शिल्पा शिंदे बोलीं — 'मेरी जगह कोई और होता तो शायद वही करता', गिरफ्तारी की मांग पर दिया जवाब
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने 4 जून 2026 को उस विवाद पर खुलकर अपना पक्ष रखा, जो तब भड़का जब उन्होंने एक पॉडकास्ट में स्वीकार किया कि 2016 में 'भाबीजी घर पर हैं' के निर्माता के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप झूठे थे। इस बयान के बाद नेशनल काउंसिल फॉर मेन ने उनकी गिरफ्तारी की मांग उठाई, जिसके जवाब में शिंदे ने कहा कि उस समय की परिस्थितियाँ ही उनके फैसले की असली वजह थीं।
शिल्पा शिंदे का पक्ष
शिल्पा शिंदे ने कहा, 'उस समय मैंने जो कुछ झेला, उसे सिर्फ मैं ही समझ सकती हूँ। अगर कोई दूसरा मेरी जगह होता, तो शायद वही कदम उठाता, जो मैंने उस समय उठाया था।' उन्होंने जोड़ा कि किसी भी व्यक्ति के लिए मुश्किल हालात में सही और गलत का फैसला करना आसान नहीं होता।
शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया, 'अगर उस समय शो के निर्माता को गिरफ्तार कर लिया जाता, तो मैं खुद अपनी गिरफ्तारी की मांग करती। मैं कभी नहीं चाहती थी कि किसी व्यक्ति को बिना पूरी सच्चाई सामने आए ऐसी सजा मिले, क्योंकि यह एक गैर-जमानती मामला था।'
'मुझे सफाई देने की जरूरत नहीं'
अभिनेत्री ने दृढ़ता से कहा, 'मैं और शो के निर्माता दोनों अच्छी तरह जानते हैं कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था। मेरी कहानी बिल्कुल साफ है, और मुझे किसी के सामने सफाई देने की जरूरत नहीं।' उन्होंने कहा कि वे केवल उन लोगों के सामने अपनी बात रखना चाहती हैं जो पूरे मामले से अनजान हैं।
भावनात्मक दबाव और फैसलों का संदर्भ
शिंदे ने अपने बयान में कहा, 'लोग किसी भी व्यक्ति का फैसला उसकी परिस्थितियों को समझे बिना नहीं कर सकते। जब कोई इंसान भावनात्मक, मानसिक और पेशेवर दबाव से गुजरता है, तब उसके फैसले भी उसी माहौल से प्रभावित होते हैं।' यह बयान उन्होंने उस पृष्ठभूमि में दिया जब सोशल मीडिया पर उनके पॉडकास्ट की एक क्लिप वायरल हो रही थी।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और शिंदे का जवाब
इससे पहले शिल्पा शिंदे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोग एक छोटी-सी क्लिप देखकर उन्हें जज कर रहे हैं, जबकि किसी भी बयान को समझने के लिए पूरी बात सुनना जरूरी होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नकारात्मक टिप्पणियाँ उन्हें परेशान नहीं करतीं, क्योंकि उन्हें पता है कि उनका फैसला उस समय की परिस्थितियों के अनुकूल था। नेशनल काउंसिल फॉर मेन की गिरफ्तारी की मांग के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।