8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रविंद्र जैन पुण्यतिथि: जन्मांध संगीतकार जिन्होंने 'रामायण' से 'राम तेरी गंगा मैली' तक रोशन किया हिंदी सिनेमा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रविंद्र जैन पुण्यतिथि: जन्मांध संगीतकार जिन्होंने 'रामायण' से 'राम तेरी गंगा मैली' तक रोशन किया हिंदी सिनेमा

सारांश

आँखों में रोशनी नहीं थी, लेकिन रविंद्र जैन ने अपनी धुनों से पूरे भारत को रोशन किया। 'सौदागर' की कामयाबी से 'रामायण' की अमर स्वरलिपि तक — उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती। 9 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि पर यह विरासत और भी मूल्यवान लगती है।

मुख्य बातें

रविंद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ; वे जन्म से दृष्टिहीन थे।
1973 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'सौदागर' से उन्हें हिंदी सिनेमा में बड़ी पहचान मिली।
'राम तेरी गंगा मैली' के संगीत के लिए उन्हें 1986 में फिल्मफेयर बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर अवॉर्ड मिला।
रामानंद सागर की 'रामायण' सहित 'श्री कृष्ण' और 'जय हनुमान' जैसे धारावाहिकों का संगीत रचा।
2015 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
9 अक्टूबर 2015 को मुंबई में उनका निधन हुआ।

हिंदी सिनेमा के महान संगीतकार, गीतकार और गायक रविंद्र जैन की 9 अक्टूबर 2025 को 10वीं पुण्यतिथि है। 9 अक्टूबर 2015 को मुंबई में उनका निधन हुआ था। जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने भक्ति, प्रेम और रिश्तों से ओतप्रोत ऐसे गीत रचे जो आज भी करोड़ों लोगों की यादों में बसे हैं — यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।

अलीगढ़ से मुंबई तक: संगीत की अटूट यात्रा

28 फरवरी 1944 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जन्मे रविंद्र जैन की आँखों में जन्म से ही रोशनी नहीं थी। बचपन से ही वे मंदिरों में भजन और कविताएँ गाते थे, जिससे परिवार ने उनकी संगीत-प्रतिभा को पहचाना और उसे निखारने में सहयोग किया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली।

मुंबई आने से पहले उन्होंने कोलकाता में संगीत सिखाया और रेडियो से भी जुड़े रहे। दृष्टिहीनता को उन्होंने कभी अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया — यह उनके जीवन का सबसे बड़ा संदेश था।

फिल्मी करियर की शुरुआत और 'सौदागर' से मिली पहचान

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी पहली रिलीज फिल्म 'कांच और हीरा' रही, जिसमें उन्होंने मोहम्मद रफी से 'नज़र आती नहीं मंज़िल' गवाया। हालाँकि इस फिल्म से उन्हें विशेष पहचान नहीं मिली।

असली सफलता 1973 में राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'सौदागर' से मिली। इस फिल्म में उन्होंने संगीत देने के साथ-साथ सभी गानों के बोल भी स्वयं लिखे — 'तेरा मेरा साथ रहे', 'हर हसीन चीज़ का', 'क्यों लाए सैंया पान' और 'हुस्न है या कोई कयामत है' जैसे गीत आज भी सुने जाते हैं। 'सौदागर' ने उनके करियर के दरवाज़े हमेशा के लिए खोल दिए।

यादगार फिल्में और राजश्री से दीर्घ जुड़ाव

'सौदागर' की सफलता के बाद रविंद्र जैन ने 'चोर मचाए शोर', 'गीत गाता चल', 'चितचोर', 'अँखियों के झरोखों से' और 'नदिया के पार' जैसी फिल्मों में अपनी सुरीली छाप छोड़ी। इन फिल्मों की सादगी और भारतीय शास्त्रीय संगीत की मिठास ने उन्हें एक अलग पहचान दी।

राजश्री प्रोडक्शंस के साथ उनका जुड़ाव 'सौदागर' से लेकर 'विवाह' और 'एक विवाह ऐसा भी' तक दशकों लंबा रहा। उनकी धुनों में भारतीयता और पारिवारिक संवेदनाओं की झलक उनकी विशिष्ट पहचान बनी।

फिल्मफेयर पुरस्कार और 'रामायण' की अमर धुनें

उनके करियर की शीर्ष उपलब्धियों में राज कपूर निर्देशित फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' का संगीत शामिल है, जिसके लिए उन्हें 1986 में फिल्मफेयर बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर अवॉर्ड से नवाज़ा गया।

फिल्मों से परे रामानंद सागर के बहुचर्चित धारावाहिक 'रामायण' का संगीत तैयार कर उन्होंने अपना नाम भारतीय टेलीविज़न के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज करा लिया। इसके अलावा 'श्री कृष्ण' और 'जय हनुमान' जैसे धार्मिक धारावाहिकों के लिए भी उन्होंने संगीत रचा।

पद्म श्री सम्मान और अंतिम विदाई

भारत सरकार ने 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया — यह सम्मान उनके समग्र संगीत योगदान की राष्ट्रीय स्वीकृति थी। गौरतलब है कि पद्म श्री मिलने के उसी वर्ष 9 अक्टूबर 2015 को मुंबई में उनका निधन हो गया।

रविंद्र जैन ने फिल्मी संगीत के साथ-साथ धार्मिक और निजी म्यूज़िक एल्बमों पर भी उल्लेखनीय काम किया। उनका संगीत आने वाली पीढ़ियों को भारतीय लोकजीवन और आस्था की गहराई से परिचित कराता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब करोड़ों घरों में जो आस्था और भावना उमड़ती थी, उसका श्रेय बड़े हिस्से में उनकी धुनों को जाता है — फिर भी मुख्यधारा की चर्चाओं में वे अक्सर उन नामों की भीड़ में खो जाते हैं जो 'ग्लैमरस' थे। उनकी सादगी उनकी ताकत थी और वही उनकी पहचान भी — 'चितचोर' के मीठे बोल हों या 'नदिया के पार' की ग्रामीण मिठास, उन्होंने कभी शोर में नहीं, बल्कि सुर में बात की।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रविंद्र जैन कौन थे और उन्हें क्यों याद किया जाता है?
रविंद्र जैन हिंदी सिनेमा और टेलीविज़न के प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार और गायक थे जो जन्म से दृष्टिहीन थे। 'सौदागर', 'राम तेरी गंगा मैली' और 'रामायण' धारावाहिक जैसी कालजयी रचनाओं के कारण उन्हें भारतीय संगीत में एक विशेष स्थान प्राप्त है।
रविंद्र जैन की पुण्यतिथि कब है?
रविंद्र जैन का निधन 9 अक्टूबर 2015 को मुंबई में हुआ था। प्रतिवर्ष 9 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि पर संगीत प्रेमी और फिल्म जगत उनके योगदान को याद करता है।
रविंद्र जैन को कौन-सा राष्ट्रीय सम्मान मिला था?
भारत सरकार ने 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके दशकों के संगीत योगदान की राष्ट्रीय स्वीकृति था — उल्लेखनीय यह है कि इसी वर्ष उनका निधन भी हुआ।
रविंद्र जैन की सबसे प्रसिद्ध फिल्में कौन सी हैं?
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'सौदागर' (1973), 'चितचोर', 'अँखियों के झरोखों से', 'नदिया के पार', 'राम तेरी गंगा मैली', 'विवाह' और 'एक विवाह ऐसा भी' शामिल हैं। 'राम तेरी गंगा मैली' के लिए उन्हें 1986 का फिल्मफेयर बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर अवॉर्ड मिला।
रविंद्र जैन का 'रामायण' धारावाहिक से क्या संबंध था?
रविंद्र जैन ने रामानंद सागर के प्रतिष्ठित धारावाहिक 'रामायण' का संगीत तैयार किया था। यह धारावाहिक 1980 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ और इसकी भक्तिमय धुनें आज भी घर-घर में गूँजती हैं। इसके अलावा उन्होंने 'श्री कृष्ण' और 'जय हनुमान' के लिए भी संगीत रचा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले