10 अगस्त 2026
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असम के गोलपाड़ा में डेंगू के 19 नए मामले, रबड़ के कप बने मच्छरों का अड्डा

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असम के गोलपाड़ा में डेंगू के 19 नए मामले, रबड़ के कप बने मच्छरों का अड्डा

सारांश

असम के गोलपाड़ा में डेंगू के 19 नए मामलों ने चिंता बढ़ाई है। रबड़ संग्रह कप में जमा पानी मच्छरों का अड्डा बन रहा है, जिससे आदिवासी किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस वर्ष रबड़ क्षेत्र में 96 मामले दर्ज हो चुके हैं।

मुख्य बातें

असम के गोलपाड़ा जिले में 22 जून 2026 को डेंगू के 19 नए मामले सामने आए।
इस वर्ष रबड़ खेती वाले क्षेत्रों में अब तक 96 डेंगू मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
2024 में गोलपाड़ा में कुल 104 डेंगू केस आए थे — पिछले तीन वर्षों में मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि।
रबड़ संग्रह कप में जमा पानी में डेंगू लार्वा पाए गए, जिससे रबड़ उद्योग पर निर्भर आदिवासी समुदाय सर्वाधिक प्रभावित।
जिला मलेरिया कार्यालय ने किसानों को साप्ताहिक रूप से कप का पानी बदलने की सलाह दी है।
WHO के अनुसार, डेंगू का कोई विशेष उपचार नहीं; रोकथाम पूरी तरह वेक्टर नियंत्रण पर निर्भर।

असम के गोलपाड़ा जिले में 22 जून 2026 को डेंगू के 19 नए मामले सामने आए हैं, जिससे इस वर्ष जिले में कुल मामलों की संख्या चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों की जाँच में खुलासा हुआ है कि रबड़ के पेड़ों से दूध इकट्ठा करने वाले कप में जमा पानी मच्छरों के पनपने का प्रमुख स्रोत बन रहा है, जिससे रबड़ उद्योग पर निर्भर आदिवासी समुदाय विशेष रूप से प्रभावित हो रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

जिला मलेरिया कार्यालय की अधिकारी ताराली ठाकुरिया ने बताया कि पहले गोलपाड़ा में डेंगू के मामले स्थानीय स्तर पर नहीं पाए जाते थे, लेकिन पिछले तीन वर्षों में स्थिति बदल गई है। उन्होंने कहा, 'पहले गोलपाड़ा में डेंगू के केस स्थानीय स्तर पर नहीं थे। पिछले तीन साल में यहाँ डेंगू के मरीज़ बढ़े हैं। 2024 में 104 डेंगू के केस सामने आए थे।'

ठाकुरिया ने आगे बताया कि जाँच के दौरान रबड़ के पेड़ों से दूध इकट्ठा करने वाले कप में भरे पानी में डेंगू के लार्वा पाए गए। इस वर्ष अब तक 96 डेंगू के मामले रबड़ की खेती वाले क्षेत्रों में दर्ज किए जा चुके हैं।

रबड़ उद्योग और आदिवासी समुदाय पर असर

गोलपाड़ा में रबड़ की खेती से जुड़े आदिवासी किसान और मज़दूर इस बीमारी की चपेट में सबसे अधिक आ रहे हैं। रबड़ के पेड़ों पर लगाए जाने वाले संग्रह कप खुले रहते हैं और उनमें बारिश का पानी जमा होता रहता है, जो एडीज़ मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में मानसून की शुरुआत के साथ वेक्टर-जनित बीमारियों का खतरा वैसे भी बढ़ जाता है।

जागरूकता अभियान और बचाव के उपाय

जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज़ कर दिया है। ताराली ठाकुरिया के अनुसार, रबड़ किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे संग्रह कप में जमा पानी को हर सप्ताह बदलें, ताकि लार्वा पनपने न पाए। स्वास्थ्य दल प्रभावित बस्तियों में घर-घर जाकर जाँच और जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं।

डेंगू के बारे में विशेषज्ञ जानकारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो डेंगू वायरस से होता है और संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। दुनिया की लगभग आधी आबादी को डेंगू का खतरा है। WHO के मुताबिक, यह बीमारी मुख्यतः उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, विशेषकर शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में पाई जाती है।

गौरतलब है कि डेंगू या गंभीर डेंगू का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन WHO के अनुसार बीमारी का समय पर पता चलने और उचित चिकित्सा देखभाल से गंभीर डेंगू से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। रोकथाम पूरी तरह वेक्टर नियंत्रण — यानी मच्छरों को पनपने से रोकने — पर निर्भर करती है।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि रबड़ बागान क्षेत्रों में नियमित लार्वा-रोधी सर्वेक्षण जारी रहेगा। यदि मामले इसी गति से बढ़ते रहे, तो जिला प्रशासन अतिरिक्त स्वास्थ्य शिविर लगाने पर विचार कर सकता है। रबड़ किसानों की सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सफलता की कुंजी मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कृषि प्रणालियों में भी छुपी है जिन्हें अब तक जोखिम-मुक्त माना जाता था। रबड़ संग्रह कप जैसे औज़ार, जो किसान रोज़ इस्तेमाल करते हैं, वेक्टर नियंत्रण की दृष्टि से अदृश्य रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य नीति में कृषि-आधारित वेक्टर स्रोतों को पर्याप्त स्थान मिलता है, या रोकथाम अभियान अभी भी शहरी जल-संग्रह तक सीमित हैं। जब तक रबड़ बागान प्रबंधन को डेंगू नियंत्रण प्रोटोकॉल में औपचारिक रूप से शामिल नहीं किया जाता, तब तक यह समस्या हर मानसून में दोहराती रहेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोलपाड़ा में डेंगू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
जिला मलेरिया कार्यालय की जाँच में पाया गया कि रबड़ के पेड़ों पर लगे संग्रह कप में जमा पानी में डेंगू के लार्वा पनप रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में गोलपाड़ा में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और 2024 में 104 मामले दर्ज किए गए थे।
रबड़ किसान डेंगू से कैसे बच सकते हैं?
स्वास्थ्य अधिकारियों ने सलाह दी है कि रबड़ किसान संग्रह कप में जमा पानी को हर सप्ताह बदलें, ताकि मच्छर के लार्वा पनपने न पाएँ। जिला स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चला रहा है।
डेंगू क्या है और यह कैसे फैलता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो डेंगू वायरस से होता है और संक्रमित एडीज़ मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। दुनिया की लगभग आधी आबादी इस बीमारी के खतरे में है।
डेंगू का इलाज क्या है?
WHO के अनुसार, डेंगू या गंभीर डेंगू का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, समय पर बीमारी का पता चलने और उचित चिकित्सा देखभाल से गंभीर डेंगू से होने वाली मृत्यु दर में काफी कमी लाई जा सकती है।
इस वर्ष गोलपाड़ा में अब तक कितने डेंगू मामले आए हैं?
जिला मलेरिया कार्यालय के अनुसार, इस वर्ष अब तक रबड़ खेती वाले क्षेत्रों में 96 डेंगू मामले दर्ज हो चुके हैं। 22 जून 2026 को 19 नए मामले सामने आने के बाद यह संख्या और बढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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