वेब सीरीज 'राख' की नैना सरीन बोलीं — टैलेंट ही कलाकार की असली पहचान, फॉलोअर्स नहीं
सारांश
मुख्य बातें
वेब सीरीज 'राख' में अपनी अदाकारी से चर्चा बटोरने वाली अभिनेत्री नैना सरीन ने मनोरंजन उद्योग की एक अहम सच्चाई पर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि किसी कलाकार की असली पहचान उसके सोशल मीडिया फॉलोअर्स या ऑनलाइन इमेज से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा और मेहनत से तय होनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडस्ट्री में ऑनलाइन लोकप्रियता के आधार पर कास्टिंग की प्रवृत्ति पर बहस तेज़ हो रही है।
नैना सरीन ने क्या कहा
नैना सरीन ने कहा, 'मैंने इंडस्ट्री में काम करते हुए कई चीजें सीखी हैं। हालांकि एक बात पर मेरा विश्वास हमेशा मजबूत रहा है कि टैलेंट ही किसी कलाकार की सबसे बड़ी पहचान है। सोशल मीडिया पोस्ट, फॉलोअर्स की संख्या या पब्लिक इमेज किसी कलाकार की क्षमता को तय नहीं कर सकती।'
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज के दौर में कई बार कलाकारों को उनकी ऑनलाइन लोकप्रियता के आधार पर प्रोजेक्ट मिलते हैं। नैना ने कहा, 'कई बार मुझे लगता है कि अगर मेरे सोशल मीडिया फॉलोअर्स ज़्यादा होते तो शायद मुझे कुछ और मौके मिल सकते थे, लेकिन मुझे ऐसे कई फिल्ममेकर्स मिले हैं जो अभी भी कलाकारों को सिर्फ उनकी काबिलियत और मेहनत देखकर चुनते हैं।'
करियर और संघर्ष का सफर
नैना सरीन ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में कई ऑडिशन दिए, एक्टिंग की ट्रेनिंग ली और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कोशिश की। उनके अनुसार, उन्हें जो भी काम मिला है, वह उनकी मेहनत और समर्पण की बदौलत मिला है — किसी सोशल मीडिया रणनीति की वजह से नहीं।
उन्होंने कहा, 'एक कलाकार को धैर्य रखना चाहिए और अपने काम पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। अगर किसी कलाकार में सच में प्रतिभा है तो उसे पहचान ज़रूर मिलेगी। भले ही इसमें समय लग सकता है, लेकिन मेहनत और ईमानदारी कभी बेकार नहीं जाती।'
'राख' सीरीज के बारे में
'राख' एक इन्वेस्टिगेटिव क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज है, जिसमें नैना सरीन के साथ अली फज़ल, सोनाली बेंद्रे और आमिर बशीर जैसे दिग्गज कलाकार नज़र आए हैं। 8 एपिसोड वाली इस सीरीज का वैश्विक प्रीमियर 12 जून को हुआ था।
इंडस्ट्री पर व्यापक असर
गौरतलब है कि बॉलीवुड और ओटीटी उद्योग में 'इन्फ्लुएंसर कास्टिंग' की प्रवृत्ति पर आलोचकों का कहना है कि इससे प्रशिक्षित अभिनेताओं के अवसर सिकुड़ रहे हैं। नैना जैसे कलाकारों की आवाज़ इस बहस को एक नई दिशा देती है — यह बताते हुए कि टैलेंट-फर्स्ट सोच अभी भी उद्योग में जीवित है। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या निर्माता और निर्देशक इस सोच को व्यापक रूप से अपनाते हैं।