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विनय पाठक: MBA टॉपर से BFA तक का सफर, 4 साल पिता से छुपाया करियर का सबसे बड़ा राज

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विनय पाठक: MBA टॉपर से BFA तक का सफर, 4 साल पिता से छुपाया करियर का सबसे बड़ा राज

सारांश

MBA में टॉप-10 छात्र, पर दिल थियेटर में अटका था — विनय पाठक ने चुपके से BFA में दाखिला लिया और पूरे 4 साल पिता से यह राज छुपाए रखा। बिहार के एक पुलिस अधिकारी के बेटे का यह दांव आगे चलकर 'भेजा फ्राई' और 'खोसला का घोसला' जैसी यादगार भूमिकाओं में बदल गया।

मुख्य बातें

विनय पाठक ने 1990 के दशक की शुरुआत में MBA की पढ़ाई छोड़कर चुपचाप BFA (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) में दाखिला लिया।
पीटर शेफर के नाटक 'ऐकव्स' ने उनके करियर की दिशा बदल दी; यह राज 4 साल तक परिवार से छुपाया।
पिता सच्चिदानंद पाठक , जो बिहार पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक थे, ने दीक्षांत समारोह से कुछ दिन पहले सच जानने के बाद बेटे का समर्थन किया।
12 जुलाई 1968 को बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया में जन्मे विनय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी ऑनर्स किया।
1998 में 'हिप हिप हुर्रे' के 'विन्नी सर' से टीवी पर पहचान, फिर 2006-07 में 'खोसला का घोसला' और 'भेजा फ्राई' से बॉलीवुड स्टारडम।

बिहार के भोजपुर जिले के एक अनुशासित पुलिस अधिकारी के बेटे विनय पाठक की जीवन-यात्रा किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है। 1990 के दशक की शुरुआत में MBA की पढ़ाई के दौरान कक्षा के शीर्ष 10 मेधावियों में शुमार यह छात्र एक दिन कैंपस थियेटर में पीटर शेफर का नाटक 'ऐकव्स' देखने के बाद इतना बदल गया कि उसने चुपचाप बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) में दाखिला ले लिया — और यह राज पूरे 4 साल तक परिवार से छुपाए रखा।

थियेटर ने बदल दी जिंदगी की दिशा

रामधारी सिंह दिनकर की 'रश्मिरथी' और हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' की पंक्तियाँ कंठस्थ रखने वाले विनय के भीतर कलाकार पहले से जी रहा था। लेकिन कैंपस में 'ऐकव्स' देखने के बाद उन्होंने बिना घर को सूचित किए MBA छोड़कर BFA में प्रवेश ले लिया। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे बड़ा और सबसे गुप्त मोड़ साबित हुआ।

दीक्षांत समारोह से महज कुछ दिन पहले उन्होंने अपने पिता सच्चिदानंद पाठक — जो बिहार पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर कार्यरत थे — को यह सच बताया। उल्लेखनीय है कि एक सख्त पुलिस अधिकारी होने के बावजूद पिता ने बेटे की कलात्मक रुचि का पूर्ण समर्थन किया।

बचपन और शिक्षा: रांची से इलाहाबाद तक

12 जुलाई 1968 को बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया में जन्मे विनय पाठक का पालन-पोषण परंपरागत और अनुशासित परिवेश में हुआ। उनकी माता किशोरी पाठक गृहिणी थीं और बड़े भाई शशि शेखर पाठक प्राध्यापक बने। पिता के विभागीय तबादलों के चलते बचपन रांची और धनबाद में बीता।

प्रारंभिक शिक्षा रांची के एक बोर्डिंग स्कूल में हुई। इसके बाद सेंट कोलंबा कॉलेज, हजारीबाग और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने अंग्रेज़ी ऑनर्स की डिग्री हासिल की। यह वही पृष्ठभूमि थी जिसने उनके भीतर साहित्य और मंच के प्रति गहरी संवेदनशीलता जगाई।

मुंबई में संघर्ष और पहचान

थियेटर गुरु डॉ. फारले रिचमंड की सलाह पर 1995 में विनय ने भारतीय रंगमंच की राह पकड़ी। इसी दौरान विज्ञापन फिल्मों की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात सोनिका सहाय से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने विवाह किया।

1990 के दशक के उत्तरार्ध में मुंबई आने के बाद उन्हें कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा। विज्ञापनों और टेलीविजन से शुरुआत करते हुए 1998 में धारावाहिक 'हिप हिप हुर्रे' में 'विन्नी सर' के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। रणवीर शौरी के साथ 'रणवीर, विनय और कौन?' और 'द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो' ने उनकी हास्य प्रतिभा को और धार दी।

फिल्मों में बहुआयामी पहचान

सिनेमाई पर्दे पर 2006 में 'खोसला का घोसला' के आसिफ इकबाल और 2007 में 'भेजा फ्राई' के सीधे-सादे टैक्स इंस्पेक्टर 'भारत भूषण' के किरदारों ने उन्हें स्टारडम की ऊँचाइयों पर पहुँचाया। विनय पाठक ने कभी खुद को किसी एक शैली में नहीं बाँधा।

'जॉनी गद्दार' में नकारात्मक भूमिका प्रकाश, 'रब ने बना दी जोड़ी' में विश्वस्त दोस्त बॉबी, और 'गौर हरि दास्तान' में अपनी पहचान के लिए संघर्ष करते वृद्ध स्वतंत्रता सेनानी — हर किरदार में उन्होंने चरित्र की भीतरी संवेदनशीलता को जीवंत रखा। सुधीर मिश्रा की 'खोया खोया चांद' में उनके अभिनय को विशेष सराहना मिली। उनका यह सफर इस बात का प्रमाण है कि जब जुनून सच्चा हो, तो कोई भी मोड़ गलत नहीं होता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसलिए कि समाज की अपेक्षाओं का बोझ उनके कंधों पर था। आज जब 'पैशन इकॉनमी' की बात होती है, तब यह याद रखना ज़रूरी है कि विनय पाठक जैसे कलाकारों ने वह रास्ता तब चुना जब उसकी कोई गारंटी नहीं थी। बॉलीवुड में चरित्र अभिनेताओं की भूमिका को आज भी वह सम्मान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए — विनय पाठक इसके सबसे बड़े और सबसे कम चर्चित उदाहरण हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनय पाठक ने MBA क्यों छोड़ा और BFA में दाखिला क्यों लिया?
MBA की पढ़ाई के दौरान कैंपस थियेटर में पीटर शेफर का नाटक 'ऐकव्स' देखने के बाद विनय पाठक ने अभिनय को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने बिना परिवार को बताए BFA में दाखिला ले लिया और यह राज 4 साल तक छुपाए रखा।
विनय पाठक के पिता ने BFA की पढ़ाई के बारे में जानने पर क्या प्रतिक्रिया दी?
विनय पाठक के पिता सच्चिदानंद पाठक बिहार पुलिस में पुलिस उपाधीक्षक थे। दीक्षांत समारोह से कुछ दिन पहले जब विनय ने उन्हें सच बताया, तो उन्होंने बेटे की कलात्मक रुचि का पूर्ण समर्थन किया।
विनय पाठक का जन्म कब और कहाँ हुआ?
विनय पाठक का जन्म 12 जुलाई 1968 को बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रांची के बोर्डिंग स्कूल में हुई और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी ऑनर्स की डिग्री ली।
विनय पाठक को टेलीविजन पर पहली बड़ी पहचान कब मिली?
विनय पाठक को 1998 में धारावाहिक 'हिप हिप हुर्रे' में 'विन्नी सर' के किरदार से टेलीविजन पर बड़ी पहचान मिली। इसके बाद रणवीर शौरी के साथ 'रणवीर, विनय और कौन?' और 'द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो' ने उनकी हास्य प्रतिभा को और निखारा।
विनय पाठक की सबसे यादगार फिल्में कौन-सी हैं?
विनय पाठक की सबसे यादगार फिल्मों में 2006 की 'खोसला का घोसला' (आसिफ इकबाल की भूमिका) और 2007 की 'भेजा फ्राई' (टैक्स इंस्पेक्टर भारत भूषण की भूमिका) प्रमुख हैं। इसके अलावा 'जॉनी गद्दार', 'रब ने बना दी जोड़ी', 'गौर हरि दास्तान' और 'खोया खोया चांद' में भी उनके अभिनय की विशेष सराहना हुई।
राष्ट्र प्रेस
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