शर्मिला टैगोर और अमृता सिंह की थिएटर में मुलाकात, सारा अली खान बोलीं — 'मेरी असली दिग्गज'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री सारा अली खान ने रविवार, 22 जून 2025 की शाम एक भावुक पारिवारिक पल सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उनकी दादी शर्मिला टैगोर और माँ अमृता सिंह एक साथ थिएटर में नज़र आईं। सारा ने एक फोटो कोलाज पोस्ट किया जिसमें तीनों सफेद परिधान में ऑडिटोरियम में बैठी दिखाई दे रही हैं — और यह तस्वीर बॉलीवुड के एक असाधारण पारिवारिक बंधन की मिसाल बन गई।
थिएटर की शाम और वो खास पल
सारा ने दो सेल्फी को कोलाज के रूप में साझा किया — एक में वे शर्मिला टैगोर के साथ बैठी हैं, दूसरी में अमृता सिंह के साथ पोज़ देती नज़र आ रही हैं। तीनों ने एक थिएटर प्ले का आनंद लिया और साथ में आइसक्रीम का भी लुत्फ उठाया।
तस्वीरें पोस्ट करते हुए सारा ने लिखा, "मेरे असली दिग्गजों के साथ थिएटर का समय। नाटक तो अच्छा था लेकिन सर्वश्रेष्ठ अभिनेता तो मेरे बगल में ही हैं।" इस कैप्शन ने प्रशंसकों का दिल जीत लिया।
शर्मिला और अमृता की मुलाकात क्यों है खास
यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शर्मिला टैगोर और अमृता सिंह के बीच सास-बहू का रिश्ता रहा है। अमृता सिंह की शादी सैफ अली खान से वर्ष 1991 में हुई थी। सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर और दिवंगत क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी के पुत्र हैं। उस दौर में अमृता बॉलीवुड की स्थापित अभिनेत्री थीं, जबकि सैफ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहे थे। अमृता, सैफ से लगभग 12 वर्ष बड़ी हैं।
लगभग 13 वर्षों के वैवाहिक जीवन के बाद वर्ष 2004 में दोनों का तलाक हो गया। इस जोड़े के दो संतानें हैं — अभिनेत्री सारा अली खान और अभिनेता इब्राहिम अली खान।
सैफ का नया परिवार और बच्चों का साझा जीवन
तलाक के बाद सैफ अली खान ने अभिनेत्री करीना कपूर खान से वर्ष 2012 में विवाह किया। इस दंपती के दो पुत्र हैं — तैमूर अली खान और जहांगीर अली खान। सारा और इब्राहिम को अक्सर सैफ, करीना, तैमूर और जहांगीर के साथ पारिवारिक छुट्टियों और त्योहारों पर देखा जाता है, जो इस विस्तारित परिवार की परिपक्वता और आपसी सम्मान को दर्शाता है।
शर्मिला टैगोर का अमृता सिंह को सार्वजनिक सम्मान
गौरतलब है कि शर्मिला टैगोर कई साक्षात्कारों में अमृता सिंह की मुक्त कंठ से प्रशंसा कर चुकी हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमृता सिंह ने सारा और इब्राहिम की परवरिश बेहद ज़िम्मेदारी और स्नेह के साथ की है। रविवार की यह थिएटर शाम उस सम्मान और स्नेह का जीवंत उदाहरण है।
यह तस्वीर केवल एक पारिवारिक पल नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि रिश्तों की परिभाषाएँ बदलती हैं — पर मानवीय जुड़ाव कायम रहता है।