमी', 'कुली', 'मर्द', और 'गंगा जमुना सरस्वती' जैसी कई सफल फिल्में कीं। इनमें से अधिकांश सुपरहिट रहीं।
एक साक्षात्कार में देसाई ने कहा था कि अमिताभ उनकी फिल्मों की आत्मा हैं। वहीं, अमिताभ बच्चन ने भी अपने करियर की ऊंचाइयों के लिए देसाई का आभार व्यक्त किया।
मनमोहन देसाई का निधन 1 मार्च 1994 को हुआ, लेकिन उनके और अमिताभ बच्चन के बीच का बंधन सिनेमा के इतिहास में हमेशा जीवित रहेगा।