15 अक्टूबर 2026
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नरेंद्र चंचल जन्मदिन: 'बॉबी' के गाने से मिली पहचान, फिल्मफेयर जीतने वाले भजन सम्राट की कहानी

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नरेंद्र चंचल जन्मदिन: 'बॉबी' के गाने से मिली पहचान, फिल्मफेयर जीतने वाले भजन सम्राट की कहानी

सारांश

अमृतसर की गलियों से माता के दरबार तक — नरेंद्र चंचल की आवाज़ ने एक नहीं, दो दुनियाएँ फ़तह कीं। 'बॉबी' का फ़िल्मफेयर और जागरण का वह अमर जोश — उनके जन्मदिन पर याद करें एक ऐसे फ़नकार को जिसने भजन गायकी को नई ऊँचाई दी।

मुख्य बातें

नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर 1940 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था; असली नाम नरेंद्र खरबंदा बताया जाता है।
फ़िल्मकार राज कपूर ने एक कार्यक्रम में उनकी आवाज़ सुनकर उन्हें 1973 की फ़िल्म 'बॉबी' में गाने का मौका दिया।
गाने 'बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो' के लिए उन्हें 1974 में फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक पुरस्कार मिला।
'चलो बुलावा आया है' और 'तूने मुझे बुलाया शेरावालिए' उनके सबसे लोकप्रिय भजन बने, जो आज भी जागरण में बजते हैं।
नरेंद्र चंचल का निधन 22 जनवरी 2021 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में 80 वर्ष की आयु में हुआ।

भजन सम्राट नरेंद्र चंचल का जन्म 16 अक्टूबर 1940 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था — एक ऐसा फ़नकार जिसकी आवाज़ ने माता के जागरण की रौनक को एक अलग ही आयाम दिया और साथ ही बॉलीवुड में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। 'चलो बुलावा आया है' और 'तूने मुझे बुलाया शेरावालिए' जैसे कालजयी भजनों के रचयिता चंचल की पहचान दरअसल केवल जागरण तक सीमित नहीं थी — 1973 में रिलीज़ फ़िल्म 'बॉबी' के एक गाने ने उन्हें रातोंरात राष्ट्रीय पहचान दिला दी।

अमृतसर से मुंबई तक का सफ़र

नरेंद्र चंचल का असली नाम नरेंद्र खरबंदा बताया जाता है। उनकी माँ कैलाशवती भजन गाया करती थीं और परिवार का माहौल गहरे धार्मिक रंग में रंगा था। घर में रेडियो या ग्रामोफोन न होने के बावजूद बालक नरेंद्र रिकॉर्ड की दुकानों के बाहर बैठकर मोहम्मद रफी और मन्ना डे के गाने सुनते और उन्हें याद कर गाने की कोशिश करते थे। मोहल्ले के छोटे-छोटे कार्यक्रमों में गाते-गाते उनकी आवाज़ धीरे-धीरे लोगों की पसंद बनने लगी।

उनके नाम 'चंचल' की कहानी भी कम रोचक नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के दिनों में उनके शरारती और चपल स्वभाव से प्रभावित होकर एक शिक्षक ने उन्हें 'चंचल' उपनाम दिया था। आगे चलकर यही नाम उनकी पहचान का हिस्सा बन गया।

'बॉबी' और फ़िल्मी करियर की शुरुआत

नरेंद्र चंचल के करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब प्रसिद्ध फ़िल्मकार राज कपूर ने एक कार्यक्रम में उनकी आवाज़ सुनी। उस दिन चंचल बुल्ले शाह की सूफ़ी रचना प्रस्तुत कर रहे थे और राज कपूर उनकी गायकी से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपनी अगली फ़िल्म में गाने का मौका दे दिया। 1973 में रिलीज़ हुई 'बॉबी' में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में थे।

फ़िल्म का गाना 'बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो, पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो' में प्यार और इंसानियत का संदेश था, जिसे चंचल की दमदार आवाज़ ने और भी प्रभावशाली बना दिया। फ़िल्म की सफलता के साथ-साथ यह गाना भी घर-घर पहुँचा और 1974 में चंचल को इस गाने के लिए फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक पुरस्कार से नवाज़ा गया।

भजन गायकी — असली पहचान

'बॉबी' के बाद नरेंद्र चंचल ने 'बेनाम', 'रोटी कपड़ा और मकान' सहित कई अन्य फ़िल्मों में भी गाए, और पंजाबी समेत कई भाषाओं में संगीत दिया। लेकिन जो स्थायी पहचान उन्हें मिली, वह माता की भेंटों और जागरण की महफ़िलों से मिली। फ़िल्म 'आशा' का 'तूने मुझे बुलाया शेरावालिए' और फ़िल्म 'अवतार' का 'चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है' उनके सबसे लोकप्रिय गीत बने, जो आज भी हर जागरण में बजते हैं।

गौरतलब है कि नवरात्रि और माता के जागरण के मौसम में इन भजनों की माँग दशकों बाद भी कम नहीं हुई — यह उनकी संगीत-साधना की सच्ची विरासत है।

निधन और विरासत

नरेंद्र चंचल का निधन 22 जनवरी 2021 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ। वह 80 वर्ष के थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। उनके जाने के बाद भी उनकी आवाज़ — चाहे वह बॉबी का वह कालजयी गाना हो या माँ के दरबार की भेंट — करोड़ों श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों के दिलों में ज़िंदा है।

नरेंद्र चंचल की जीवन-यात्रा इस बात का प्रमाण है कि प्रामाणिक आवाज़ किसी एक विधा में नहीं बंधती — वह अपना रास्ता खुद बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उद्योग ने उन्हें 'भजन गायक' के खाँचे में डाल दिया। यह उस दौर की विडंबना है जब आवाज़ की ताक़त को शैली की सीमाओं में क़ैद कर दिया जाता था। उनकी विरासत यह सिखाती है कि लोक-भक्ति संगीत को 'कम गंभीर' मानने की सोच कितनी सतही है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेंद्र चंचल कौन थे और उनका जन्म कब हुआ था?
नरेंद्र चंचल एक प्रसिद्ध भजन गायक और पार्श्व गायक थे, जिनका जन्म 16 अक्टूबर 1940 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनका असली नाम नरेंद्र खरबंदा बताया जाता है।
नरेंद्र चंचल को 'बॉबी' में गाने का मौका कैसे मिला?
एक कार्यक्रम में नरेंद्र चंचल बुल्ले शाह की सूफ़ी रचना गा रहे थे, जहाँ फ़िल्मकार राज कपूर मौजूद थे। राज कपूर उनकी आवाज़ से प्रभावित हुए और उन्हें 1973 की फ़िल्म 'बॉबी' में गाने का अवसर दिया।
नरेंद्र चंचल को फ़िल्मफेयर अवॉर्ड किस गाने के लिए मिला था?
नरेंद्र चंचल को 1974 में फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक पुरस्कार फ़िल्म 'बॉबी' के गाने 'बेशक मंदिर-मस्जिद तोड़ो, पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो' के लिए मिला था।
नरेंद्र चंचल के सबसे लोकप्रिय भजन कौन से हैं?
'चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है' (फ़िल्म 'अवतार') और 'तूने मुझे बुलाया शेरावालिए' (फ़िल्म 'आशा') उनके सबसे लोकप्रिय भजन हैं। ये भजन आज भी माता के जागरण में बड़े चाव से बजाए जाते हैं।
नरेंद्र चंचल का निधन कब और कहाँ हुआ?
नरेंद्र चंचल का निधन 22 जनवरी 2021 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ। वह 80 वर्ष के थे और रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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