यूट्यूबर जसबीर सिंह को ISI मामले में हाईकोर्ट से नियमित जमानत, सबूतों की कमी का हवाला

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यूट्यूबर जसबीर सिंह को ISI मामले में हाईकोर्ट से नियमित जमानत, सबूतों की कमी का हवाला

सारांश

चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रैवल व्लॉगर जसबीर सिंह को ISI कनेक्शन के आरोपों में नियमित जमानत दी है। अदालत ने कहा कि दस महीने की हिरासत के बाद भी जांच एजेंसियां राष्ट्रीय सुरक्षा उल्लंघन का कोई ठोस सबूत नहीं दे पाईं। वीडियो साक्ष्य सार्वजनिक स्थानों से थे, मोबाइल डेटा में संदिग्ध संपर्क नहीं मिले — यह फैसला उन मामलों में अदालत की सावधानी को दर्शाता है जहाँ गुप्त सूचना पर निर्भरता अधिक हो।

Key Takeaways

  • हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को यूट्यूबर जसबीर सिंह को ISI मामले में नियमित जमानत दी।
  • अदालत ने कहा कि 10 महीने की जांच में आरोपों को सशक्त करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
  • विवादास्पद वीडियो भाखड़ा डैम और मोहाली एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक स्थानों से थे।
  • मोबाइल डेटा में कोई चैट रिकॉर्ड या प्रत्यक्ष संदिग्ध संपर्क नहीं मिले।
  • बचाव पक्ष ने कहा कि जसबीर सिंह 'जान महल' यूट्यूब चैनल पर ट्रैवल वीडियो अपलोड करते हैं।

चंडीगढ़, 29 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जसबीर सिंह को नियमित जमानत प्रदान की है, जिन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संपर्क रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप था। जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसियां अब तक ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई हैं जो यह साबित करे कि आरोपी ने वास्तव में देश की सुरक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी किसी विदेशी एजेंसी को हस्तांतरित की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 3 जून 2025 को सामने आया था, जब मोहाली स्थित स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) पुलिस स्टेशन में जसबीर सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि वह ISI से जुड़े व्यक्तियों के संपर्क में था और भारतीय सेना की कार्यविधियों से संबंधित संवेदनशील सूचनाएँ साझा कर रहा था। जांच एजेंसियों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गंभीर मामला बताते हुए कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।

अदालत की जांच और निष्कर्ष

अदालत की सुनवाई में यह पाया गया कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से गुप्त सूचना और आरोपी के कथित बयान पर आधारित है। जसबीर सिंह के मोबाइल डेटा की जांच में कोई चैट रिकॉर्ड, संदेश या प्रत्यक्ष संपर्क सामने नहीं आया जो यह साबित करे कि वह किसी पाकिस्तानी नागरिक या एजेंसी के साथ संदिग्ध तरीके से जुड़ा हुआ था। गौरतलब है कि अदालत ने उन वीडियो का भी विश्लेषण किया जिनके आधार पर आरोप लगाए गए थे।

वीडियो साक्ष्य पर अदालत की टिप्पणी

कोर्ट ने पाया कि विवादास्पद वीडियो भाखड़ा डैम और मोहाली एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक स्थानों से संबंधित थे। अदालत ने कहा कि इन वीडियो में किसी भी प्रकार की गोपनीय या वर्गीकृत जानकारी साझा नहीं की गई थी। यह निष्कर्ष ISI कनेक्शन के आरोपों को कमजोर करता है।

बचाव पक्ष की दलील

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि जसबीर सिंह एक ट्रैवल व्लॉगर हैं जो अपने यूट्यूब चैनल 'जान महल' पर नियमित रूप से यात्रा से संबंधित वीडियो अपलोड करते हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उनके मोबाइल फोन में पाए गए पाकिस्तानी नंबरों का कारण यह था कि वह पहले नॉर्वे में रहे थे, जहाँ उनके आसपास कई पाकिस्तानी परिवार रहते थे।

न्यायिक हिरासत की अवधि और जमानत की शर्तें

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जसबीर सिंह पिछले दस महीनों से न्यायिक हिरासत में थे। आरोपी के विरुद्ध कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है और अब तक की जांच में आरोपों को सशक्त करने वाला कोई पुख्ता साक्ष्य सामने नहीं आया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए नियमित जमानत प्रदान की गई है। हालांकि, अदालत ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं — जसबीर सिंह किसी भी गवाह को प्रभावित करने या धमकी देने का प्रयास नहीं करेंगे।

Point of View

तो अदालत को सावधानी बरतनी पड़ी। यह केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं है — यह संदेश देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर साक्ष्य के मानदंड को कमजोर नहीं किया जा सकता। साथ ही, डिजिटल साक्ष्य (चैट, संदेश, कॉल लॉग) की अनुपस्थिति आधुनिक जांच में एक महत्वपूर्ण खामी है — विशेषकर जब आरोप सीधे संचार पर आधारित हों।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

जसबीर सिंह पर क्या आरोप लगाए गए थे?
जसबीर सिंह पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संपर्क रखने और भारतीय सेना की गतिविधियों से संबंधित संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप लगाया गया था। यह मामला 3 जून 2025 को मोहाली के SSOC पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने जमानत क्यों दी?
अदालत ने कहा कि 10 महीने की जांच के बाद भी जांच एजेंसियां आरोपों को सशक्त करने वाला कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाईं। मोबाइल डेटा में कोई संदिग्ध चैट या संदेश नहीं मिले, और वीडियो सार्वजनिक स्थानों से थे।
वीडियो साक्ष्य के बारे में अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने पाया कि विवादास्पद वीडियो भाखड़ा डैम और मोहाली एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक स्थानों से संबंधित थे, और इनमें किसी भी प्रकार की गोपनीय या वर्गीकृत जानकारी साझा नहीं की गई थी।
जसबीर सिंह कौन हैं?
जसबीर सिंह एक ट्रैवल व्लॉगर हैं जो अपने यूट्यूब चैनल 'जान महल' पर नियमित रूप से यात्रा से संबंधित वीडियो अपलोड करते हैं। उनके पास कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
जमानत की क्या शर्तें हैं?
अदालत ने जमानत के साथ शर्त लगाई है कि जसबीर सिंह किसी भी गवाह को प्रभावित करने या धमकी देने का प्रयास नहीं करेंगे।
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