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तापसी पन्नू बोलीं — फिल्मोग्राफी हमेशा रहेगी, बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं

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तापसी पन्नू बोलीं — फिल्मोग्राफी हमेशा रहेगी, बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं

सारांश

तापसी पन्नू ने साफ़ कहा — ₹100 करोड़ या ₹1,000 करोड़ क्लब न होने की कोई परेशानी नहीं। 'गांधारी' से पहले दिए इस इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि फ्लॉप कहलाई फिल्में ही 10 साल बाद कल्ट बनती हैं, और यही सोच उनकी फिल्मोग्राफी की नींव है।

मुख्य बातें

तापसी पन्नू की आगामी एक्शन-थ्रिलर 'गांधारी' रिलीज़ के लिए तैयार है।
अभिनेत्री ने कहा कि उनके नाम ₹100 करोड़, ₹500 करोड़ या ₹1,000 करोड़ क्लब वाली फिल्में नहीं हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं।
तापसी के अनुसार, बॉक्स ऑफिस पर 'फ्लॉप' रही फिल्में 10 साल बाद कल्ट क्लासिक का दर्जा पाती हैं।
उन्होंने 20 साल बाद भी गर्व महसूस कराने वाली फिल्मों को अपनी फिल्मोग्राफी की कसौटी बताया।
अभिनेत्री ने माना कि इस चुनाव की 'कीमत' चुकानी पड़ती है — लेकिन फिल्मोग्राफी स्थायी रहती है।

अभिनेत्री तापसी पन्नू अपनी आगामी एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'गांधारी' की रिलीज़ से पहले खुलकर बोलीं कि उन्होंने अपने पूरे करियर में बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से ऊपर फिल्मों की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी है। मुंबई में एक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मोग्राफी समय की कसौटी पर खरी उतरेगी, चाहे शुरुआती बॉक्स ऑफिस नतीजे कुछ भी रहे हों।

फिल्मोग्राफी बनाम बॉक्स ऑफिस — तापसी का नज़रिया

तापसी ने स्वीकार किया कि उनके नाम ₹100 करोड़, ₹500 करोड़ या ₹1,000 करोड़ क्लब वाली फिल्में नहीं हैं — जिसे आज स्टारडम का पैमाना माना जाता है। लेकिन उन्होंने साफ़ कहा कि इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, किसी फिल्म की असली विरासत उसकी रिलीज़ के वर्षों बाद तय होती है।

उन्होंने कहा, 'मैंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में देखी हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलतीं और फिर 10 साल बाद हम उन्हें दशक की बेस्ट फिल्मों में गिनते हैं। फिर उन्हें कल्ट का दर्जा मिल जाता है, उनकी सराहना होती है, रेफरेंस दिए जाते हैं।'

फैसलों पर असर — एक्टर का दीर्घकालिक सोच

तापसी ने बताया कि इस समझ ने एक अभिनेत्री के रूप में उनके फिल्म चुनाव को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने क्षणिक वाहवाही के बजाय ऐसी फिल्मों को तरजीह दी जो वर्षों बाद भी प्रासंगिक बनी रहें।

उनके शब्दों में, 'मैंने कुछ समय की वाहवाही से ज़्यादा अपनी फिल्मों की लिस्ट को अहमियत दी है। क्योंकि मेरी फिल्मों की लिस्ट हमेशा रहेगी। समय बदलता रहेगा, लेकिन मेरी फिल्मोग्राफी नहीं बदलेगी — वो वैसी ही रहेगी।'

कल्ट क्लासिक का अजीब चक्र

तापसी ने फिल्म इंडस्ट्री के एक विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया — जो फिल्में रिलीज़ के समय 'फ्लॉप' कहलाती हैं, वही वर्षों बाद सबसे ज़्यादा याद की जाती हैं।

उन्होंने कहा, 'जाहिर है इसलिए आपको कीमत भी चुकानी पड़ती है। लोग कहते हैं कि आपकी फिल्में फ्लॉप हैं और फिर आपको 10 साल तक इंतज़ार करना पड़ता है कि उसे कल्ट का दर्जा मिले। फिर आप बड़े-बड़े इंटरव्यू दे सकते हैं और उसी साल बनी दूसरी हिट फिल्मों के बारे में कोई बात भी नहीं करता। तो ये एक अजीब-सा साइकिल है, जिससे एक एक्टर को गुज़रना पड़ता है।'

गर्व की कसौटी — 20 साल बाद भी

अभिनेत्री ने अपने फिल्म चुनाव की कसौटी बताई — वे ऐसी फिल्में चुनती हैं जिन्हें 20 साल बाद देखकर भी गर्व हो। उन्होंने कहा, 'मैं अपनी लिस्ट में ऐसी फिल्में डालना चाहती हूं कि अगर मैं 20 साल बाद भी उसे देखूं तो लगे कि हाँ, यह एक अच्छी फिल्म थी।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में बड़े बजट और ₹1,000 करोड़ क्लब को सफलता का एकमात्र मानदंड माना जाने लगा है। तापसी का नज़रिया इस धारा के विपरीत है और इंडस्ट्री में एक ज़रूरी बहस को हवा देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ₹1,000 करोड़ क्लब को प्रतिभा का पर्याय मान लिया गया है। लेकिन विडंबना यह है कि जिन फिल्मों को 'कल्ट' कहकर सराहा जाता है, वे अक्सर उन्हीं अभिनेताओं की होती हैं जिन्हें एक दौर में 'बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलने वाला' कहकर खारिज किया गया था। तापसी का यह नज़रिया व्यावसायिक सफलता और कलात्मक विरासत के बीच की खाई को रेखांकित करता है — एक बहस जो इंडस्ट्री में अक्सर दबी रह जाती है। असली सवाल यह है कि क्या बॉलीवुड का मूल्यांकन तंत्र कभी इन दोनों को अलग करके देखना सीखेगा।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तापसी पन्नू की आगामी फिल्म 'गांधारी' किस विधा की फिल्म है?
'गांधारी' एक एक्शन-थ्रिलर फिल्म है जिसमें तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म जल्द रिलीज़ होने वाली है।
तापसी पन्नू ने बॉक्स ऑफिस को लेकर क्या कहा?
तापसी ने कहा कि उनके नाम ₹100 करोड़, ₹500 करोड़ या ₹1,000 करोड़ क्लब वाली फिल्में नहीं हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं। उनके अनुसार, फिल्मोग्राफी की असली परीक्षा समय करता है, बॉक्स ऑफिस नहीं।
तापसी पन्नू के अनुसार कल्ट क्लासिक फिल्में कैसे बनती हैं?
तापसी के अनुसार, कई फिल्में रिलीज़ के समय बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलतीं, लेकिन 10 साल बाद उन्हें दशक की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है और कल्ट का दर्जा मिलता है। यह एक ऐसा चक्र है जिससे हर अभिनेता को गुज़रना पड़ता है।
तापसी पन्नू अपनी फिल्में चुनने की कसौटी क्या मानती हैं?
तापसी ने बताया कि वे ऐसी फिल्में चुनती हैं जिन्हें 20 साल बाद देखकर भी गर्व हो। उनके लिए फिल्मोग्राफी स्थायी होती है, जबकि बॉक्स ऑफिस के नंबर अस्थायी।
क्या तापसी पन्नू को अपनी फिल्मों के फ्लॉप होने का अफसोस है?
नहीं। तापसी ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने जानबूझकर क्षणिक वाहवाही से ऊपर अपनी फिल्मोग्राफी को रखा है। उन्होंने माना कि इस चुनाव की कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन फिल्मोग्राफी हमेशा बनी रहती है।
राष्ट्र प्रेस
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