मीनाक्षी शेषाद्रि बोलीं: 'सास-बहू का रिश्ता मां-बेटी जैसा होना चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने 20 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम पर अपनी 1990 में रिलीज हुई फिल्म 'घर हो तो ऐसा' के मशहूर गाने 'जनवरी फरवरी' का एक वीडियो साझा किया और सास-बहू के रिश्ते पर अपने विचार खुलकर रखे। उन्होंने कहा कि शादी के बाद सास और बहू के बीच मां और बेटी जैसा खूबसूरत रिश्ता होना चाहिए — न कि वह टकराव, जो अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है।
इंस्टाग्राम पोस्ट और पुरानी यादें
मीनाक्षी ने वीडियो में अपने पुराने स्टाइलिश अंदाज़ और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को 90 के दशक की याद दिला दी। पोस्ट के साथ उन्होंने फिल्म और उसमें दर्शाए गए सास-बहू के रिश्ते पर विस्तार से लिखा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
फिल्म में किरदार और संदेश
मीनाक्षी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि फिल्म 'घर हो तो ऐसा' में उन्होंने सीमा कुमार का किरदार निभाया था — एक मज़बूत और निडर महिला, जो ससुराल में गलत व्यवहार सहने के बजाय उसका डटकर सामना करती है। उन्होंने लिखा, 'फिल्म में मेरी सास का किरदार दिग्गज अभिनेत्री बिंदू ने निभाया था। मेरे किरदार ने सास को कुछ कड़े सबक सिखाए थे।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'फिल्म में सास-बहू के बीच होने वाले टकराव को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के साथ-साथ इसमें कॉमेडी और ड्रामा भी जोड़ा गया था। कहानी में कराटे के सीन भी देखने को मिले थे। फिल्म ने घरेलू रिश्तों से जुड़े एक गंभीर मुद्दे को मनोरंजन के साथ दर्शकों के सामने रखा था।'
फिल्म की मुख्य जानकारी
फिल्म में अनिल कपूर ने सीमा के पति अमर का किरदार निभाया था। बिंदू ने एक ऐसी सास का रोल अदा किया था, जो बहू के प्रति सख्त और नकारात्मक रवैया रखती है — जो उस दौर की फिल्मों में एक आम चित्रण था। प्रसिद्ध गाने 'जनवरी फरवरी' को आशा भोसले और मोहम्मद अजीज ने गाया था, संगीत बप्पी लाहिड़ी ने दिया था और बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे।
मीनाक्षी की व्यक्तिगत राय
अपनी पोस्ट के अंत में मीनाक्षी शेषाद्रि ने लिखा, 'मैं पर्सनली चाहती हूं कि शादी के बाद सास और बहू के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बनना चाहिए, बिल्कुल मां और बेटी जैसा।' यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना पा रही है और इस पर चर्चा जारी है।
बॉलीवुड में सास-बहू का चित्रण
गौरतलब है कि 90 के दशक की हिंदी फिल्मों में सास-बहू का रिश्ता अक्सर कहानी की धुरी हुआ करता था। सास को प्रायः खलनायिका और बहू को पीड़ित के रूप में दिखाया जाता था। मीनाक्षी की यह टिप्पणी उस पुराने सिनेमाई ढाँचे पर एक सकारात्मक और संवेदनशील नज़रिया पेश करती है, जो आज के दर्शकों के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है।