कूलर के पानी में फिटकरी डालें, बदबू और मच्छरों से पाएं तुरंत छुटकारा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली: भीषण गर्मी के मौसम में कूलर सबसे सस्ता और असरदार राहत का साधन है, लेकिन अगर उसके टैंक में भरा पानी कई दिनों तक न बदला जाए तो वह बदबू, मच्छरों और बीमारियों का घर बन जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कूलर के पानी में फिटकरी (Alum) का एक छोटा टुकड़ा डालने से पानी लंबे समय तक साफ रहता है और मच्छरों के पनपने की संभावना भी कम हो जाती है।
क्यों खतरनाक है कूलर का जमा पानी?
कूलर के टैंक में कई दिनों तक एक ही पानी भरा रहने से उसमें सूक्ष्म जीव, शैवाल और गंदगी जमा होने लगती है। धीरे-धीरे पानी से तेज दुर्गंध आने लगती है और यही रुका हुआ पानी मादा मच्छरों के अंडे देने का पसंदीदा स्थान बन जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों और मानसून के मौसम में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार के मामलों में तेज वृद्धि का एक बड़ा कारण घरों में रखे कूलर, गमले और छत पर जमा रुका हुआ पानी होता है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के आंकड़े बताते हैं कि हर साल मई से सितंबर के बीच मच्छरजनित बीमारियों में उल्लेखनीय उछाल आता है।
फिटकरी क्या है और यह कैसे काम करती है?
फिटकरी को वैज्ञानिक भाषा में 'एलम' (Alum) कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक खनिज यौगिक है जिसका उपयोग सदियों से पानी शुद्ध करने के लिए किया जाता रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो फिटकरी पानी में मौजूद महीन गंदे कणों को आपस में जोड़ती है।
जब ये कण एकत्रित होकर भारी हो जाते हैं, तो टैंक की तली में बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी अपेक्षाकृत साफ और स्वच्छ दिखने लगता है। इस प्रक्रिया को रसायन विज्ञान में 'फ्लोकुलेशन' कहा जाता है।
इसके अलावा, फिटकरी में हल्के एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं जो पानी में पनपने वाले बैक्टीरिया की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इससे पानी से आने वाली दुर्गंध भी काफी हद तक कम हो जाती है।
मच्छरों पर फिटकरी का असर
मादा मच्छर आमतौर पर रुके हुए और अपेक्षाकृत साफ पानी में अंडे देती है। जब पानी लंबे समय तक जमा रहे तो उसमें लार्वा तेजी से विकसित होते हैं और कुछ ही दिनों में पूर्ण मच्छर बनकर उड़ने लगते हैं।
फिटकरी पानी की रासायनिक संरचना को इस तरह प्रभावित करती है कि मच्छरों के लार्वा के पनपने की अनुकूल परिस्थितियां कुछ हद तक बाधित होती हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह कोई पूर्ण कीटनाशक उपाय नहीं है, बल्कि एक सहायक घरेलू नुस्खा है।
सही तरीके से करें फिटकरी का उपयोग
विशेषज्ञों की सलाह है कि कूलर के बड़े टैंक में केवल एक छोटा टुकड़ा फिटकरी ही पर्याप्त होता है। अधिक मात्रा में फिटकरी डालने से पानी की गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ सकता है और कूलर के पैड को भी नुकसान हो सकता है।
इसके साथ ही हर 3 से 5 दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदल देना चाहिए। टैंक और कूलिंग पैड्स की नियमित सफाई भी अनिवार्य है ताकि फंगस और जैविक गंदगी जमा न हो सके। पैड्स को धूप में सुखाना भी फायदेमंद रहता है।
कूलर स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संबंध
यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत सुविधा तक सीमित नहीं है। भारत जैसे देश में जहां करोड़ों परिवार एयर कंडीशनर की जगह कूलर पर निर्भर हैं, वहां कूलर की साफ-सफाई एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा भी है। शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में घनी आबादी के बीच एक घर का लापरवाह कूलर पड़ोस में भी मच्छर फैला सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय दोनों ही रुके हुए पानी को डेंगू और मलेरिया के प्रसार का प्रमुख कारण मानते हैं। ऐसे में फिटकरी जैसे सस्ते और सुलभ उपाय को अपनाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आने वाले मानसून सीजन से पहले स्वास्थ्य विभाग भी घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है। ऐसे में अभी से कूलर की सफाई की आदत डालना समझदारी है।