वीजा रिजेक्ट हुआ तो बने एक्टर: रोहित रॉय की 'स्वाभिमान' से 'काबिल' तक की अनोखी कहानी
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता रोहित रॉय का नाम आज टीवी और हिंदी फिल्मों में किसी परिचय का मोहताज नहीं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी एक्टर बनने का सपना नहीं देखा था। उनका असली इरादा अमेरिका जाकर MBA करने का था — और जब यह रास्ता बंद हुआ, तो किस्मत ने उन्हें एक ऐसी राह पर धकेला जो आज उनकी पहचान है। कई इंटरव्यू में रोहित खुद स्वीकार कर चुके हैं कि वह 'संयोग से एक्टर' बने।
नागपुर से मुंबई: वीजा रिजेक्शन ने बदली ज़िंदगी की दिशा
रोहित रॉय का जन्म 5 अप्रैल 1968 को नागपुर में हुआ। वह अभिनेता रोनित रॉय के छोटे भाई हैं। शुरुआती पढ़ाई में उन्होंने विज्ञान विषय लिया और ग्रेजुएशन किया — फिजिक्स उनका पसंदीदा विषय था। इसके बाद उनका अगला कदम था अमेरिका जाकर MBA की डिग्री हासिल करना, जिसके लिए उन्होंने तैयारी भी की। लेकिन स्टूडेंट वीजा रिजेक्ट हो गया।
रोहित के अनुसार वह उस वक्त काफी निराश हुए थे। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे 'किस्मत का इशारा' मानकर स्वीकार किया और मुंबई में रुकने का फैसला किया। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
मॉडलिंग और असिस्टेंट डायरेक्शन से मिली शुरुआत
मुंबई में रहते हुए रोहित ने विज्ञापन फिल्ममेकर कुणाल कपूर के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्हें मॉडलिंग के प्रस्ताव मिलने लगे। फिल्ममेकर अनंत बलानी की नज़र उन पर पड़ी और उन्हें फिल्म 'जज्बात' में काम करने का अवसर मिला। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नहीं चली, लेकिन इसने रोहित के लिए एक्टिंग की दुनिया का दरवाज़ा ज़रूर खोल दिया।
स्वाभिमान शो ने दिलाई असली पहचान
रोहित के करियर का सबसे बड़ा मोड़ डीडी नेशनल का टीवी शो 'स्वाभिमान' बना। इस शो से जुड़ने की कहानी भी कम रोचक नहीं। उस समय रोहित अपनी तत्कालीन गर्लफ्रेंड मानसी जोशी के घर पर थे, जिन्हें इस शो में काम करने का ऑफर आया था। मानसी ने मना कर दिया, लेकिन रोहित ने बातचीत सुनी और खुद ऑडिशन देने की इच्छा जताई।
नंबर लेकर मेकर्स से संपर्क करने पर पहले उन्हें रिजेक्ट किया गया, लेकिन बाद में मौका मिल ही गया। शो में उन्होंने ऋषभ मल्होत्रा का किरदार निभाया जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। 'स्वाभिमान' 1995 से 1997 तक डीडी नेशनल पर प्रसारित हुआ। रोहित ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ऋषभ मल्होत्रा जैसी लोकप्रियता उन्हें बाद में दोबारा नहीं मिली।
गौरतलब है कि शो के पहले ही सीन में उन्हें अपने पिता की मृत्यु की खबर मिलने का दृश्य निभाना था। रोहित ने बताया कि उन्होंने कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था, इसलिए उस दृश्य में उनकी भावनाएँ बिल्कुल असली थीं — अभिनय और वास्तविकता की वह सीमा धुंधली हो गई थी।
फिल्मों में भी छाप छोड़ी
टीवी पर पहचान बनाने के बाद रोहित ने फिल्मों का रुख किया। 'काबिल', 'शूटआउट एट लोखंडवाला', 'दस कहानियां', 'एक खिलाड़ी एक हसीना' और 'प्लान' जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएँ निभाईं। खासतौर पर 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों दोनों ने सराहा। टीवी पर भी वह सक्रिय रहे और 'देश में निकला होगा चांद', 'कुसुम' तथा 'संजिवनी' जैसे चर्चित शो का हिस्सा बने।
निर्देशन में भी आज़माया हाथ
रोहित रॉय ने खुद को केवल अभिनय तक सीमित नहीं रखा। संजय गुप्ता की फिल्म 'दस कहानियां' में शामिल शॉर्ट फिल्म 'द राइस प्लेट' का निर्देशन उन्होंने किया। आज वह टीवी, फिल्मों और निर्देशन — तीनों मोर्चों पर सक्रिय हैं। एक वीजा रिजेक्शन से शुरू हुआ यह सफर, हिंदी मनोरंजन जगत में उनके स्थायी योगदान की गवाही देता है।