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काजल अग्रवाल की फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' का टीजर रिलीज, पेस्टिसाइड और खाद्य मिलावट पर तीखा प्रहार

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काजल अग्रवाल की फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' का टीजर रिलीज, पेस्टिसाइड और खाद्य मिलावट पर तीखा प्रहार

सारांश

काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' का टीजर रिलीज हो गया है। कोर्टरूम, विरोध-प्रदर्शन और एक पिता के दर्द के जरिए यह फिल्म पेस्टिसाइड और खाद्य मिलावट के गंभीर सवाल उठाती है। 24 जुलाई को तीन भाषाओं में रिलीज।

मुख्य बातें

काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े अभिनीत 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' का टीजर 26 जून 2025 को रिलीज हुआ।
फिल्म पेस्टिसाइड और खाद्य मिलावट के दुष्प्रभावों पर आधारित सामाजिक कोर्टरूम ड्रामा है।
काजल अग्रवाल वकील अर्चना की भूमिका में हैं; श्रेयस तलपड़े एक पिता योगेश पांडे की भूमिका में, जिनकी सात साल की बेटी की मौत मिलावटी खाने से होने का दावा है।
फिल्म जी स्टूडियोज और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज के बैनर तले सागर बी.
शिंदे ने लिखी और निर्मित की है।
रिलीज तारीख: 24 जुलाई 2025 , हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में विश्वव्यापी।

फिल्म 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' का टीजर 26 जून 2025 को रिलीज किया गया, जिसमें अभिनेत्री काजल अग्रवाल एक जुझारू वकील की भूमिका में पेस्टिसाइड और खाद्य मिलावट के खिलाफ कोर्ट में लड़ती नजर आती हैं। यह फिल्म आधुनिक खेती में रासायनिक पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल और उससे इंसानी सेहत पर पड़ने वाले घातक असर को केंद्र में रखती है।

टीजर में क्या दिखाया गया

टीजर की शुरुआत एक बड़े जन-विरोध से होती है, जहाँ किसान और आम नागरिक सड़कों पर उतरकर वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) के खिलाफ नारेबाजी करते हैं। भीड़ उनकी गिरफ्तारी की माँग करती है और उनके पोस्टरों पर कालिख पोतती दिखाई देती है।

इसके बाद कोर्टरूम का एक धारदार दृश्य सामने आता है, जहाँ अभिनेता श्रेयस तलपड़े के किरदार योगेश पांडे की याचिका पर सुनवाई होती है। योगेश का दावा है कि उनकी सात साल की बेटी की मौत कैंसर से नहीं, बल्कि फल-सब्जियों, दूध और दही जैसी रोजमर्रा की चीजों में मौजूद जहरीले तत्वों से हुई — और मेडिकल रिपोर्ट्स इसकी पुष्टि करती हैं।

काजल अग्रवाल का किरदार और अहम डायलॉग

वकील अर्चना के रूप में काजल अग्रवाल कोर्ट में तर्कपूर्ण और दृढ़ आवाज में कहती हैं, 'फल-सब्जियां ये सब किसानों के माध्यम से खरीदी जाती है, किसान जो पेस्टिसाइड इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें बनाने वाली कंपनियां और कंपनियों को इजाजत देने वाली सरकार भी दोषी है।' यह संवाद फिल्म की केंद्रीय थीसिस को स्पष्ट करता है — जिम्मेदारी का दायरा किसान से आगे, कंपनियों और नीति-निर्माताओं तक फैला है।

टीजर में श्रेयस तलपड़े का एक और दमदार संवाद सुनाई देता है: 'हरित क्रांति के नाम पर जो जहर का तूफान उठा है, वह रुकने का नाम ही नहीं रहा है।' यह पंक्ति हरित क्रांति की विरासत पर एक तीखा सवाल उठाती है।

सिस्टम की बेबसी और भावनात्मक दृश्य

टीजर में योगेश पांडे की निजी पीड़ा को भी दर्शाया गया है — बीमार बेटी के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर, लंबी कतारें और हर जगह से मिली निराशा। जब बेटी की मौत के बाद वह पुलिस स्टेशन न्याय माँगने जाता है, तो उसकी शिकायत की फाइलें फेंक दी जाती हैं — यह दृश्य आम नागरिक की व्यवस्था के सामने बेबसी को रेखांकित करता है।

टीजर के अंत में एक चौंकाने वाला दृश्य है, जहाँ प्रदर्शन के बीच एक महिला काजल अग्रवाल के किरदार को थप्पड़ मार देती है — जो यह संकेत देता है कि सच बोलने की कीमत भी चुकानी पड़ती है।

फिल्म की पृष्ठभूमि और रिलीज

जी स्टूडियोज और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज के बैनर तले बनी यह फिल्म सागर बी. शिंदे ने लिखी और निर्मित की है। 'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' 24 जुलाई 2025 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में एक साथ रिलीज होगी। खाद्य सुरक्षा और कृषि रसायनों के दुष्प्रभावों पर केंद्रित यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर मँडराते खतरे को बड़े पर्दे पर उठाने की कोशिश करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कंपनी, सरकार — को एक साथ कठघरे में खड़ा करता है, जो इसे महज मसाला ड्रामा से अलग करता है। असली परीक्षा यह होगी कि फिल्म इस जटिल मुद्दे को सरलीकृत नहीं करती और समाधान की दिशा में भी कुछ कहती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' किस विषय पर आधारित है?
यह फिल्म पेस्टिसाइड और खाद्य मिलावट के गंभीर सामाजिक मुद्दे पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे रोजमर्रा के खाने में मौजूद जहरीले रासायनिक तत्व धीरे-धीरे इंसानी सेहत को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
फिल्म में काजल अग्रवाल की क्या भूमिका है?
काजल अग्रवाल फिल्म में वकील अर्चना की भूमिका निभा रही हैं, जो पेस्टिसाइड बनाने वाली कंपनियों और नीति-निर्माताओं के खिलाफ कोर्ट में मजबूती से लड़ती हैं। उनका किरदार खाद्य मिलावट से मारे गए एक बच्चे के पिता का केस लड़ता है।
'द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन' कब और किन भाषाओं में रिलीज होगी?
फिल्म 24 जुलाई 2025 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में एक साथ रिलीज होगी।
फिल्म का निर्माण किसने किया है?
यह फिल्म जी स्टूडियोज और एमआईजी प्रोडक्शन एंड स्टूडियोज के बैनर तले सागर बी. शिंदे ने लिखी और निर्मित की है।
टीजर में श्रेयस तलपड़े का किरदार क्या है?
श्रेयस तलपड़े योगेश पांडे की भूमिका में हैं — एक पिता जिनकी सात साल की बेटी की मौत मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार खाद्य मिलावट से हुई। न्याय के लिए पुलिस से लेकर कोर्ट तक भटकते उनके किरदार की पीड़ा टीजर का भावनात्मक केंद्र है।
राष्ट्र प्रेस
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