गंगोत्री से गंगासागर योग यात्रा: वाराणसी के रविदास घाट पर 17 जून को हुआ सामूहिक योगाभ्यास
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी के पवित्र रविदास घाट पर 17 जून 2025 को 'गंगोत्री से गंगासागर' योग यात्रा अभियान के अंतर्गत एक विशाल योग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने गंगा तट पर एक साथ योगाभ्यास किया। यह आयोजन 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पूर्व चलाए जा रहे सप्ताह-व्यापी जागरूकता अभियान का हिस्सा है। आयुष मंत्रालय, आयुष मिशन और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के संयुक्त प्रयासों से यह यात्रा संचालित की जा रही है।
अभियान का क्रम और यात्रा मार्ग
आयुष विभाग की महानिदेशक चैत्रवी ने बताया कि इस श्रृंखला की शुरुआत 14 जून को गंगोत्री से की गई थी — माँ गंगा के उद्गम स्थल से लेकर उनके सागर में विलय स्थल गंगासागर तक योग का संदेश पहुँचाना इस यात्रा का मूल उद्देश्य है। इसके पश्चात ऋषिकेश और हरिद्वार में कार्यक्रम हुए, 16 जून को प्रयागराज में भव्य योग आयोजन सम्पन्न हुआ, और 17 जून को यह यात्रा वाराणसी पहुँची।
मंत्री दयाशंकर मिश्र का संबोधन
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर मिश्र ने कार्यक्रम में कहा कि यह अभियान केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी किनारों, गाँवों के अमृत सरोवरों, पौराणिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थानों और शहरी पार्कों तक योग को पहुँचाने का व्यापक प्रयास है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग को योग से जोड़ना इस अभियान का मुख्य ध्येय है। मिश्र के अनुसार यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है।
इस वर्ष की थीम और संदेश
महानिदेशक चैत्रवी ने बताया कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' है — जिसका उद्देश्य यह है कि लोग बढ़ती उम्र के बावजूद स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकें। साथ ही 'करें योग, रहें निरोग' का संदेश भी जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्रदान करता है।
आम जनता पर असर
यह अभियान गौरतलब है क्योंकि यह योग को शहरी जिम-संस्कृति से निकालकर ग्रामीण और तीर्थ स्थलों तक ले जाने की कोशिश करता है। अमृत सरोवरों और धार्मिक स्थलों पर आयोजन से उन वर्गों तक पहुँच बनाई जा रही है जो अब तक संगठित योग कार्यक्रमों से दूर थे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार वैश्विक स्तर पर योग को सांस्कृतिक कूटनीति के एक प्रमुख माध्यम के रूप में स्थापित कर रही है।
आगे की कड़ियाँ
वाराणसी के बाद यह यात्रा गंगासागर तक जारी रहेगी, जहाँ समापन कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देशभर में एक साथ सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया जाएगा।