रोजाना कितना नमक, चीनी और तेल खाएं? महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जरूरी एडवाइजरी
सारांश
Key Takeaways
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 22 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की।
- स्वस्थ वयस्क के लिए दैनिक सीमा: नमक 5 ग्राम, चीनी 20-25 ग्राम, तेल 25-30 ग्राम।
- दो वर्ष से कम आयु के बच्चों के भोजन में नमक और चीनी का उपयोग पूरी तरह वर्जित।
- जंक फूड की जगह ताजे फल, भुने चने, रागी के लड्डू और मौसमी सब्जियां खाने की सलाह।
- मिलेट्स (बाजरा, रागी) को दैनिक आहार में शामिल करने और फलों का जूस नहीं बल्कि सीधे फल खाने की अपील।
- तेल का बार-बार उपयोग और दालों को बिना भिगोए पकाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जंक फूड और पैक्ड फूड की बढ़ती लत को देखते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 22 अप्रैल 2025 को एक अहम स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन कितनी मात्रा में नमक, चीनी और तेल का सेवन करना चाहिए। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा कर देशवासियों को सचेत किया।
मंत्रालय की एडवाइजरी — क्या है दैनिक सीमा?
मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एक स्वस्थ वयस्क के लिए प्रतिदिन नमक की मात्रा 5 ग्राम, चीनी की मात्रा 20 से 25 ग्राम और तेल की मात्रा 25 से 30 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह सीमाएं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अनुशंसाओं के अनुरूप हैं।
जंक फूड में इन तीनों तत्वों की मात्रा इस सीमा से कहीं अधिक होती है, जबकि शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन, फाइबर और विटामिन लगभग नगण्य होते हैं। यही कारण है कि नियमित जंक फूड सेवन से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष चेतावनी
एडवाइजरी में शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों के भोजन में नमक और चीनी का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
चिप्स, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, पिज्जा और बर्गर जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों में मोटापे और डायबिटीज का प्रमुख कारण बन रहे हैं। मंत्रालय ने सुझाव दिया कि इनकी जगह बच्चों को ताजे मौसमी फल, सूखे मेवे, भुने चने, मूंगफली, मुरमुरा, घर की बनी लस्सी, नींबू पानी और रागी के लड्डू जैसे पौष्टिक विकल्प दिए जाएं।
सेहतमंद रहने के आसान और व्यावहारिक उपाय
मंत्रालय ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए कई सरल सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय बाजार में उपलब्ध मौसमी फल और सब्जियां सबसे ताजी और पोषक होती हैं। थाली में जितने अधिक रंगों की सब्जियां होंगी, शरीर को उतने ही विविध विटामिन और खनिज प्राप्त होंगे।
मंत्रालय ने यह भी सलाह दी कि फलों का रस निकालने की बजाय सीधे फल खाएं, जिससे शरीर को पर्याप्त फाइबर मिलता है और पेट देर तक भरा रहता है। इसके साथ ही केवल गेहूं और चावल पर निर्भर न रहकर बाजरा, रागी और अन्य मोटे अनाज (मिलेट्स) को दैनिक आहार में शामिल करने की अपील की गई।
रसोई में बरतें ये सावधानियां
एडवाइजरी में रसोई से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियों का भी उल्लेख किया गया। एक ही तेल को बार-बार गर्म करके उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, क्योंकि इससे ट्रांस फैट का निर्माण होता है जो हृदय रोगों का कारण बनता है।
इसके अलावा दालों और अनाजों को पकाने से पहले पानी में भिगोना चाहिए। इस प्रक्रिया से उनके पोषक तत्वों का अवशोषण शरीर में बेहतर तरीके से होता है और पाचन भी सुगम रहता है।
व्यापक संदर्भ — बढ़ती गैर-संचारी बीमारियों की चुनौती
यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब भारत में गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के आंकड़ों के अनुसार देश में डायबिटीज, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या पिछले एक दशक में दोगुनी हो चुकी है।
गौरतलब है कि भारत सरकार पहले से ही 'ईट राइट इंडिया' और 'फिट इंडिया मूवमेंट' जैसे अभियान चला रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह एडवाइजरी उन्हीं प्रयासों की अगली कड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश की आबादी इन सरल दिशानिर्देशों का पालन करे तो अगले 10 वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम किया जा सकता है।
आने वाले समय में मंत्रालय द्वारा इस विषय पर जागरूकता अभियान को और विस्तार देने की संभावना है, जिसमें स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को भी शामिल किया जा सकता है।