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राजीव खंडेलवाल का रंगभेद पर बड़ा बयान: 'सूरत नहीं, सीरत होती है असली पहचान'

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राजीव खंडेलवाल का रंगभेद पर बड़ा बयान: 'सूरत नहीं, सीरत होती है असली पहचान'

सारांश

राजीव खंडेलवाल ने रियलिटी शो 'तुम हो ना' में प्रतिभागी डॉक्टर रीमा की रंगभेद से जुड़ी पीड़ा सुनकर समाज को कड़ा संदेश दिया — इंसान की पहचान उसके रंग से नहीं, उसके कर्म और सीरत से होनी चाहिए। यह बयान भारत में रंगभेद पर चल रही व्यापक सामाजिक बहस में एक नई आवाज़ जोड़ता है।

मुख्य बातें

अभिनेता राजीव खंडेलवाल ने 6 जुलाई को रियलिटी शो 'तुम हो ना- घर की सुपरस्टार' में रंगभेद पर अपनी राय रखी।
प्रतिभागी डॉक्टर रीमा ने बचपन से सांवले रंग को लेकर झेले भेदभाव और हीन भावना का भावुक अनुभव साझा किया।
राजीव ने कहा — किसी इंसान का रंग उसकी क्षमता, मेहनत या व्यक्तित्व तय नहीं करता।
उन्होंने समाज से अपील की कि बच्चों की तुलना रंग से नहीं, व्यक्तित्व और उपलब्धियों से की जाए।
राजीव ने व्यक्तिगत तौर पर कहा कि उनके लिए सुंदरता का रंग से कोई संबंध नहीं है।

अभिनेता राजीव खंडेलवाल ने रंगभेद और त्वचा के रंग को लेकर समाज में व्याप्त भेदभावपूर्ण मानसिकता पर 6 जुलाई को अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान की पहचान उसके रंग-रूप से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व, सोच और कर्मों से होनी चाहिए। यह बयान उन्होंने रियलिटी शो 'तुम हो ना- घर की सुपरस्टार' की होस्टिंग के दौरान एक प्रतिभागी के भावुक अनुभव के बाद दिया।

डॉक्टर रीमा की भावुक कहानी

शो में प्रतिभागी डॉक्टर रीमा ने अपने जीवन का एक मार्मिक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें अपने सांवले रंग को लेकर लोगों की तीखी टिप्पणियाँ सुननी पड़ीं। अपनी गोरी बहनों से बार-बार की जाने वाली तुलना ने धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास को कमज़ोर किया और लंबे समय तक उनके मन में हीन भावना बनी रही।

डॉक्टर रीमा की यह कहानी सुनने के बाद राजीव खंडेलवाल स्पष्ट रूप से भावुक हो उठे और उन्होंने इस सामाजिक कुरीति पर खुलकर अपनी बात रखी।

राजीव खंडेलवाल की प्रतिक्रिया

राजीव ने कहा, 'यह बेहद दुखद है कि आज भी समाज में किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके रंग-रूप के आधार पर किया जाता है। किसी के रंग को लेकर सवाल उठाना या टिप्पणी करना बिल्कुल गलत सोच है।' उन्होंने आगे कहा कि किसी इंसान का रंग न तो उसकी क्षमता तय करता है, न उसकी मेहनत और न ही उसका व्यक्तित्व।

अभिनेता ने यह भी कहा, 'यह बहुत बुनियादी बात है कि कोई किसी के रंग-रूप पर इस तरह सवाल कैसे उठा सकता है। समाज को अब ऐसी मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है।'

कर्मों से बदलाव की अपील

राजीव ने समाज में बदलाव लाने के लिए कर्म को केंद्र में रखने की बात कही। उन्होंने कहा, 'अगर लोग सच में समाज की सोच बदलना चाहते हैं, तो उन्हें अपने कर्मों से उदाहरण पेश करना होगा। भविष्य में माता-पिता अपने बच्चों की तुलना उनके रंग से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और उपलब्धियों से करें।'

उन्होंने डॉक्टर रीमा को एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि लोग अपने बच्चों के लिए ऐसे आदर्श चाहें जो उनकी उपलब्धियों के लिए जाने जाएँ, न कि उनके रंग के लिए।

सुंदरता पर व्यक्तिगत दृष्टिकोण

राजीव ने खूबसूरती को लेकर अपनी निजी सोच भी साझा की। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए सुंदरता का रंग से कोई संबंध नहीं है। मैंने हमेशा सांवले रंग को बेहद आकर्षक और खूबसूरत माना है। मैं यह बात केवल डॉक्टर रीमा का हौसला बढ़ाने के लिए नहीं कह रहा, बल्कि मेरी सोच हमेशा से ऐसी रही है।'

आत्मविश्वास और सीरत का संदेश

राजीव ने लोगों से अपील की कि समाज की नकारात्मक टिप्पणियों को कभी अपने आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जैसा कहा जाता है — सूरत पर मत जाइए, सीरत पर जाइए। यह बात समझदार लोग कहते हैं और मेरा भी मानना है कि किसी के भीतर कभी भी अपने रंग या रूप को लेकर हीन भावना नहीं आनी चाहिए।'

गौरतलब है कि राजीव खंडेलवाल इससे पहले भी बॉडी शेमिंग जैसे सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोल चुके हैं। रंगभेद पर उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में त्वचा को गोरा करने वाले उत्पादों का बाज़ार और उससे जुड़ी मानसिकता पर लगातार बहस होती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े संरचनात्मक सवाल को भी उठाता है — जब भारत का सौंदर्य उद्योग अरबों रुपये के 'गोरा करने वाले' उत्पाद बेचता हो, तो सेलेब्रिटी की अपील कितनी दूर तक जाती है? रंगभेद पर मनोरंजन जगत की आवाज़ें तब ज़्यादा असरदार होती हैं जब वे विज्ञापन अनुबंधों में भी उसी मूल्य को प्रतिबिंबित करें। डॉक्टर रीमा जैसी कहानियाँ रियलिटी टीवी के मंच पर आती हैं, लेकिन असली बदलाव तब होगा जब यही सोच ब्रांड एंडोर्समेंट और मीडिया की सौंदर्य-परिभाषाओं में भी दिखे।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजीव खंडेलवाल ने रंगभेद पर क्या कहा?
राजीव खंडेलवाल ने कहा कि किसी इंसान की पहचान उसके रंग-रूप से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व, सोच और कर्मों से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को रंग के आधार पर मूल्यांकन करने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा।
राजीव खंडेलवाल किस शो को होस्ट कर रहे हैं?
राजीव खंडेलवाल इन दिनों रियलिटी शो 'तुम हो ना- घर की सुपरस्टार' को होस्ट कर रहे हैं। इसी शो के दौरान प्रतिभागी डॉक्टर रीमा ने रंगभेद से जुड़ा अपना भावुक अनुभव साझा किया, जिसके बाद राजीव ने यह बयान दिया।
डॉक्टर रीमा ने शो में क्या बताया?
डॉक्टर रीमा ने बताया कि बचपन से उन्हें सांवले रंग को लेकर लोगों की टिप्पणियाँ सुननी पड़ीं और उनकी तुलना उनकी गोरी बहनों से की जाती थी। इस बार-बार के भेदभाव ने उनके आत्मविश्वास को कमज़ोर किया और लंबे समय तक हीन भावना पैदा की।
राजीव खंडेलवाल के अनुसार समाज में बदलाव कैसे आएगा?
राजीव के अनुसार समाज में बदलाव केवल कर्मों से आएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसा उदाहरण पेश करना होगा कि भविष्य में माता-पिता अपने बच्चों की तुलना रंग से नहीं, बल्कि उनकी उपलब्धियों और व्यक्तित्व से करें।
क्या राजीव खंडेलवाल पहले भी सामाजिक मुद्दों पर बोल चुके हैं?
हाँ, राजीव खंडेलवाल इससे पहले बॉडी शेमिंग जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रख चुके हैं। रंगभेद पर उनका यह बयान उनकी सामाजिक जागरूकता की उसी श्रृंखला का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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