जीतेंद्र की समय पाबंदी पर मौसमी चटर्जी का खुलासा: 'साढ़े नौ की शूटिंग के लिए साढ़े आठ बजे सेट पर होते थे'
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जीतेंद्र के अनुशासन और समय की पाबंदी से जुड़े अनोखे किस्से साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि जीतेंद्र शूटिंग शुरू होने से पूरे एक घंटे पहले तैयार होकर सेट पर पहुँच जाते थे — एक ऐसी आदत जो उन्हें निर्माताओं और निर्देशकों का सबसे भरोसेमंद कलाकार बनाती थी।
कपिल शर्मा के मंच पर छलके पुराने किस्से
मौसमी चटर्जी और अभिनेत्री रीना रॉय हाल ही में लोकप्रिय टेलीविज़न शो 'द कपिल शर्मा शो' में पहुँचीं। इस मंच पर पुराने दिनों को याद करते हुए मौसमी चटर्जी ने जीतेंद्र के साथ काम करने के अपने अनुभव खुलकर साझा किए। उन्होंने कहा, ''जीतेंद्र बेहद मेहनती कलाकार थे और निर्माता-निर्देशकों के पसंदीदा कलाकारों में गिने जाते थे।''
मौसमी ने हँसते हुए जोड़ा कि जीतेंद्र को 'प्रोड्यूसर के आदमी' कहा जाता था, क्योंकि वे अपने काम में कभी लापरवाही नहीं बरतते थे।
साढ़े आठ बजे तैयार, साढ़े नौ की शूटिंग
मौसमी चटर्जी ने एक विशेष किस्सा सुनाते हुए बताया, ''अगर शूटिंग की पारी सुबह साढ़े नौ बजे शुरू होनी होती थी, तो जीतेंद्र सुबह साढ़े आठ बजे तक पूरी तरह तैयार होकर सेट पर पहुँच जाते थे।'' वे सिर्फ खुद ही समय के पाबंद नहीं थे, बल्कि बाकी कलाकारों और पूरी टीम को भी बार-बार याद दिलाते थे कि जल्दी तैयार हो जाएँ ताकि शूटिंग समय पर शुरू हो सके।
आउटडोर शूट में भी सबसे आगे
अभिनेत्री रीना रॉय ने भी जीतेंद्र की इस आदत की भरपूर तारीफ की। उन्होंने बताया, ''जब पूरी टीम किसी बाहरी लोकेशन पर आउटडोर शूटिंग के लिए जाती थी, तब भी जीतेंद्र सबसे पहले तैयार रहते थे। वे होटल के रिसेप्शन से फोन करके बाकी कलाकारों को उठाते और कहते कि आउटडोर शूटिंग के लिए निकलना है, इसलिए जल्दी रेडी हो जाओ।''
इंडस्ट्री में लंबी पारी का राज़
मौसमी चटर्जी ने इस पूरे संस्मरण का सार बताते हुए कहा, ''जीतेंद्र इतने लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में इसलिए टिक पाए, क्योंकि उनमें मेहनत और समय की पाबंदी दोनों थीं।'' उन्होंने यह भी बताया कि उस दौर में हर अभिनेता ऐसा नहीं था — कुछ कलाकार अपनी मर्जी से काफी देर से सेट पर पहुँचते थे, जिससे पूरी शूटिंग की टाइमिंग प्रभावित होती थी। जीतेंद्र का यह अनुशासन उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता था और आज भी उनकी विरासत का अहम हिस्सा है।