1 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वीजा रिजेक्ट हुआ तो बने एक्टर: रोहित रॉय की 'स्वाभिमान' से 'काबिल' तक की अनोखी कहानी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वीजा रिजेक्ट हुआ तो बने एक्टर: रोहित रॉय की 'स्वाभिमान' से 'काबिल' तक की अनोखी कहानी

सारांश

MBA के सपने टूटे तो बॉलीवुड का रास्ता खुला — रोहित रॉय की कहानी उस एक वीजा रिजेक्शन से शुरू होती है जिसने नागपुर के एक विज्ञान स्नातक को 'स्वाभिमान' के ऋषभ मल्होत्रा में बदल दिया। संयोग, निराशा और किस्मत का यह संगम आज टीवी-फिल्मों के एक जाने-माने चेहरे की नींव है।

मुख्य बातें

रोहित रॉय का जन्म 5 अप्रैल 1968 को नागपुर में हुआ; वह अभिनेता रोनित रॉय के छोटे भाई हैं।
अमेरिका में MBA के लिए स्टूडेंट वीजा रिजेक्ट होने के बाद उन्होंने मुंबई में रुककर करियर बनाया।
फिल्ममेकर कुणाल कपूर के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर और मॉडलिंग से शुरुआत; पहली फिल्म 'जज्बात' अनंत बलानी के निर्देशन में।
डीडी नेशनल के शो 'स्वाभिमान' ( 1995–1997 ) में ऋषभ मल्होत्रा के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
'काबिल' , 'शूटआउट एट लोखंडवाला' और 'दस कहानियां' समेत कई चर्चित फिल्मों में काम किया।
संजय गुप्ता की 'दस कहानियां' की शॉर्ट फिल्म 'द राइस प्लेट' का निर्देशन कर निर्देशन में भी कदम रखा।

अभिनेता रोहित रॉय का नाम आज टीवी और हिंदी फिल्मों में किसी परिचय का मोहताज नहीं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी एक्टर बनने का सपना नहीं देखा था। उनका असली इरादा अमेरिका जाकर MBA करने का था — और जब यह रास्ता बंद हुआ, तो किस्मत ने उन्हें एक ऐसी राह पर धकेला जो आज उनकी पहचान है। कई इंटरव्यू में रोहित खुद स्वीकार कर चुके हैं कि वह 'संयोग से एक्टर' बने।

नागपुर से मुंबई: वीजा रिजेक्शन ने बदली ज़िंदगी की दिशा

रोहित रॉय का जन्म 5 अप्रैल 1968 को नागपुर में हुआ। वह अभिनेता रोनित रॉय के छोटे भाई हैं। शुरुआती पढ़ाई में उन्होंने विज्ञान विषय लिया और ग्रेजुएशन किया — फिजिक्स उनका पसंदीदा विषय था। इसके बाद उनका अगला कदम था अमेरिका जाकर MBA की डिग्री हासिल करना, जिसके लिए उन्होंने तैयारी भी की। लेकिन स्टूडेंट वीजा रिजेक्ट हो गया।

रोहित के अनुसार वह उस वक्त काफी निराश हुए थे। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे 'किस्मत का इशारा' मानकर स्वीकार किया और मुंबई में रुकने का फैसला किया। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

मॉडलिंग और असिस्टेंट डायरेक्शन से मिली शुरुआत

मुंबई में रहते हुए रोहित ने विज्ञापन फिल्ममेकर कुणाल कपूर के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्हें मॉडलिंग के प्रस्ताव मिलने लगे। फिल्ममेकर अनंत बलानी की नज़र उन पर पड़ी और उन्हें फिल्म 'जज्बात' में काम करने का अवसर मिला। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नहीं चली, लेकिन इसने रोहित के लिए एक्टिंग की दुनिया का दरवाज़ा ज़रूर खोल दिया।

स्वाभिमान शो ने दिलाई असली पहचान

रोहित के करियर का सबसे बड़ा मोड़ डीडी नेशनल का टीवी शो 'स्वाभिमान' बना। इस शो से जुड़ने की कहानी भी कम रोचक नहीं। उस समय रोहित अपनी तत्कालीन गर्लफ्रेंड मानसी जोशी के घर पर थे, जिन्हें इस शो में काम करने का ऑफर आया था। मानसी ने मना कर दिया, लेकिन रोहित ने बातचीत सुनी और खुद ऑडिशन देने की इच्छा जताई।

नंबर लेकर मेकर्स से संपर्क करने पर पहले उन्हें रिजेक्ट किया गया, लेकिन बाद में मौका मिल ही गया। शो में उन्होंने ऋषभ मल्होत्रा का किरदार निभाया जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। 'स्वाभिमान' 1995 से 1997 तक डीडी नेशनल पर प्रसारित हुआ। रोहित ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ऋषभ मल्होत्रा जैसी लोकप्रियता उन्हें बाद में दोबारा नहीं मिली।

गौरतलब है कि शो के पहले ही सीन में उन्हें अपने पिता की मृत्यु की खबर मिलने का दृश्य निभाना था। रोहित ने बताया कि उन्होंने कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था, इसलिए उस दृश्य में उनकी भावनाएँ बिल्कुल असली थीं — अभिनय और वास्तविकता की वह सीमा धुंधली हो गई थी।

फिल्मों में भी छाप छोड़ी

टीवी पर पहचान बनाने के बाद रोहित ने फिल्मों का रुख किया। 'काबिल', 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'दस कहानियां', 'एक खिलाड़ी एक हसीना' और 'प्लान' जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएँ निभाईं। खासतौर पर 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों दोनों ने सराहा। टीवी पर भी वह सक्रिय रहे और 'देश में निकला होगा चांद', 'कुसुम' तथा 'संजिवनी' जैसे चर्चित शो का हिस्सा बने।

निर्देशन में भी आज़माया हाथ

रोहित रॉय ने खुद को केवल अभिनय तक सीमित नहीं रखा। संजय गुप्ता की फिल्म 'दस कहानियां' में शामिल शॉर्ट फिल्म 'द राइस प्लेट' का निर्देशन उन्होंने किया। आज वह टीवी, फिल्मों और निर्देशन — तीनों मोर्चों पर सक्रिय हैं। एक वीजा रिजेक्शन से शुरू हुआ यह सफर, हिंदी मनोरंजन जगत में उनके स्थायी योगदान की गवाही देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि परिस्थितियों ने उन्हें यहाँ पहुँचाया। यह भी गौरतलब है कि 'स्वाभिमान' जैसा दूरदर्शन-युग का शो आज भी उनकी पहचान का सबसे मज़बूत स्तंभ है, जबकि बाद की फिल्मी पारी उतनी चर्चित नहीं रही। यह सवाल उठता है कि क्या टीवी की वह 'सुनहरी पीढ़ी' फिल्मों में अपनी पूरी क्षमता दिखा पाई — या सिस्टम ने उन्हें एक खाँचे में सीमित रख दिया।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित रॉय एक्टर कैसे बने?
रोहित रॉय एक्टर बनने का उनका कोई इरादा नहीं था — वह अमेरिका जाकर MBA करना चाहते थे, लेकिन स्टूडेंट वीजा रिजेक्ट हो गया। इसके बाद मुंबई में रुककर उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्शन और मॉडलिंग शुरू की, जहाँ से एक्टिंग का रास्ता खुला।
रोहित रॉय का पहला बड़ा टीवी शो कौन सा था?
'स्वाभिमान' डीडी नेशनल पर 1995 से 1997 तक प्रसारित हुआ और रोहित रॉय के करियर का सबसे बड़ा मोड़ बना। इस शो में उन्होंने ऋषभ मल्होत्रा का किरदार निभाया जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।
रोहित रॉय और रोनित रॉय का क्या रिश्ता है?
रोहित रॉय, अभिनेता रोनित रॉय के छोटे भाई हैं। दोनों भाइयों ने हिंदी टीवी और फिल्मों में अलग-अलग अपनी पहचान बनाई है।
रोहित रॉय ने कौन-कौन सी बड़ी फिल्मों में काम किया है?
रोहित रॉय ने 'काबिल', 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'दस कहानियां', 'एक खिलाड़ी एक हसीना' और 'प्लान' जैसी फिल्मों में काम किया। 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में उनके अभिनय को विशेष रूप से सराहा गया।
क्या रोहित रॉय ने निर्देशन भी किया है?
हाँ, रोहित रॉय ने संजय गुप्ता की फिल्म 'दस कहानियां' में शामिल शॉर्ट फिल्म 'द राइस प्लेट' का निर्देशन किया। वह अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी सक्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले