सोनू सूद का iPhone 18 Pro भीड़ पर तंज: 'फोन नहीं, समाज को अपग्रेड करो'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता सोनू सूद ने 18 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा करते हुए iPhone 18 Pro सीरीज खरीदने के लिए एप्पल स्टोर के बाहर उमड़ी भारी भीड़ पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि महँगे स्मार्टफोन की दौड़ में कर्जदार होने के बजाय अपनी ऊर्जा और बचत समाज की भलाई में लगाएँ।
सोनू सूद का संदेश
सूद ने अपनी एक्स पोस्ट में एप्पल स्टोर के बाहर लंबी कतारों में खड़े लोगों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'नया फोन, नई ईएमआई, वही पुराने बिल! शायद यह समय सिर्फ अपने फोन को अपग्रेड करने का नहीं, बल्कि समाज में कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कतार में खड़े होने का है। असली अपग्रेड एक बेहतर समाज का निर्माण है।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में उपभोक्तावाद और दिखावे की संस्कृति को लेकर बहस तेज है। सूद की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल होने लगी और लोगों ने इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं।
iPhone 18 Pro की भारत में बिक्री
एप्पल के नए iPhone 18 Pro सीरीज की बिक्री शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे IST से भारत में शुरू हुई। दिल्ली, नोएडा, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में एप्पल के आधिकारिक स्टोरों के बाहर ग्राहक सुबह से ही लंबी कतारों में दिखे।
भारत में iPhone 18 Pro के बेस मॉडल की शुरुआती कीमत ₹1,64,900 रखी गई है। डिवाइस को लेकर उत्साह इस कदर था कि हज़ारों ग्राहकों ने पहले से ऑनलाइन प्री-बुकिंग करा ली थी।
विक्की कौशल का स्टोर विज़िट
इस मौके पर अभिनेता विक्की कौशल मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित आधिकारिक एप्पल स्टोर पहुँचे। उन्होंने वहाँ iPhone 18 Pro Max अनबॉक्स किया, उसके फीचर्स को परखा और पैपराजी के साथ सेल्फी लेते हुए पोज दिए।
गौरतलब है कि बॉलीवुड सेलिब्रिटी का इस तरह नए एप्पल डिवाइस के लॉन्च पर स्टोर पहुँचना एक चर्चित घटनाक्रम बन जाता है, जो ब्रांड की उपभोक्ता छवि को और मज़बूत करता है।
समाज बनाम उपभोक्तावाद की बहस
सोनू सूद की यह प्रतिक्रिया उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो भारत में बढ़ती उपभोक्तावादी प्रवृत्ति और दिखावे की संस्कृति पर समय-समय पर उठती है। आलोचकों का कहना है कि ₹1,64,900 से शुरू होने वाला स्मार्टफोन एक बड़े वर्ग की मासिक आय से कहीं अधिक है, फिर भी ईएमआई के ज़रिए इसे खरीदने का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है।
सूद, जो कोविड महामारी के दौरान प्रवासी मज़दूरों की मदद के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं, कथित तौर पर सामाजिक सक्रियता को उपभोक्तावादी प्राथमिकताओं के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। उनकी यह पोस्ट उसी निरंतरता की अगली कड़ी मानी जा रही है।
आगे की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर सूद की पोस्ट को तेज़ी से शेयर किया जाने लगा — कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे ज़रूरी जागरूकता बताया, जबकि अन्य ने तर्क दिया कि लोगों को अपनी मेहनत की कमाई पर खर्च करने का अधिकार है। यह बहस व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक ज़िम्मेदारी और उपभोक्ता व्यवहार के उस चौराहे पर खड़ी है जहाँ भारतीय मध्यवर्ग बार-बार जूझता दिखता है।