फोलिक एसिड: गर्भावस्था में माँ और शिशु के लिए क्यों है यह 'प्रेग्नेंसी विटामिन' अनिवार्य?

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फोलिक एसिड: गर्भावस्था में माँ और शिशु के लिए क्यों है यह 'प्रेग्नेंसी विटामिन' अनिवार्य?

सारांश

फोलिक एसिड को 'प्रेग्नेंसी विटामिन' यूँ ही नहीं कहते — यह शिशु के न्यूरल ट्यूब, रीढ़ और मस्तिष्क के विकास की नींव है। डॉक्टर गर्भधारण से पहले ही इसे शुरू करने की सलाह देते हैं, और आयुर्वेद भी 'गर्भिणी परिचर्या' में इसके प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता देता है।

Key Takeaways

फोलिक एसिड विटामिन-बी समूह का सिंथेटिक रूप है; इसका प्राकृतिक रूप फोलेट कहलाता है। यह भ्रूण के न्यूरल ट्यूब , रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क के सामान्य विकास के लिए अनिवार्य है। डॉक्टर गर्भधारण से पहले और पहली तिमाही में इसका सेवन अनिवार्य मानते हैं। इसकी कमी से माँ में एनीमिया , कमज़ोरी और शिशु में जन्मजात विकारों का जोखिम बढ़ता है। आयुर्वेद की गर्भिणी परिचर्या में पालक, मेथी, आँवला, मूंग, बादाम जैसे फोलेट-समृद्ध खाद्य पदार्थ शामिल हैं। शतावरी, अश्वगंधा और गिलोय का सेवन चिकित्सक की सलाह पर किया जा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड को 'प्रेग्नेंसी विटामिन' कहा जाता है — और यह महज़ एक उपनाम नहीं है। नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में इसका सेवन माँ और भ्रूण दोनों के सामान्य विकास के लिए अनिवार्य माना जाता है। यह छोटी-सी गोली नई कोशिकाओं के निर्माण से लेकर शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास तक में निर्णायक भूमिका निभाती है।

फोलिक एसिड क्या है और यह कहाँ पाया जाता है

फोलिक एसिड दरअसल विटामिन-बी समूह का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक रूप फोलेट कहलाता है। यह हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों और सूखे मेवों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। शरीर में यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है और शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।

गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा एनीमिया, अत्यधिक कमज़ोरी और सिरदर्द जैसी समस्याओं से बचाती है। यही कारण है कि चिकित्सक इसे गर्भावस्था की पहली तिमाही में विशेष रूप से अनुशंसित करते हैं।

भ्रूण के विकास में फोलिक एसिड की भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में फोलिक एसिड भ्रूण के न्यूरल ट्यूब के सही विकास के लिए बेहद ज़रूरी है। यदि माँ इसका पर्याप्त सेवन नहीं करती, तो शिशु की रीढ़ की हड्डी और नेज़ल बोन का विकास अवरुद्ध हो सकता है और शिशु पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। इसकी कमी से शिशु में जन्मजात विकारों की आशंका भी बढ़ जाती है।

यही कारण है कि डॉक्टर गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में फोलिक एसिड का सेवन अनिवार्य मानते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान तेज़ हो रहे हैं।

आयुर्वेद का दृष्टिकोण: गर्भिणी परिचर्या

आयुर्वेद में गर्भावस्था के समय को

Point of View

फिर भी भारत में न्यूरल ट्यूब दोषों के मामले अभी भी चिंताजनक स्तर पर हैं — जो दर्शाता है कि जागरूकता और वास्तविक अनुपालन के बीच बड़ी खाई है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का यह संगम सराहनीय है, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ पूरक आहार की पहुँच सीमित है, वहाँ केवल प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भरता पर्याप्त नहीं हो सकती। नीति-निर्माताओं को फोलिक एसिड को मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों में और अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करना होगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

फोलिक एसिड क्या है और यह गर्भावस्था में क्यों ज़रूरी है?
फोलिक एसिड विटामिन-बी समूह का एक सिंथेटिक रूप है जो भ्रूण के न्यूरल ट्यूब, रीढ़ और मस्तिष्क के सामान्य विकास के लिए अनिवार्य है। इसकी कमी से शिशु में जन्मजात विकार और माँ में एनीमिया का जोखिम बढ़ जाता है।
फोलिक एसिड कब से लेना शुरू करना चाहिए?
डॉक्टर गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में फोलिक एसिड का सेवन अनिवार्य मानते हैं। जितनी जल्दी शुरुआत हो, भ्रूण के न्यूरल ट्यूब विकास में उतनी अधिक सुरक्षा मिलती है।
फोलिक एसिड के प्राकृतिक स्रोत कौन-से हैं?
पालक, मेथी, आँवला, संतरा, अनार, मूंग, मसूर, चना, बादाम और अखरोट फोलेट के प्रमुख प्राकृतिक स्रोत हैं। आयुर्वेद की गर्भिणी परिचर्या में इन्हीं खाद्य पदार्थों को गर्भावस्था के आहार में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
फोलिक एसिड की कमी से बच्चे पर क्या असर पड़ता है?
फोलिक एसिड की कमी से शिशु की रीढ़ की हड्डी और नेज़ल बोन का विकास ठीक से नहीं हो पाता और न्यूरल ट्यूब दोष उत्पन्न हो सकते हैं। इससे शिशु पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता और जन्मजात विकारों की आशंका बढ़ जाती है।
क्या आयुर्वेद में भी फोलिक एसिड की भरपाई के उपाय हैं?
हाँ, आयुर्वेद की गर्भिणी परिचर्या में ऐसे आहार की सलाह दी जाती है जो शरीर में फोलेट की कमी को पूरा करते हैं। शतावरी, अश्वगंधा और गिलोय का सेवन भी चिकित्सक की सलाह पर किया जा सकता है।
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