8 नवंबर 2026
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पंकज त्रिपाठी बोले — किरदार हफ्तों में, अभिनेता सालों में बनता है; 'पारिवारिक मनोरंजन' पर खुलकर की बात

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पंकज त्रिपाठी बोले — किरदार हफ्तों में, अभिनेता सालों में बनता है; 'पारिवारिक मनोरंजन' पर खुलकर की बात

सारांश

पंकज त्रिपाठी ने मुंबई में साफ कहा — अभिनेता बनना 15 20 साल की साधना है, किरदार तो बस उसका एक पड़ाव। 'पारिवारिक मनोरंजन' को उन्होंने 'घर के बने खाने जैसा सिनेमा' बताया — मसालेदार नहीं, सुकून भरा।

मुख्य बातें

पंकज त्रिपाठी ने 7 नवंबर को मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में अदिति राव हैदरी के साथ अपनी फिल्म 'पारिवारिक मनोरंजन' को लेकर बातचीत की।
उन्होंने कहा कि एक किरदार की तैयारी 1 3 हफ्ते में होती है, लेकिन अभिनेता बनने में 15 20 वर्ष की साधना लगती है।
बढ़ई की उपमा देते हुए बताया — कुर्सी बनाने में 4 दिन , लेकिन उसे सीखने में 4 वर्ष ।
इंटरनेट की तात्कालिक आलोचना पर कहा — किसी को खाना पसंद न आना उसे खराब नहीं बनाता।
'पारिवारिक मनोरंजन' को उन्होंने 'कंफर्ट फूड' और 'घर के बने खाने जैसा सिनेमा' बताया — बिना किसी डिस्क्लेमर की ज़रूरत के।

अभिनेता पंकज त्रिपाठी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'पारिवारिक मनोरंजन' की रिलीज़ को लेकर सक्रिय हैं। 7 नवंबर को मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में अपनी सह कलाकार अदिति राव हैदरी के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अभिनय की तैयारी पर एक अहम बात कही — एक किरदार को तैयार करने में हफ्ते लगते हैं, लेकिन एक अभिनेता को तैयार होने में पूरे साल, बल्कि दशक गुज़र जाते हैं। उनके इस बयान ने अभिनय को एक आजीवन साधना के रूप में परिभाषित किया।

अभिनेता की असली तैयारी

त्रिपाठी ने बताया कि किसी भी किरदार के लिए एक से तीन हफ्ते की तैयारी होती है — स्क्रिप्ट पढ़ना, किरदार को महसूस करना और उसके करीब पहुँचना। लेकिन यह तैयारी उस बड़ी प्रक्रिया का महज़ एक हिस्सा है जो सालों पहले शुरू हो चुकी होती है।

उन्होंने एक सटीक उपमा दी: "आपको कोई किरदार निभाने के लिए एक, दो या तीन हफ्ते का समय मिलता है। आप फिल्म की कहानी पढ़ते हैं और फिर उस किरदार के करीब पहुंचने की कोशिश करते हैं। यह तो बस कुछ हफ्तों की बात है, लेकिन एक अभिनेता को तैयार होने में वर्षों लग जाते हैं — जैसे एक कुर्सी बनाने में तो 4 दिन लगते हैं, लेकिन उस बढ़ई को उसे एकदम सही तरीके से बनाना सीखने में 4 वर्ष लग जाते हैं।"

दर्शकों की पसंद और कलाकार का द्वंद्व

त्रिपाठी ने अभिनेताओं के उस जाल की चर्चा की जिसमें वे अक्सर फँस जाते हैं — दर्शक क्या देखना चाहते हैं, यही सोचते रहना। उन्होंने कहा, "एक अभिनेता के लिए यह 15 20 वर्षों की साधना होती है। कई बार चीजें उलझ जाती हैं और आपको अपनी कला में और भी बहुत कुछ करना पड़ता है। हम अक्सर इस जाल में फंस जाते हैं कि दर्शक क्या चाहते हैं।"

यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी और सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की राय तत्काल और कभी कभी कठोर रूप में सामने आती है। त्रिपाठी ने इस पर भी बेबाकी से कहा कि भारत में हर किसी को हर तरह का खाना पसंद नहीं आता — और यही बात सिनेमा पर भी लागू होती है।

इंटरनेट की आलोचना पर त्रिपाठी का नज़रिया

इंटरनेट पर तत्काल और अक्सर कठोर समीक्षाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर मुझे कोई खाना पसंद नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह खाना खराब है। इंटरनेट क्या करता है? अगर किसी को कोई कहानी पसंद नहीं आती, तो वे तुरंत लिख देते हैं कि यह बहुत खराब है। हो सकता है कि आगे चलकर आपको उस कहानी में भी दिलचस्पी आने लगे।"

गौरतलब है कि यह वह दौर है जब फिल्मों की सफलता या विफलता का फैसला पहले दिन के सोशल मीडिया रिएक्शन से होने लगा है। ऐसे में त्रिपाठी का यह दृष्टिकोण उद्योग में एक अलग सोच को सामने रखता है।

'पारिवारिक मनोरंजन' — 'कंफर्ट फूड' जैसा सिनेमा

अपनी आगामी फिल्म 'पारिवारिक मनोरंजन' के बारे में उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल घर के खाने जैसा सिनेमा है — साफ सुथरा, बिना किसी डिस्क्लेमर की ज़रूरत के। उन्होंने बताया, "आजकल दर्शकों का ध्यान कम समय तक ही टिक पाता है, इसलिए फिल्मों की एडिटिंग बहुत तेज करनी पड़ती है, लेकिन इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है। मैंने तो अपने डायरेक्टर से यह भी कहा कि अगर फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और धीमी गति से की जाती तो मुझे और भी अच्छा लगता।"

उन्होंने इस फिल्म को 'मसालेदार' सिनेमा की बजाय 'घर का बना खाना' बताया — एक ऐसा विकल्प जो परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके। अदिति राव हैदरी भी इस प्रोजेक्ट में उनके साथ हैं और दोनों ने मिलकर इस फिल्म को पारिवारिक दर्शकों के लिए एक सुकून भरा अनुभव बताया है।

जैसे जैसे फिल्म की रिलीज़ नज़दीक आ रही है, त्रिपाठी के ये विचार न केवल उनकी कला के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दर्शाते हैं, बल्कि हिंदी सिनेमा में 'सरल और सुथरे' कंटेंट की वापसी की बात भी करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या 'घर के खाने जैसा सिनेमा' आज के मल्टीप्लेक्स और ओटीटी दर्शकों को थिएटर तक खींच पाएगा, जहाँ 'मसालेदार' कंटेंट पहले से ही हावी है। त्रिपाठी की साख और उनकी बात में दम है — लेकिन बॉक्स ऑफिस ही तय करेगा कि यह दर्शन व्यावसायिक सच्चाई से मेल खाता है या नहीं।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंकज त्रिपाठी की फिल्म 'पारिवारिक मनोरंजन' किस बारे में है?
'पारिवारिक मनोरंजन' एक साफ सुथरी पारिवारिक फिल्म है जिसमें पंकज त्रिपाठी और अदिति राव हैदरी मुख्य भूमिकाओं में हैं। त्रिपाठी ने इसे 'घर के बने खाने जैसा सिनेमा' बताया है — बिना किसी डिस्क्लेमर की ज़रूरत के।
पंकज त्रिपाठी ने अभिनय की तैयारी के बारे में क्या कहा?
त्रिपाठी ने कहा कि किसी किरदार को निभाने के लिए 1 से 3 हफ्ते की तैयारी होती है, लेकिन एक अभिनेता को तैयार होने में 15 से 20 वर्ष की साधना लगती है। उन्होंने बढ़ई की उपमा दी — कुर्सी बनाने में 4 दिन, पर उसे सीखने में 4 साल।
पंकज त्रिपाठी ने इंटरनेट की आलोचना पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई कहानी पसंद नहीं आती, तो वे तुरंत इंटरनेट पर लिख देते हैं कि यह खराब है — लेकिन किसी को खाना पसंद न आना उसे खराब नहीं बनाता। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है आगे चलकर उस कहानी में भी दिलचस्पी आ जाए।
'पारिवारिक मनोरंजन' में पंकज त्रिपाठी के साथ कौन हैं?
फिल्म में पंकज त्रिपाठी के साथ अभिनेत्री अदिति राव हैदरी मुख्य भूमिका में हैं। दोनों ने मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में 7 नवंबर को फिल्म को लेकर बातचीत की।
पंकज त्रिपाठी ने फिल्म की एडिटिंग के बारे में क्या कहा?
त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने अपने निर्देशक से कहा कि अगर फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और धीमी गति से की जाती तो उन्हें और भी अच्छा लगता। उनके अनुसार यह फिल्म तेज़ एडिटिंग की होड़ से अलग, एक सुकून भरा अनुभव है।
राष्ट्र प्रेस
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