नेपाल में 'पासपोर्ट-फ्री ट्रैवल': विदेशी पर्यटकों को अब फिजिकल पासपोर्ट साथ रखने की ज़रूरत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल का इमिग्रेशन विभाग एक नई 'पासपोर्ट-फ्री ट्रैवल' व्यवस्था शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत काठमांडू सहित पूरे हिमालयी देश में घूमने वाले विदेशी नागरिकों को अपना भौतिक पासपोर्ट हर जगह साथ लेकर चलने की अनिवार्यता से मुक्ति मिलेगी। विभाग के डायरेक्टर जनरल राम चंद्र तिवारी ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य नेपाल में विदेशी पर्यटकों के प्रवास को अधिक सुविधाजनक और तकनीक-सक्षम बनाना है।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए विदेशी नागरिकों को नेपाल पहुँचने के बाद इमिग्रेशन विभाग की आधिकारिक ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल करनी होगी। ऐप में पासपोर्ट की स्कैन कॉपी और वीज़ा की जानकारी दर्ज करनी होगी। यह ऐप एंड्रॉयड और एप्पल आईओएस — दोनों प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध होगी।
एक बार रजिस्ट्रेशन के बाद पर्यटकों को घरेलू उड़ानों में सवार होते समय, मनी एक्सचेंज काउंटर पर करेंसी बदलते समय, होटल में चेक-इन के दौरान या ट्रेकिंग एजेंसियों से यात्रा व्यवस्था कराते समय भौतिक पासपोर्ट दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
समस्या जो इस पहल ने सुलझाई
डायरेक्टर जनरल राम चंद्र तिवारी ने कहा, 'उदाहरण के लिए, यात्रा के दौरान जो लोग अपना पासपोर्ट होटल में भूल जाते हैं और ज़रूरत पड़ने पर उसे नहीं दिखा पाते — ऐप पर जानकारी अपडेट करके नेपाल के अंदर रहते हुए पासपोर्ट भूलने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भौतिक पासपोर्ट न होने के कारण कुछ वास्तविक विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार तक करना पड़ा है। नई प्रणाली ऐसी अनावश्यक परेशानियों को समाप्त करेगी।
FNMIS से जुड़ाव और डिजिटल ढाँचा
यह नई व्यवस्था मौजूदा फॉरेन नेशनल्स मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (FNMIS) के साथ मिलकर काम करेगी। FNMIS एक राष्ट्रव्यापी डिजिटल डेटाबेस है जो विदेशी नागरिकों के वीज़ा आवेदन से लेकर देश छोड़ने तक की रियल-टाइम जानकारी संग्रहीत करता है। यह प्रणाली इस वर्ष 1 जनवरी 2026 से लागू है। इसे प्रभावी बनाने के लिए होटल, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसियाँ, ट्रेकिंग एजेंसियाँ और मनी एक्सचेंज काउंटर — सभी का इस सिस्टम में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
विभाग के अनुसार, अब तक 1,652 सर्विस प्रोवाइडर — जिनमें होटल, एयरलाइन, ट्रैवल और ट्रेकिंग एजेंसियाँ व मनी एक्सचेंज काउंटर शामिल हैं — इस योजना से जुड़ चुके हैं और 1,80,000 से अधिक विदेशी नागरिकों को इस सिस्टम के ज़रिए ट्रैक किया जा रहा है।
सुरक्षा पहलू और आपातकालीन उपयोगिता
विभाग के प्रवक्ता टिकाराम ढकाल ने इस सिस्टम की आपातकालीन उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा, 'अगर सभी होटल और ट्रैवल एजेंसियाँ इस सिस्टम में रजिस्टर्ड होतीं, तो हम 26 अगस्त की बाढ़ के बाद लापता हुए विदेशी नागरिकों के बारे में पता लगा सकते थे।' विभाग का मानना है कि यह प्रणाली देश में आने वाले विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विदेशी नागरिकों से जुड़े संभावित अपराधों पर नियंत्रण में भी सहायक होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल अपनी पर्यटन क्षमता को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है। गौरतलब है कि विदेशी नागरिक इसी ऐप के माध्यम से वीज़ा एक्सटेंशन के लिए भी आवेदन कर सकेंगे, जिससे नेपाल यात्रा और भी सहज हो जाएगी।