'जीत' के 30 साल: सनी देओल बोले — 'करण का किरदार आज भी मेरे दिल में ज़िंदा है'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता सनी देओल ने स्वीकार किया कि उनकी 1996 की रोमांटिक-एक्शन फिल्म 'जीत' का किरदार 'करण' आज भी उनके दिल में उतनी ही गहराई से बसा हुआ है, जितना तीन दशक पहले था। 23 अगस्त 2026 को फिल्म की रिलीज़ के ठीक 30 साल पूरे होने पर सनी ने प्रशंसकों के साथ अपनी भावनाएँ साझा कीं।
इंस्टाग्राम पर भावुक संदेश
सनी देओल ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर फिल्म का एक यादगार सीन पोस्ट किया, जिसमें उनकी को-स्टार करिश्मा कपूर भी नज़र आईं। उन्होंने लिखा, 'जीत मूवी के 30 साल। करण, उसका प्यार, उसका गुस्सा, उसका त्याग — एक ऐसा किरदार जो आज भी मेरे दिल में बसा है। 30 सालों तक इस फिल्म को इतना प्यार देने के लिए आप सभी का शुक्रिया।' यह पोस्ट देखते ही देखते प्रशंसकों के बीच वायरल हो गई।
फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट
राज कंवर द्वारा लिखित और निर्देशित 'जीत' को साजिद नाडियाडवाला ने नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। फिल्म की कहानी एक बेरहम हिटमैन करण (सनी देओल) के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसे काजल (करिश्मा कपूर) से प्रेम हो जाता है। परंतु काजल की शादी उसके बचपन के दोस्त राजू (सलमान खान) से तय होती है, और इसी के चलते करण का सामना अपने क्राइम बॉस गजराज (अमरीश पुरी) से होता है। फिल्म में तब्बू ने भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता
23 अगस्त 1996 को रिलीज़ हुई 'जीत' बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त हिट साबित हुई और उस वर्ष की सर्वाधिक कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में शुमार हुई। गौरतलब है कि इस फिल्म का बंगाली रीमेक भी बना, जिसे 'लाल बादशाह' नाम दिया गया। यह फिल्म आज भी 90 के दशक की सिनेमाई विरासत का एक अहम हिस्सा मानी जाती है।
सनी देओल का हालिया काम
'जीत' के अलावा, सनी देओल और करिश्मा कपूर ने सुनील दर्शन के निर्देशन में बनी फिल्म 'अजय' में भी एक साथ काम किया, जो 1996 में ही रिलीज़ हुई थी। हाल ही में सनी राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी पीरियड ड्रामा फिल्म 'बंटवारा 1947' में नज़र आए, जिसे आमिर खान प्रोडक्शंस ने बनाया। इस फिल्म में प्रीति जिंटा, शबाना आज़मी और करण देओल ने भी अहम भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म असगर वजाहत के नाटक 'जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई' से प्रेरित है।
तीन दशकों की सांस्कृतिक विरासत
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड की 90 के दशक की फिल्मों के प्रति नॉस्टेल्जिया एक बार फिर चरम पर है। 'जीत' जैसी फिल्में न केवल अपने समय की दर्शक-पसंद को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि सही किरदार और भावनात्मक जुड़ाव पीढ़ियों तक दर्शकों के दिलों में घर कर लेते हैं। सनी देओल की यह भावुक अभिव्यक्ति उनके प्रशंसकों के लिए एक अनमोल उपहार है।