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श्वेता तिवारी को ऑनलाइन गाली देने वाले ने माँगी माफी, मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने तीन दिन में ढूंढा ट्रोल

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श्वेता तिवारी को ऑनलाइन गाली देने वाले ने माँगी माफी, मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने तीन दिन में ढूंढा ट्रोल

सारांश

श्वेता तिवारी ने सोशल मीडिया पर महिला-विरोधी गालियों को उजागर किया — और मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने तीन दिन में ट्रोल को ढूंढकर हाथ से लिखा माफीनामा दिलवाया। लेकिन श्वेता का असली सवाल बड़ा है: उन लाखों लोगों का क्या, जो स्क्रीन के पीछे छिपे हैं?

मुख्य बातें

अभिनेत्री श्वेता तिवारी को सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा में गालियाँ देने वाले व्यक्ति ने हाथ से लिखा माफी पत्र भेजा।
मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने महज तीन दिनों में संबंधित व्यक्ति का पता लगाकर उसका फोन नंबर और माफीनामा श्वेता तक पहुँचाया।
मनसे ने स्पष्ट किया कि आरोपी व्यक्ति पार्टी का सदस्य नहीं है और पार्टी महिलाओं के खिलाफ किसी भी दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करती।
श्वेता ने सवाल उठाया कि एक-दो लोगों की पहचान से काम नहीं चलेगा — हजारों-लाखों ट्रोल्स के लिए व्यापक सामाजिक और कानूनी बदलाव जरूरी है।
अभिनेत्री ने कहा कि ऑनलाइन महिला उत्पीड़न रोकने के लिए लोगों की मानसिकता बदलना अनिवार्य है।

अभिनेत्री श्वेता तिवारी को सोशल मीडिया पर महिला-विरोधी अभद्र भाषा में गालियाँ देने वाले व्यक्ति ने हाथ से लिखा माफीनामा भेजकर खेद जताया है। महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) की सदस्य स्नेहल अडारकर ने महज तीन दिनों में संबंधित व्यक्ति का पता लगाकर उसका फोन नंबर और माफी पत्र अभिनेत्री तक पहुँचाया। मुंबई से सामने आई इस घटना ने ऑनलाइन महिला उत्पीड़न के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

क्या था पूरा मामला

कुछ दिन पहले श्वेता तिवारी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ ऐसे कमेंट्स और संदेशों के स्क्रीनशॉट साझा किए थे, जिनमें पुरुषों द्वारा महिलाओं के लिए अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील भाषा का प्रयोग किया गया था। उन्होंने संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट भी सार्वजनिक किए और सवाल उठाया कि क्या ऐसा व्यवहार उन लोगों को शोभा देता है जो खुद को मनसे प्रमुख राज ठाकरे का समर्थक बताते हैं।

श्वेता की पोस्ट के बाद मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने उनसे सीधे संपर्क किया। स्नेहल ने स्पष्ट किया कि पार्टी महिलाओं के प्रति इस प्रकार के दुर्व्यवहार का किसी भी रूप में समर्थन नहीं करती। साथ ही यह भी बताया कि पोस्ट में उल्लिखित व्यक्ति मनसे के सदस्य नहीं हैं।

तीन दिन में मिला माफीनामा

श्वेता ने बताया कि स्नेहल ने मामले की जाँच के लिए कुछ दिनों का समय माँगा था। उनके अनुसार, 'स्नेहल ने कहा कि वह इस मामले में शामिल लोगों को ढूंढने की कोशिश करेंगी।' इसके ठीक तीन दिनों के भीतर स्नेहल ने संबंधित व्यक्ति का फोन नंबर और उसकी ओर से हाथ से लिखा माफी पत्र श्वेता को भेजा।

श्वेता ने इस पहल के लिए स्नेहल अडारकर और मनसे की पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'मैं इस बात की सराहना करती हूँ कि टीम ने इस मामले को गंभीरता से लिया। मुझे अच्छा लगा कि किसी ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपमान को गंभीरता से लिया।' स्नेहल ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में यदि ऐसी कोई परेशानी आई तो वे श्वेता के साथ खड़ी रहेंगी।

श्वेता का बड़ा सवाल: एक-दो नहीं, लाखों का क्या

हालाँकि श्वेता ने इस कदम की सराहना की, लेकिन उन्होंने एक बड़ा सवाल भी उठाया। उनके अनुसार, 'एक-दो लोगों को पकड़ लेना अच्छी बात है, लेकिन उन हजारों या शायद लाखों लोगों का क्या होगा, जो स्क्रीन के पीछे छिपकर खुद को सुरक्षित समझते हैं।'

अभिनेत्री ने कहा कि असली समस्या उस मानसिकता की है जिसमें कुछ लोग यह मान लेते हैं कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को कुछ भी कहा जा सकता है और उन्हें कोई परिणाम नहीं भुगतना पड़ेगा। उनके शब्दों में, 'सोशल मीडिया की आड़ में किसी को भी महिलाओं का अपमान करने की आजादी नहीं मिलनी चाहिए।'

ऑनलाइन महिला उत्पीड़न: एक व्यापक समस्या

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल स्पेस में महिलाओं के खिलाफ साइबर उत्पीड़न की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग सहित कई संस्थाएँ इस मुद्दे पर चिंता जता चुकी हैं। श्वेता तिवारी का यह कदम — ट्रोल को सार्वजनिक करना और जवाबदेही माँगना — सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।

श्वेता ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन दुर्व्यवहार को रोकने के लिए केवल व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव ज़रूरी है — और यह बदलाव तब तक अधूरा रहेगा जब तक डिजिटल जवाबदेही को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्या यही न्याय आम महिला को मिल पाता? स्नेहल अडारकर की तत्परता सराहनीय है, लेकिन यह भी उजागर करती है कि साइबर उत्पीड़न के मामलों में आधिकारिक तंत्र — पुलिस, साइबर सेल — अभी भी पहली पसंद नहीं बन पाए हैं। श्वेता का 'लाखों ट्रोल्स का क्या होगा' वाला सवाल दरअसल नीति-निर्माताओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जवाब माँगता है, जो अब तक कोई ठोस जवाबदेही ढाँचा नहीं बना पाए हैं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्वेता तिवारी के ट्रोल ने माफी क्यों माँगी?
श्वेता तिवारी ने सोशल मीडिया पर उन्हें और अन्य महिलाओं को भेजे गए अभद्र संदेशों के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक किए, जिसके बाद मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने संबंधित व्यक्ति का पता लगाया। तीन दिनों के भीतर उस व्यक्ति की ओर से हाथ से लिखा माफी पत्र श्वेता तक पहुँचाया गया।
मनसे सदस्य स्नेहल अडारकर ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
स्नेहल अडारकर ने श्वेता की पोस्ट देखने के बाद उनसे सीधे संपर्क किया और मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्ति की तलाश शुरू की। तीन दिनों में उन्होंने ट्रोल का फोन नंबर और हाथ से लिखा माफीनामा श्वेता को भेजा, साथ ही भविष्य में भी मदद का आश्वासन दिया।
क्या ट्रोल करने वाला व्यक्ति मनसे का सदस्य था?
नहीं। मनसे ने स्पष्ट किया कि पोस्ट में उल्लिखित व्यक्ति पार्टी का सदस्य नहीं है। पार्टी ने यह भी कहा कि वह महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करती।
श्वेता तिवारी ने ऑनलाइन महिला उत्पीड़न पर क्या कहा?
श्वेता ने कहा कि एक-दो लोगों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है — असली समस्या उस मानसिकता की है जिसमें लोग सोशल मीडिया पर महिलाओं को कुछ भी कहने को अपना अधिकार समझते हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या को खत्म करने के लिए सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी है।
श्वेता तिवारी ने पहले सोशल मीडिया पर क्या साझा किया था?
श्वेता ने कुछ दिन पहले उन कमेंट्स और संदेशों के स्क्रीनशॉट और स्टोरीज़ साझा की थीं जिनमें पुरुषों ने महिलाओं के लिए अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट भी सार्वजनिक किए थे।
राष्ट्र प्रेस
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