उर्वशी ढोलकिया का संघर्ष: 6 साल में काम, 17 साल में बनीं माँ, 'कोमोलिका' ने सुनाई अनकही दास्तान
सारांश
मुख्य बातें
टेलीविजन की जानी-मानी अभिनेत्री उर्वशी ढोलकिया ने हाल ही में शो 'तुम हो ना' में अपने जीवन के कुछ ऐसे पहलू साझा किए, जिन्हें सुनकर हर कोई भावुक हो गया। 'कसौटी जिंदगी की' में कोमोलिका का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली उर्वशी ने बताया कि उन्होंने महज 6 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था और 17 साल की उम्र में वे माँ बन गई थीं। पर्दे पर दिखने वाली उनकी चमक के पीछे दशकों की मेहनत और अनगिनत चुनौतियों का सफर है।
बचपन का सपना और टीवी से जुड़ाव
उर्वशी ने बताया कि जब वे छोटी थीं, तब कलर टेलीविजन का दौर अभी-अभी शुरू हुआ था। वे टीवी पर आने वाले विज्ञापनों को बड़े ध्यान से देखती थीं। एक दिन उन्होंने अपनी माँ से कहा कि उन्हें अब टीवी नहीं देखना। माँ को लगा कि शायद बेटी का ध्यान पढ़ाई की ओर मुड़ रहा है, लेकिन उर्वशी का इरादा कुछ और ही था।
उन्होंने कहा, 'मुझे टीवी देखना नहीं, बल्कि टीवी के अंदर जाना था। मैं खुद स्क्रीन पर आकर लोगों के सामने एक्टिंग करना चाहती थी। मेरे एक्टिंग के सपने की शुरुआत यहीं से हुई थी।' यह जज़्बा ही था जिसने उन्हें बहुत कम उम्र में इस उद्योग में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।
कम उम्र में शादी और मातृत्व की जिम्मेदारी
शो के होस्ट राजीव खंडेलवाल ने जब उर्वशी के संघर्षों का जिक्र किया, तो उन्होंने कहा कि कलाकारों की चमकदार जिंदगी के पीछे की चुनौतियाँ अक्सर अनदेखी रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि उर्वशी की कहानी उन तमाम महिलाओं को हिम्मत दे सकती है जो अपनी परेशानियों में खुद को अकेला महसूस करती हैं।
उर्वशी ने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया कि वे 17 साल की उम्र में माँ बनी थीं। उन्होंने कहा, 'बचपन से काम करने की वजह से जिम्मेदारियाँ उठाना मेरे स्वभाव का हिस्सा बन गया था। कम उम्र में शादी करना, फिर माँ बनना और साथ ही अपने करियर को संभालना आसान नहीं था। लेकिन मैंने हर चुनौती का सामना किया और कभी हार नहीं मानी।'
एक्टिंग का अटूट जुनून
उर्वशी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी दूसरे पेशे के बारे में नहीं सोचा। उनके शब्दों में, 'बचपन से ही एक्टिंग मेरा सबसे बड़ा सपना था। मेरे मन में हमेशा यही इच्छा थी कि मैं एक्टिंग करूँ और इसी फील्ड में अपना करियर बनाऊँ। यही वजह रही कि मैंने बहुत छोटी उम्र से ही मेहनत करना शुरू कर दिया।'
गौरतलब है कि टेलीविजन उद्योग में लंबे समय तक टिके रहना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, और उर्वशी ने यह मुकाम तब हासिल किया जब उनके कंधों पर पारिवारिक जिम्मेदारियाँ भी थीं।
माता-पिता का अटूट साथ
उर्वशी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा, 'जब भी मुझे किसी सहारे की जरूरत पड़ी, तो मेरे माता-पिता हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। उनके समर्थन ने ही मुझे हर मुश्किल परिस्थिति में आगे बढ़ने की ताकत दी।'
राजीव खंडेलवाल भी उनकी बातें सुनकर भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि हर इंसान की जिंदगी में ऐसा कोई न कोई होना चाहिए जो मुश्किल वक्त में साथ दे और आगे बढ़ने का हौसला दे। उर्वशी ढोलकिया की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार का साथ मिले तो हर बाधा पार की जा सकती है।