चेन्नई में नीट विरोधी आंदोलन तेज़: विधानसभा प्रस्ताव के बाद भी भूख हड़ताल 20वें दिन जारी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा द्वारा नीट के खिलाफ नया प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद चेन्नई में विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, वंचित और कमज़ोर वर्ग के छात्रों के हितों की रक्षा संभव नहीं है। 16 अगस्त 2026 तक शहर के दो अलग-अलग स्थानों पर आंदोलन सक्रिय हैं।
तिरुवोट्टियूर में भूख हड़ताल का 20वाँ दिन
पूर्व भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बालामुरुगन 27 जुलाई से तिरुवोट्टियूर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। रविवार को उनका अनशन 20वें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब तक उनकी माँगें नहीं मानी जातीं, वे अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
बालामुरुगन की मुख्य माँग तमिलनाडु के लिए नीट से छूट है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कथित 'कॉकरोच टिप्पणी' को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के इस्तीफे और दिल्ली में छात्रों पर कथित हमले के संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी माँग रखी है।
अनशन लंबा खिंचने के कारण बालामुरुगन के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार द्वारा अब तक कोई निर्धारित स्थान आवंटित न किए जाने के कारण वे अपने घर से ही विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।
परिजनों और संगठनों की माँगें
दिवंगत मेडिकल अभ्यर्थी एस. अनीता के भाई मणिरत्नम ने बालामुरुगन से मुलाकात की और राज्य सरकार से उनके स्वास्थ्य की जाँच कराने तथा आंदोलन के लिए एक उचित स्थान उपलब्ध कराने की अपील की। अनीता की मृत्यु 2017 में नीट में असफलता के बाद हुई थी, और वे इस आंदोलन का एक प्रतीक बन चुकी हैं।
मणिरत्नम और एंटी-नीट फेडरेशन-तमिलनाडु के सदस्यों ने विधानसभा प्रस्ताव पारित होने के बाद अपनी 12 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी, यह मानते हुए कि सरकार ने उनकी एक माँग पूरी कर दी है। हालाँकि, संगठन अभी भी शिक्षा को पुनः राज्य सूची में शामिल करने और नीट को पूरी तरह समाप्त करने की माँग पर अड़ा हुआ है।
एग्मोर में सांस्कृतिक प्रतिरोध का आयोजन
एक अलग और अनूठा प्रदर्शन एग्मोर के रुक्मणी लक्ष्मीपति रोड स्थित थायगम कॉम्प्लेक्स में पिछले 24 दिनों से जारी है। ओजी तमिजा समूह द्वारा आयोजित यह धरना प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक चलता है।
इसमें छात्र, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेते हैं। संगठन संगीत, नाटक, नृत्य और अन्य कला माध्यमों से 'आइए प्रतिरोध का उत्सव मनाएं' नारे के साथ जनसमर्थन जुटा रहा है। शिक्षाविद प्रिंस गजेंद्र बाबू और मणिरत्नम ने भी इस प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।
सरकार की स्थिति और विधानसभा प्रस्ताव
नवीनतम प्रस्ताव पेश करते हुए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री केजी अरुणराज ने कहा कि नीट उन छात्रों को लाभ पहुँचाती है जो महँगी कोचिंग का खर्च उठा सकते हैं, और इससे स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम पर ध्यान कम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परीक्षा के कारण ग्रामीण, गरीब और सामाजिक रूप से वंचित छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा के अवसर सिकुड़े हैं।
गौरतलब है कि 2024 में तत्कालीन द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार द्वारा नीट से छूट के लिए पारित विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली थी। प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से इस नए प्रस्ताव को मंजूरी देने की अपील की है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच शिक्षा नीति पर टकराव पहले से ही चरम पर है। बालामुरुगन की बिगड़ती सेहत और आंदोलन की व्यापकता को देखते हुए राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। अब सबकी नज़रें राज्यपाल के निर्णय और केंद्र की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।