नीट विरोधी प्रदर्शन: रैपर अरिवु की हिरासत पर उदयनिधि स्टालिन ने TVK सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार, 21 जुलाई को रैपर और सामाजिक कार्यकर्ता अरिवरसु कलाइनेसन — जिन्हें 'थेरुक्कुरल अरिवु' के नाम से जाना जाता है — की अस्थायी हिरासत की कड़ी आलोचना की। कलाइनेसन को चेन्नई स्थित तमिलनाडु सचिवालय के बाहर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था।
मुख्य घटनाक्रम
अरिवरसु कलाइनेसन ने चेन्नई के तमिलनाडु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से नीट के विरुद्ध कठोर राजनीतिक एवं कानूनी रुख अपनाने की माँग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर स्थल से हटा दिया।
हालाँकि, घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब कलाइनेसन को कुछ समय बाद पुनः सचिवालय बुलाया गया और मुख्यमंत्री विजय से भेंट कराई गई। बैठक में उन्होंने नीट को लेकर अपनी चिंताएँ सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। बैठक के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में मंत्री आधव अर्जुन उन्हें सचिवालय से बाहर तक छोड़ते दिखे।
उदयनिधि स्टालिन की प्रतिक्रिया
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कलाइनेसन को अपना 'प्यारा भाई' बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले हिरासत में लेने के सरकार के फैसले ने विरोधाभासी संदेश दिया।
स्टालिन के अनुसार, कलाइनेसन का प्रदर्शन उन लाखों छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है जो वर्षों से नीट का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी TVK सरकार इस विवादित परीक्षा के विरोध में उठने वाली आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रही है।
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
नीट का मुद्दा तमिलनाडु में वर्षों से राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील रहा है। राज्य में कई छात्रों की आत्महत्या को नीट के दबाव से जोड़ा गया है, जिसके बाद से विरोध की आवाज़ें लगातार तेज़ होती रही हैं। उदयनिधि ने कहा कि नीट की व्यवस्था में कई गड़बड़ियाँ हैं और यह 'एक बड़े घोटाले का रूप ले चुकी है।'
गौरतलब है कि नीट के खिलाफ विरोध अब केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है — नई दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में छात्र और युवा संगठन इस परीक्षा के विरुद्ध सड़कों पर उतर रहे हैं।
लोकतांत्रिक अधिकार पर सवाल
उदयनिधि ने तर्क दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले को हिरासत में लेना अनावश्यक था और इससे लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार को ठेस पहुँची। उनका कहना था कि कलाइनेसन जैसी प्रभावशाली आवाज़ को हिरासत में लेने से तमिलनाडु के युवा नीट-विरोधी आंदोलन में भाग लेने से हतोत्साहित हो सकते हैं।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विरोध की आवाज़ दबाने के बजाय प्रदर्शनकारियों से संवाद किया जाए और जनता की चिंताओं का ठोस समाधान निकाला जाए। नीट उन्मूलन की माँग को लेकर राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।