जब सुधा चंद्रन ने ‘जयपुर फुट’ को दी इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बनने का श्रेय

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जब सुधा चंद्रन ने ‘जयपुर फुट’ को दी इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बनने का श्रेय

सारांश

सुधा चंद्रन ने अपनी यात्रा के दौरान ‘जयपुर फुट’ को अपने इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बनने का श्रेय दिया। यह कहानी प्रेरणा और संघर्ष की है, जो दिव्यांगों के लिए उम्मीद की किरण प्रस्तुत करती है।

मुख्य बातें

सुधा चंद्रन की यात्रा प्रेरणा का स्रोत है।
‘ जयपुर फुट ’ ने हजारों दिव्यांगों की ज़िंदगी बदली है।
समर्थन और इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।
सुधा ने समाज सेवा में योगदान करने की इच्छा व्यक्त की।
उनकी कहानी सामाजिक कलंक के खिलाफ एक मुहिम है।

मुंबई, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री और नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने अपनी प्रेरणादायक यात्रा को याद करते हुए कहा कि उन्हें इंटरनेशनल सेलिब्रिटी का दर्जा दिलाने में ‘जयपुर फुट’ का सबसे बड़ा योगदान है।

लहरें टीवी द्वारा साझा किए गए एक पुराने वीडियो में सुधा भावुक होकर डॉ. पी.के. सेठी और राजस्थान का आभार व्यक्त करती नजर आईं। वीडियो में सुधा चंद्रन कहती हैं, “आज सुधा चंद्रनजयपुर फुट’ (एक प्रकार का कृत्रिम पैर) के कारण एक इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बन गई है। डॉ. पी.के. सेठी का आभार। मैं आज जो कुछ भी हूं, राजस्थान की वजह से हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “इस तेजी से विकसित होती दुनिया में भी कुछ लोगों के पास समाज सेवा के लिए समय है और मुझे खुशी है कि मैं भी इस नेक काम में थोड़ा योगदान दे पा रही हूं।”

सुधा चंद्रन की यह यात्रा अनेक दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उनका मानना है कि समर्थन और इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है। ‘जयपुर फुट’ जैसी सरल लेकिन प्रभावशाली तकनीक ने न केवल सुधा का जीवन बदला, बल्कि हजारों दिव्यांगों को नई जिंदगी भी दी। सुधा चंद्रन ने यह भी आशा व्यक्त की कि वे दिव्यांगता से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने में सहायता कर पाएंगी। उन्होंने कहा, “मैं डिक्शनरी से ‘हैंडिकैप’ या ‘दिव्यांग’ जैसे शब्दों को मिटाने की कोशिश करूंगी। इसके लिए आपका साथ और प्यार हमेशा मेरे साथ रहेगा।”

एक दुर्घटना में सुधा चंद्रन ने अपना एक पैर खो दिया था। इसके बाद उन्हें ‘जयपुर फुट’ लगाया गया। इसी की मदद से वह दोबारा नृत्य और अभिनय की दुनिया में लौट पाईं। उनकी इस संघर्षपूर्ण यात्रा को १९८९ में रिलीज हुई फिल्म ‘नाचे मयूरी’ में दर्शाया गया था, जिसमें उन्होंने अपनी कहानी को पर्दे पर जीवंत किया था।

टेलीविजन पर सुधा चंद्रनकहीं किसी रोज’ शो में ‘रमोला सिकंद’ के नकारात्मक किरदार के लिए चर्चित रहीं। उनके स्टाइल स्टेटमेंट और अनोखे तरीके से बिंदी लगाने का अंदाज दर्शकों को बहुत पसंद आया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में दिव्यांगता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। उनका अनुभव और दृष्टिकोण हमें यह सिखाता है कि किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है, बशर्ते हमारे पास इच्छाशक्ति हो।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधा चंद्रन ने कितने समय पहले अपना पैर खोया था?
सुधा चंद्रन ने एक दुर्घटना में अपना एक पैर खो दिया था और इसके बाद उन्हें जयपुर फुट लगाया गया।
सुधा चंद्रन की सबसे प्रसिद्ध फिल्म कौन सी है?
सुधा चंद्रन की सबसे प्रसिद्ध फिल्म ‘नाचे मयूरी’ है, जिसमें उन्होंने अपनी असल जिंदगी की कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत किया।
सुधा चंद्रन ने समाज सेवा के लिए क्या कहा?
सुधा चंद्रन ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वे समाज सेवा में योगदान कर पा रही हैं।
सुधा चंद्रन का नकारात्मक किरदार किस शो में था?
सुधा चंद्रन ने ‘कहीं किसी रोज’ शो में ‘रमोला सिकंद’ का नकारात्मक किरदार निभाया था।
राष्ट्र प्रेस