प्रीति गांगुली जयंती: अशोक कुमार की बेटी जिसने कॉमेडी से बनाई अपनी अलग पहचान
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री प्रीति गांगुली का नाम हिंदी सिनेमा में उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल है जिन्होंने विरासत की छाया से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा के बल पर दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। सुपरस्टार अशोक कुमार की सुपुत्री प्रीति की जयंती 17 मई को मनाई जाती है। 1970-80 के दशक में अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग से उन्होंने दर्शकों को खूब हँसाया और एक विशिष्ट अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
फिल्मी घराने में पली-बढ़ीं, पर राह चुनी खुद की
प्रीति गांगुली का जन्म हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक में हुआ। उनके पिता अशोक कुमार को 'दादामुनि' के नाम से जाना जाता था, चाचा किशोर कुमार संगीत और अभिनय के क्षेत्र में दिग्गज थे, और जीजा देवेन वर्मा भी एक जाने-माने अभिनेता थे। इतनी बड़ी हस्तियों के बीच पलते हुए भी प्रीति ने कॉमेडी को अपना माध्यम चुना — एक ऐसा क्षेत्र जहाँ उन्होंने अपनी शर्तों पर सफलता हासिल की।
गौरतलब है कि फिल्मी परिवार से आने वाले अनेक कलाकारों को विरासत का बोझ भारी पड़ता है, लेकिन प्रीति ने इसे अपनी ताकत बनाया — पारिवारिक मूल्यों को आत्मसात करते हुए अपनी कला को निखारा।
बाबूजी की वह सीख जो बनी जीवन का सार
प्रीति गांगुली अपने पिता अशोक कुमार की एक यादगार घटना को हमेशा याद करती थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वे चौथी कक्षा में पढ़ती थीं, तब एक दिन बाबूजी उन्हें स्कूल से लेने आए। बड़ी गाड़ी देखकर वे खुशी में भागीं, लेकिन रास्ते में गिर पड़ीं। शर्मिंदगी के साथ गाड़ी में बैठीं तो अशोक कुमार मुस्कुराते हुए बोले — 'कभी भी हवा में मत उड़ो, वरना किसी छोटे-से कंकड़ से भी ठोकर खाकर गिर सकती हो।'
प्रीति कहती थीं कि यह सीख उन्होंने जीवन भर नहीं भुलाई। अशोक कुमार स्वयं बेहद सरल, सादा और नम्र स्वभाव के इंसान थे — उनमें अहंकार का कोई अंश नहीं था। प्रीति अपने पिता की इसी सादगी को अपना आदर्श मानती थीं।
खट्टा मीठा और यादगार भूमिकाएँ
प्रीति गांगुली को सबसे अधिक निर्देशक बासु चटर्जी की 1978 में आई क्लासिक फिल्म 'खट्टा मीठा' में याद किया जाता है, जिसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन की दीवानी फ्रेनी सेठना की भूमिका निभाई थी। उनकी हास्य-भरी अदाकारी आज भी फिल्म-प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनती है।
यह ऐसे समय की बात है जब हिंदी सिनेमा में महिला हास्य कलाकारों की संख्या बेहद सीमित थी — प्रीति ने इस रिक्तता को अपनी अनूठी कॉमिक टाइमिंग से भरा।
विरासत और प्रभाव
प्रीति गांगुली ने कभी अपनी सफलता को लेकर घमंड नहीं किया। वे हमेशा जमीन से जुड़ी रहीं — ठीक वैसे ही जैसा उनके बाबूजी ने सिखाया था। उनकी कॉमिक भूमिकाएँ आज भी दर्शकों को हँसाती हैं और हिंदी सिनेमा की हास्य परंपरा में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
उनकी जयंती पर उनके प्रशंसक और फिल्म जगत उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं — एक ऐसी अभिनेत्री को जिसने विरासत से प्रेरणा ली, पर पहचान खुद बनाई।