समृद्धि शुक्ला का बड़ा बयान: घर और बच्चों की जिम्मेदारी सिर्फ महिला की नहीं, दोनों की होनी चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री समृद्धि शुक्ला ने 26 जुलाई को रिश्तों में बराबरी और घरेलू जिम्मेदारियों के समान बंटवारे पर खुलकर अपनी राय रखी। 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में अभिरा का किरदार निभा रहीं समृद्धि ने कहा कि आज भी कई महिलाओं से घर और बाहर, दोनों मोर्चों पर अकेले जिम्मेदारी उठाने की उम्मीद की जाती है — जो कि उचित नहीं है।
महिलाओं पर दोहरे बोझ का सवाल
समृद्धि ने कहा, 'आज भी कई महिलाएं ऐसी हैं, जिनसे हर काम को संभालने की उम्मीद की जाती है। उनसे कहा जाता है कि वे बच्चों की देखभाल करें, अगर चाहें तो नौकरी करें और फिर घर लौटकर पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभाएं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई बार महिलाएं खुद खाना नहीं बनातीं, फिर भी उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि वे घर की हर व्यवस्था पर नजर रखें, कुक से बात करें और सुनिश्चित करें कि सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहे।
शादी में बराबरी की ज़रूरत
अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जब दो लोग विवाह के बंधन में बंधते हैं, तो वे मिलकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं। उन्होंने कहा, 'दोनों एक ही घर में रहते हैं, घर की सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं और बच्चों की परवरिश में भी दोनों की बराबर भागीदारी होती है। ऐसे में यह सही नहीं है कि किसी एक व्यक्ति से ज्यादा जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद की जाए।'
मातृत्व और करियर: पति की भूमिका
समृद्धि ने एक व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा, 'अगर किसी महिला ने बच्चे को जन्म दिया है और वह कुछ समय के लिए काम पर नहीं जा सकती, तो उस दौरान पति को आगे बढ़कर जिम्मेदारियां संभालनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जब महिला दोबारा अपने करियर या सपनों की ओर लौटना चाहे, तो पति घर की जिम्मेदारियों में सहयोग कर सकता है। उनके अनुसार, 'रिश्ते में सबसे जरूरी चीज एक-दूसरे के सपनों को समझना और उनका सम्मान करना है।'
अभिरा का किरदार और असल जिंदगी का आईना
समृद्धि ने अपने किरदार अभिरा को असल जिंदगी की महिलाओं का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, 'मेरा किरदार उन महिलाओं की भावनाओं को दिखाता है, जो हर जगह खुद को साबित करने की कोशिश करती रहती हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि असल जिंदगी में घर और काम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में महिलाओं पर भावनात्मक दबाव भी रहता है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
परिवार की परिभाषा बदलने की पुकार
अभिनेत्री ने अपनी बात को समेटते हुए कहा, 'परिवार का मतलब एक-दूसरे का साथ देना होता है, न कि पुराने नियमों के अनुसार महिला और पुरुष की भूमिकाएं तय कर देना। एक अच्छे रिश्ते में दोनों लोग एक-दूसरे के लिए जगह बनाते हैं और मिलकर जीवन की चुनौतियों का सामना करते हैं।' समृद्धि का यह बयान उस व्यापक सामाजिक बहस को और गहरा करता है, जो भारतीय परिवारों में जेंडर आधारित जिम्मेदारियों के बंटवारे पर चल रही है।