शेखर कपूर की पोस्ट पर ट्रोल हुए, एआई से बनी तस्वीर में दिखे दिलीप, धर्मेंद्र, देव आनंद और राजेश खन्ना
सारांश
Key Takeaways
- शेखर कपूर ने एआई द्वारा बनाई गई एक तस्वीर साझा की।
- तस्वीर में दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, देव आनंद और राजेश खन्ना थे।
- सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के शिकार हुए।
- युवाओं में एआई के प्रति उत्सुकता दिखाई दे रही है।
- भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुसार तकनीक विकसित करनी चाहिए।
मुंबई, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने अपने सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसने ऑनलाइन हलचल पैदा कर दी। उन्होंने एक तस्वीर साझा की, जिसमें कुछ प्रसिद्ध पुराने बॉलीवुड सितारे दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर को साझा करने के बाद वह यूजर्स के आलोचनाओं का शिकार हो गए।
तस्वीर में दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, देव आनंद और राजेश खन्ना एक साथ बैठे हुए खाना खा रहे हैं। इस तस्वीर को उन्होंने असली समझकर साझा किया, जबकि यह वास्तव में एक एआई द्वारा बनाई गई फोटो है।
शेखर कपूर ने इस तस्वीर के साथ लिखा, ''ये उस समय के सबसे बड़े सितारे थे और उन्होंने लाखों भारतीयों के दिलों पर राज किया। उनकी दोस्ती और विनम्रता इस तस्वीर में स्पष्ट रूप से झलकती है।''
इस तस्वीर पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रियाएं दीं और शेखर कपूर को ट्रोल करना शुरू कर दिया।
एक यूजर ने टिप्पणी की, ''यह तस्वीर नकली है। कम से कम शेखर कपूर को इसे पहचानना चाहिए था।''
एक अन्य यूजर ने कहा, ''आप तो खुद एआई के विशेषज्ञ हैं, धोखा मत खाओ, यह एआई द्वारा बनाई गई तस्वीर है।''
अन्य यूजर्स ने टिप्पणियों में कहा, ''आप जैसे निर्देशक कैसे इस फोटो को पहचान नहीं पाए? आप एक निर्देशक हैं और फिर भी नकली तस्वीर को सच मान बैठे। सही से जांच करें, उद्देश्य अच्छा है लेकिन यह सच नहीं है।''
फिलहाल, शेखर कपूर ने इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
शेखर कपूर ने इससे पहले एआई इम्पैक्ट समिट में भी भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था कि युवा पीढ़ी में एआई के प्रति उत्सुकता और जिज्ञासा अत्यधिक है। जब युवा तकनीक को समझने और सीखने के लिए इतनी गंभीरता दिखा रहे हैं, तो यह साबित होता है कि भारत जल्द ही एआई के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत को एआई का विकास करते समय अपनी परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। सिर्फ पश्चिमी मॉडलों को अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें अपनी विशेषताओं के अनुसार तकनीक को विकसित करना चाहिए।