शक्ति कपूर का दिलचस्प किस्सा: पान दुकानदार ने पहले ही लगा दिया था स्टार का पोस्टर
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता शक्ति कपूर ने एक बेहद दिलचस्प संस्मरण साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके करियर की शुरुआत से पहले ही एक पान दुकानदार ने उनके स्टार बनने का भरोसा जता दिया था — और उसकी दुकान पर उनकी बड़ी तस्वीर भी टंगी हुई थी। यह किस्सा कॉमेडियन कपिल शर्मा के टॉक शो में बातचीत के दौरान सामने आया।
पान की दुकान और एक अनोखी भविष्यवाणी
शक्ति कपूर के अनुसार, उनके इलाके में एक पान की दुकान हुआ करती थी जहाँ वे अपने तीन-चार दोस्तों के साथ रात को अक्सर जाया करते थे। उस दुकानदार ने उनकी बड़ी तस्वीर दुकान पर लगा रखी थी और बार-बार उन्हें प्रोत्साहित करता था।
इस घटना को याद करते हुए शक्ति कपूर ने कहा, 'उसने मेरी एक बड़ी तस्वीर लगा रखी थी। रात में जब हम 3-4 दोस्त उसी पान की दुकान पर मिलते थे, तो वह मुझसे कहता था, तुम यहाँ क्या कर रहे हो? मुंबई जाकर कुछ कोशिश करो, तुम सफल हो जाओगे। देखो मैंने तो तुम्हारा पोस्टर भी लगा दिया है।'
सफलता के बाद लौटे, दुकानदार को दी सच्ची दुआ
जब शक्ति कपूर फिल्मों में अपनी पहचान बना चुके थे, तो वे उस दुकानदार से दोबारा मिलने पहुँचे। उन्होंने देखा कि तब तक दुकानदार की दुकान भी पहले से बड़ी हो चुकी थी। इस मुलाकात में उन्होंने दुकानदार से कहा, 'तुमने जो कहा था, वह सच हो गया। भगवान तुम्हारा भला करे। तुम्हें कभी किसी चीज की जरूरत हो और मैं अपनी क्षमता के अनुसार तुम्हारी मदद करूंगा।' शक्ति कपूर ने स्वीकार किया कि उस दुकानदार का यह प्यार और विश्वास वे कभी नहीं भुला सके।
करियर की शुरुआत और फिल्मी सफर
शक्ति कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1977 में आई फिल्म 'खेल खिलाड़ी का' से की थी, जिसका निर्देशन अर्जुन हिंगोरानी ने किया था। इस फिल्म में उन्होंने टोनी का किरदार निभाया था।
चार दशक से भी अधिक लंबे करियर में वे 700 से ज़्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। बॉलीवुड के सबसे बहुमुखी कलाकारों में गिने जाने वाले शक्ति कपूर ने कॉमेडी और खलनायक, दोनों भूमिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई है।
क्राइम मास्टर गोगो से अमर हुई पहचान
उन्हें खासतौर पर 1994 की कल्ट फिल्म 'अंदाज अपना अपना' में निभाए गए क्राइम मास्टर गोगो के किरदार के लिए याद किया जाता है। उनका मशहूर डायलॉग 'आंखें निकाल के गोटियाँ खेलूंगा' आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
उनकी चर्चित फिल्मों में 'कुर्बानी' (1980), 'हीरो' (1983), 'हिम्मतवाला' (1983), 'राजा बाबू' (1994), 'कूली नंबर 1' (1995) और 'जुड़वा' (1997) शामिल हैं। सात सौ से अधिक फिल्मों का यह सफर बताता है कि उस पान दुकानदार की भविष्यवाणी निराधार नहीं थी।