'ग्लोरी' में बॉक्सर 'राका' की भूमिका में कुणाल ठाकुर को देखकर पिता हुए भावुक, 9 साल बाद पहली बार सेट पर मिले

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'ग्लोरी' में बॉक्सर 'राका' की भूमिका में कुणाल ठाकुर को देखकर पिता हुए भावुक, 9 साल बाद पहली बार सेट पर मिले

सारांश

9 साल का इंतज़ार खत्म हुआ जब अभिनेता कुणाल ठाकुर के पिता पहली बार शूटिंग सेट पर पहुंचे। 'ग्लोरी' में बॉक्सर 'राका' की भूमिका में बेटे को देखते हुए पिता हुए भावुक। यह पल ठाकुर के लिए किसी भी पुरस्कार से ज्यादा कीमती साबित हुआ।

मुख्य बातें

अभिनेता कुणाल ठाकुर क्राइम-स्पोर्ट्स ड्रामा ' ग्लोरी ' में बॉक्सर ' राका ' की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
ठाकुर के 9 वर्षीय अभिनय करियर में यह पहली बार है जब उनके पिता शूटिंग सेट पर उन्हें लाइव एक्टिंग करते हुए देखने आए।
ठाकुर के माता-पिता अबू धाबी में रहते हैं और लंबे शूटिंग शेड्यूल के कारण सेट पर नहीं आ पाते थे।
को-स्टार मुक्ति मोहन ने ठाकुर के पिता को सेट पर लाने की योजना बनाई और उन्हें शूटिंग के दौरान अभिनय की दुनिया से परिचित कराया।
ठाकुर के लिए यह पल किसी भी अवॉर्ड या तालियों से कहीं ज्यादा कीमती साबित हुआ।

मुंबई, 6 मई 2026। क्राइम-स्पोर्ट्स ड्रामा वेब सीरीज़ 'ग्लोरी' में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता कुणाल ठाकुर ने अपने 9 वर्षीय अभिनय करियर का सबसे यादगार पल शेयर किया है। इस बार उनके पिता पहली बार शूटिंग सेट पर उन्हें 'राका' नाम के बॉक्सर की भूमिका में लाइव एक्टिंग करते हुए देखने आए, जो ठाकुर के लिए किसी भी पुरस्कार से अधिक महत्वपूर्ण साबित हुआ।

9 साल का इंतज़ार खत्म

ठाकुर के माता-पिता अबू धाबी में रहते हैं। अभिनेता ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि लंबे शूटिंग शेड्यूल और सपनों के पीछे भागते हुए 9 सालों में उनके माता-पिता ने कभी उन्हें सेट पर लाइव काम करते हुए नहीं देखा था। इस बार पहली बार यह अवसर मिल गया।

को-स्टार मुक्ति मोहन की भूमिका

ठाकुर ने अपने को-स्टार मुक्ति मोहन की भूमिका को स्वीकार करते हुए बताया कि यह सब मुक्ति की पहल के कारण संभव हो सका। उन्होंने लिखा कि मुक्ति ने ही उनके पिता को सेट पर लाने की योजना बनाई और उन्हें उस दुनिया में ले गई, जिसके पीछे ठाकुर लगभग एक दशक से भाग रहे थे। पोस्ट में ठाकुर अपने पिता और मुक्ति के साथ एक तस्वीर शेयर की है।

सबसे बड़ा पुरस्कार

अभिनेता ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि जब उन्होंने अपने पिता को चुपचाप सेट पर खड़े होकर उन्हें 'राका' के अवतार में एक्टिंग करते देखा, तो वह पल किसी भी अवॉर्ड या तालियों से कहीं ज्यादा कीमती लगा। उन्होंने लिखा कि यह पल उस इंसान द्वारा देखे और समझे जाने के बारे में था, जिसकी मौजूदगी उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है।

मेहनत का सबूत

ठाकुर ने अपनी पोस्ट का समापन करते हुए कहा कि उनके पिता का सेट पर होना उनकी सालों की मेहनत का सबसे बड़ा सबूत था। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि 'ग्लोरी' में उनके लिए यही असली 'ग्लोरी' का पल था — न कि कोई बाहरी सफलता, बल्कि अपने सबसे प्रिय व्यक्ति को अपनी मेहनत का फल देखते हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कुणाल ठाकुर की कहानी इस आख्यान को चुनौती देती है। 9 साल की लंबी यात्रा में पहली बार अपने पिता को सेट पर देखना — जो अबू धाबी में रहते हैं — यह दर्शाता है कि असली 'ग्लोरी' वह है जो घर के सबसे प्रिय व्यक्ति को आपकी मेहनत का फल देखते हुए मिलती है। यह पल इंडस्ट्री के उन अनगिनत अभिनेताओं के लिए एक संदेश है जो बड़े सपनों के पीछे भागते हुए अपनों को भूल जाते हैं। मुक्ति मोहन की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है — यह दिखाता है कि कला-जगत में सहयोग और मानवीय संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुणाल ठाकुर कौन हैं और 'ग्लोरी' में उनकी भूमिका क्या है?
कुणाल ठाकुर एक भारतीय अभिनेता हैं जो क्राइम-स्पोर्ट्स ड्रामा वेब सीरीज़ 'ग्लोरी' में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। उनका किरदार 'राका' नाम का एक बॉक्सर है।
कुणाल ठाकुर के पिता कब पहली बार शूटिंग सेट पर गए?
कुणाल ठाकुर के 9 वर्षीय अभिनय करियर में यह पहली बार था जब उनके पिता 'ग्लोरी' की शूटिंग सेट पर उन्हें लाइव एक्टिंग करते हुए देखने आए। यह घटना 6 मई 2026 के आसपास हुई थी।
कुणाल ठाकुर के पिता अबू धाबी में क्यों रहते हैं?
पोस्ट में कुणाल ने केवल इतना बताया कि उनके माता-पिता अबू धाबी में रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि वे वहां काम करते हैं या किसी अन्य कारण से रहते हैं।
मुक्ति मोहन ने कुणाल ठाकुर के पिता को सेट पर लाने में क्या भूमिका निभाई?
मुक्ति मोहन, जो 'ग्लोरी' में कुणाल की को-स्टार हैं, ने ठाकुर के पिता को सेट पर लाने की योजना बनाई। उन्होंने ठाकुर के पिता को शूटिंग के दौरान अभिनय की दुनिया से परिचित कराया।
कुणाल ठाकुर के लिए यह पल इतना महत्वपूर्ण क्यों था?
कुणाल के लिए यह पल किसी भी अवॉर्ड या तालियों से ज्यादा महत्वपूर्ण था क्योंकि यह उस इंसान द्वारा देखे और समझे जाने के बारे में था, जिसकी मौजूदगी उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। उनके पिता का सेट पर होना उनकी सालों की मेहनत का सबसे बड़ा सबूत था।
राष्ट्र प्रेस
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