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'दिल चाहता है' के 'कोई कहे' की रिकॉर्डिंग का राज़ खोला शंकर महादेवन ने — तीनों ने गाया था पूरा गाना

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'दिल चाहता है' के 'कोई कहे' की रिकॉर्डिंग का राज़ खोला शंकर महादेवन ने — तीनों ने गाया था पूरा गाना

सारांश

'कोई कहे' की वो नेचुरल केमिस्ट्री जो दो दशक से दिलों पर राज करती है — उसके पीछे था एक अनोखा पोस्ट-प्रोडक्शन फॉर्मूला। शंकर महादेवन, शान और केके ने पूरा गाना अलग-अलग गाया और फिर हिस्सों को जोड़ा गया। एहसान नूरानी का क्लब वाला किस्सा बताता है कि यह गाना हिंदी संगीत की क्लब संस्कृति कैसे बदल गया।

मुख्य बातें

शंकर महादेवन ने खुलासा किया कि 'कोई कहे' को तीनों गायकों — शंकर, शान और केके — ने अलग-अलग रिकॉर्ड किया था।
तीनों ने पूरा गाना गाया और बाद में पोस्ट-प्रोडक्शन में उनके हिस्से चुनकर जोड़े गए।
संगीतकार एहसान नूरानी ने बताया कि मुंबई के एक वेस्टर्न क्लब में यह पहला हिंदी गाना था जिसने डांस फ्लोर भर दिया।
रिलीज़ से पहले एक म्यूज़िक कंपनी ने कहा था कि यह एल्बम 'सिर्फ मालाबार हिल्स में बिकेगा' — भविष्यवाणी गलत साबित हुई।
'दिल चाहता है' का एल्बम हिंदी संगीत को क्लब और पार्टी कल्चर से जोड़ने वाले शुरुआती एल्बमों में से एक था।

फिल्म 'दिल चाहता है' का गाना 'कोई कहे' आज भी युवाओं की पार्टियों और क्लबों में उतनी ही ऊर्जा के साथ बजता है, जितना 2001 में अपनी रिलीज़ के वक्त बजता था। अब गायक शंकर महादेवन ने इस आइकॉनिक गाने की रिकॉर्डिंग प्रक्रिया से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सार्वजनिक किया है, जो बताता है कि इस गाने की 'नेचुरल केमिस्ट्री' के पीछे क्या तकनीक थी।

रिकॉर्डिंग का अनोखा तरीका

शंकर महादेवन, शान और दिवंगत गायक केके की आवाज़ों से सजे इस गाने को तीनों गायकों ने एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग रिकॉर्ड किया था। महादेवन ने बताया, 'दरअसल, हम सभी ने पूरा गाना गाया था लेकिन बाद में ज़रूरत के हिसाब से हमारी आवाज़ों के हिस्से चुने गए। इसी वजह से गाने में तीनों की आवाज़ों का तालमेल इतना नेचुरल सुनाई देता है।'

गायक शान ने इस खुलासे पर और रोशनी डाली। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम सभी उस कमरे में साथ थे लेकिन हमने अलग-अलग रिकॉर्ड किया था। केके भी वहाँ थे। अगर आप गाना सुनेंगे तो आपको पता नहीं चलेगा कि इसे अलग-अलग रिकॉर्ड किया गया था — इसमें कुछ ऐसा है, जिससे लगता है कि हम सभी साथ में गा रहे थे।'

एहसान नूरानी का क्लब वाला किस्सा

संगीतकार तिकड़ी शंकर-एहसान-लॉय में से एक एहसान नूरानी ने इस गाने की लोकप्रियता से जुड़ा एक रोचक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार मुंबई के एक क्लब में वे डिनर कर रहे थे, तभी 'कोई कहे' बजा और डांस फ्लोर पल भर में इतना भर गया कि वहाँ से निकलना मुश्किल हो गया।

नूरानी ने बताया कि गाने के बाद क्लब का डीजे उनके पास आया और मज़ाकिया अंदाज़ में बोला — 'यह सब आपकी गलती है।' दरअसल, डीजे का इशारा इस बात की तरफ था कि किसी वेस्टर्न क्लब में किसी हिंदी गाने ने पहली बार इस तरह का जादू बिखेरा था। नूरानी ने यह भी खुलासा किया कि एल्बम की रिलीज़ से पहले एक अन्य म्यूज़िक कंपनी ने कह दिया था कि 'यह एल्बम सिर्फ मालाबार हिल्स में बिकेगा।'

हिंदी संगीत की सोच बदलने वाला एल्बम

शंकर महादेवन ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय क्लब संस्कृति में हिंदी गाने बजाना 'कूल' नहीं माना जाता था। 'दिल चाहता है' का एल्बम इस धारणा को बदलने वाले शुरुआती एल्बमों में से एक साबित हुआ।

गौरतलब है कि फिल्म के गाने — खासकर 'कोई कहे' — युवाओं के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हुए और इसने हिंदी फिल्मी संगीत को क्लब व पार्टी कल्चर का अभिन्न हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई। यह किस्सा एक बेहद साधारण दिखने वाले वीडियो में सामने आया, जिसमें शंकर महादेवन अपने साथी संगीतकारों एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा के साथ बैठे नज़र आए और शान भी उनके साथ मौजूद थे।

विरासत जो आज भी ज़िंदा है

दो दशक से अधिक बीत जाने के बाद भी 'कोई कहे' का जादू बरकरार है। यह गाना भारतीय पॉप संगीत के उस दौर का प्रतिनिधित्व करता है जब हिंदी फिल्में और उनके गाने शहरी युवाओं की पहचान का हिस्सा बनने लगे थे। महादेवन का यह खुलासा न केवल संगीत-प्रेमियों के लिए बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन की तकनीक को समझने के लिहाज़ से भी उल्लेखनीय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह उस दौर में असाधारण था। एहसान नूरानी का वेस्टर्न क्लब वाला किस्सा दरअसल उस बड़े सांस्कृतिक बदलाव की झलक है जो 2001 में शुरू हुआ — जब हिंदी फिल्मी संगीत अपनी 'फिल्मी' छवि से बाहर निकलने लगा। आज जब हिंदी गाने ग्लोबल चार्ट पर जगह बनाते हैं, तो 'दिल चाहता है' जैसे एल्बमों की उस जमीन को याद करना ज़रूरी है जिन्होंने यह रास्ता बनाया।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'कोई कहे' गाने की रिकॉर्डिंग कैसे हुई थी?
शंकर महादेवन के अनुसार, तीनों गायकों — शंकर महादेवन, शान और केके — ने पूरा गाना अलग-अलग रिकॉर्ड किया था। बाद में पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान उनकी आवाज़ों के हिस्से चुनकर एक साथ जोड़े गए, जिससे गाना बेहद नेचुरल लगता है।
'दिल चाहता है' का एल्बम हिंदी संगीत के लिए क्यों महत्वपूर्ण था?
शंकर महादेवन के अनुसार, 2001 में यह एल्बम उन शुरुआती एल्बमों में से एक था जिसने क्लब और पार्टी कल्चर में हिंदी गानों की स्वीकार्यता बदली। 'कोई कहे' ने वेस्टर्न क्लबों में पहली बार डांस फ्लोर भरने का कारनामा किया।
एहसान नूरानी ने 'कोई कहे' के बारे में कौन सा किस्सा सुनाया?
एहसान नूरानी ने बताया कि मुंबई के एक क्लब में जैसे ही 'कोई कहे' बजा, लगभग सभी लोग डांस फ्लोर पर उमड़ पड़े। इसके बाद क्लब के डीजे ने मज़ाकिया अंदाज़ में उनसे कहा 'यह सब आपकी गलती है' — क्योंकि किसी हिंदी गाने ने उस तरह के वेस्टर्न क्लब में पहली बार ऐसा असर दिखाया था।
रिलीज़ से पहले 'दिल चाहता है' के एल्बम को लेकर क्या कहा गया था?
एहसान नूरानी के अनुसार, एक म्यूज़िक कंपनी ने पहले यह कह दिया था कि यह एल्बम 'सिर्फ मालाबार हिल्स में बिकेगा।' यह भविष्यवाणी पूरी तरह गलत साबित हुई और एल्बम युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।
शान ने 'कोई कहे' की रिकॉर्डिंग के बारे में क्या कहा?
शान ने बताया कि रिकॉर्डिंग के दौरान सभी गायक उसी कमरे में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अलग-अलग रिकॉर्ड किया। उनके अनुसार, गाने को सुनकर यह अंदाज़ा नहीं होता कि इसे अलग-अलग रिकॉर्ड किया गया था — ऐसा लगता है जैसे सब मिलकर गा रहे हों।
राष्ट्र प्रेस
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