'दिल चाहता है' के 'कोई कहे' की रिकॉर्डिंग का राज़ खोला शंकर महादेवन ने — तीनों ने गाया था पूरा गाना
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म 'दिल चाहता है' का गाना 'कोई कहे' आज भी युवाओं की पार्टियों और क्लबों में उतनी ही ऊर्जा के साथ बजता है, जितना 2001 में अपनी रिलीज़ के वक्त बजता था। अब गायक शंकर महादेवन ने इस आइकॉनिक गाने की रिकॉर्डिंग प्रक्रिया से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सार्वजनिक किया है, जो बताता है कि इस गाने की 'नेचुरल केमिस्ट्री' के पीछे क्या तकनीक थी।
रिकॉर्डिंग का अनोखा तरीका
शंकर महादेवन, शान और दिवंगत गायक केके की आवाज़ों से सजे इस गाने को तीनों गायकों ने एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग रिकॉर्ड किया था। महादेवन ने बताया, 'दरअसल, हम सभी ने पूरा गाना गाया था लेकिन बाद में ज़रूरत के हिसाब से हमारी आवाज़ों के हिस्से चुने गए। इसी वजह से गाने में तीनों की आवाज़ों का तालमेल इतना नेचुरल सुनाई देता है।'
गायक शान ने इस खुलासे पर और रोशनी डाली। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम सभी उस कमरे में साथ थे लेकिन हमने अलग-अलग रिकॉर्ड किया था। केके भी वहाँ थे। अगर आप गाना सुनेंगे तो आपको पता नहीं चलेगा कि इसे अलग-अलग रिकॉर्ड किया गया था — इसमें कुछ ऐसा है, जिससे लगता है कि हम सभी साथ में गा रहे थे।'
एहसान नूरानी का क्लब वाला किस्सा
संगीतकार तिकड़ी शंकर-एहसान-लॉय में से एक एहसान नूरानी ने इस गाने की लोकप्रियता से जुड़ा एक रोचक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार मुंबई के एक क्लब में वे डिनर कर रहे थे, तभी 'कोई कहे' बजा और डांस फ्लोर पल भर में इतना भर गया कि वहाँ से निकलना मुश्किल हो गया।
नूरानी ने बताया कि गाने के बाद क्लब का डीजे उनके पास आया और मज़ाकिया अंदाज़ में बोला — 'यह सब आपकी गलती है।' दरअसल, डीजे का इशारा इस बात की तरफ था कि किसी वेस्टर्न क्लब में किसी हिंदी गाने ने पहली बार इस तरह का जादू बिखेरा था। नूरानी ने यह भी खुलासा किया कि एल्बम की रिलीज़ से पहले एक अन्य म्यूज़िक कंपनी ने कह दिया था कि 'यह एल्बम सिर्फ मालाबार हिल्स में बिकेगा।'
हिंदी संगीत की सोच बदलने वाला एल्बम
शंकर महादेवन ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय क्लब संस्कृति में हिंदी गाने बजाना 'कूल' नहीं माना जाता था। 'दिल चाहता है' का एल्बम इस धारणा को बदलने वाले शुरुआती एल्बमों में से एक साबित हुआ।
गौरतलब है कि फिल्म के गाने — खासकर 'कोई कहे' — युवाओं के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हुए और इसने हिंदी फिल्मी संगीत को क्लब व पार्टी कल्चर का अभिन्न हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई। यह किस्सा एक बेहद साधारण दिखने वाले वीडियो में सामने आया, जिसमें शंकर महादेवन अपने साथी संगीतकारों एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा के साथ बैठे नज़र आए और शान भी उनके साथ मौजूद थे।
विरासत जो आज भी ज़िंदा है
दो दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी 'कोई कहे' का जादू बरकरार है। यह गाना भारतीय पॉप संगीत के उस दौर का प्रतिनिधित्व करता है जब हिंदी फिल्में और उनके गाने शहरी युवाओं की पहचान का हिस्सा बनने लगे थे। महादेवन का यह खुलासा न केवल संगीत-प्रेमियों के लिए बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन की तकनीक को समझने के लिहाज़ से भी उल्लेखनीय है।