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सुनने की क्षमता घट रही है? शरीर देता है ये 5 शुरुआती संकेत, अनदेखा करना पड़ सकता है भारी

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सुनने की क्षमता घट रही है? शरीर देता है ये 5 शुरुआती संकेत, अनदेखा करना पड़ सकता है भारी

सारांश

सुनने की समस्या अक्सर चुपचाप शुरू होती है — शब्द अधूरे लगना, टीवी की आवाज़ बढ़ाते रहना, फोन पर बातें न समझ पाना। विशेषज्ञों के अनुसार, इन संकेतों को पहचानकर समय पर जाँच कराना ज़रूरी है, क्योंकि देर होने पर समस्या मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।

मुख्य बातें

सुनने की क्षमता में गिरावट केवल बुजुर्गों की नहीं, बल्कि हर उम्र की समस्या बन रही है — तेज़ शोर और ईयरफोन के अत्यधिक उपयोग से।
विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च आवृत्ति की ध्वनियाँ सबसे पहले प्रभावित होती हैं, जिससे शब्द अधूरे सुनाई देते हैं।
बार-बार बात दोहराने का आग्रह करना, टीवी-मोबाइल की आवाज़ बढ़ाते रहना और फोन पर न समझ पाना प्रमुख संकेत हैं।
कानों में घंटी या भनभनाहट की आवाज़ — जिसे टिनिटस कहते हैं — श्रवण तंत्र में बदलाव का संकेत हो सकती है।
लंबे समय तक समस्या को नज़रअंदाज़ करने से तनाव, अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता है।

सुनने की क्षमता में गिरावट केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रही — विशेषज्ञों के अनुसार, तेज़ शोर के लगातार संपर्क, घंटों ईयरफोन के उपयोग और बदलती जीवनशैली के चलते यह समस्या अब हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। 23 जून को सामने आई स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोग वर्षों तक इस गिरावट को पहचान ही नहीं पाते, और जब तक इलाज की दिशा में कदम उठाते हैं, समस्या गहरी हो चुकी होती है।

क्यों देर से पकड़ में आती है यह समस्या

विशेषज्ञों का कहना है कि श्रवण क्षमता की हानि अमूमन धीरे-धीरे होती है, इसीलिए व्यक्ति को शुरू में यह आभास होता है कि आसपास बहुत शोर है या सामने वाला अस्पष्ट बोल रहा है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार, कान न केवल ध्वनि ग्रहण करते हैं, बल्कि मस्तिष्क तक सटीक जानकारी पहुँचाने में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो बातचीत को समझना और लोगों से जुड़ना कठिन हो जाता है।

यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब शोध बताते हैं कि लंबे समय तक सुनने की समस्या को नज़रअंदाज़ करने से तनाव, सामाजिक अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ता है।

मुख्य चेतावनी संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहला संकेत यह होता है कि व्यक्ति आवाज़ तो सुन लेता है, लेकिन शब्दों को सही तरह से पहचान नहीं पाता। यह कठिनाई भीड़भाड़ वाली जगहों पर — जहाँ एक साथ कई लोग बोल रहे हों — और भी स्पष्ट हो जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि श्रवण क्षमता की शुरुआती हानि प्रायः उच्च आवृत्ति की ध्वनियों को पहले प्रभावित करती है, जिससे कुछ अक्षर या शब्द अधूरे सुनाई देते हैं।

दूसरा संकेत है — बार-बार लोगों से बात दोहराने का आग्रह करना। जब यह स्थिति नियमित रूप से बनने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना ज़रूरी है। गौरतलब है कि परिवार के सदस्य या करीबी दोस्त अक्सर इस बदलाव को स्वयं व्यक्ति से पहले भाँप लेते हैं।

तीसरा संकेत है इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों — जैसे टीवी, मोबाइल या रेडियो — की आवाज़ पहले की तुलना में अधिक ऊँची रखने की ज़रूरत महसूस होना। चूँकि यह बदलाव क्रमिक होता है, इसलिए अधिकांश लोगों को इसका एहसास नहीं होता।

चौथा संकेत फोन पर बातचीत में आने वाली परेशानी है। आमने-सामने की बातचीत में हम चेहरे के भाव, होंठों की गति और शारीरिक भाषा से भी अर्थ ग्रहण करते हैं, लेकिन फोन पर केवल ध्वनि ही एकमात्र माध्यम होती है। इसलिए श्रवण क्षमता में मामूली कमी भी फोन पर बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से उभर सकती है।

टिनिटस: एक अहम चेतावनी

कानों में लगातार घंटी, सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज़ें सुनाई देना — जिसे चिकित्सा विज्ञान में टिनिटस कहा जाता है — भी एक महत्त्वपूर्ण संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति कान या श्रवण तंत्र में हो रहे बदलाव का संकेत हो सकती है। यदि ऐसी आवाज़ें लंबे समय तक बनी रहें, तो किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि श्रवण क्षमता की जाँच को नियमित स्वास्थ्य जाँच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए — खासकर उन लोगों के लिए जो शोरगुल भरे वातावरण में काम करते हैं या लंबे समय तक ईयरफोन का उपयोग करते हैं। शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर एक बड़े पहलू को नज़रअंदाज़ करती है — भारत में किफायती श्रवण जाँच की भारी कमी। शहरी क्षेत्रों में भी ऑडियोलॉजिस्ट की उपलब्धता सीमित है, और ग्रामीण भारत में तो स्थिति और भी विकट है। ईयरफोन के बढ़ते उपयोग पर चेतावनी देना उचित है, लेकिन असली सवाल यह है कि जब कोई इन संकेतों को पहचान भी ले, तो क्या उसके पास समय पर और सस्ती जाँच की सुविधा है? सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में श्रवण स्वास्थ्य को प्राथमिकता दिए बिना, जागरूकता अभियान अधूरे रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनने की क्षमता कम होने के पहले संकेत क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहला संकेत यह है कि व्यक्ति आवाज़ तो सुनता है लेकिन शब्द ठीक से समझ नहीं पाता, खासकर शोरगुल वाली जगहों पर। इसके अलावा बार-बार बात दोहराने का आग्रह करना, टीवी-मोबाइल की आवाज़ बढ़ाते रहना और फोन पर बातें न समझ पाना भी प्रमुख संकेत हैं।
टिनिटस क्या है और यह सुनने की समस्या से कैसे जुड़ा है?
टिनिटस वह स्थिति है जिसमें कानों में लगातार घंटी, सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज़ें सुनाई देती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह श्रवण तंत्र में हो रहे बदलाव का संकेत हो सकता है और यदि यह लंबे समय तक बना रहे तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना ज़रूरी है।
क्या ईयरफोन के अधिक उपयोग से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तेज़ आवाज़ में ईयरफोन का उपयोग सुनने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा पीढ़ी भी इससे प्रभावित हो रही है।
सुनने की समस्या को नज़रअंदाज़ करने से क्या नुकसान हो सकता है?
वैज्ञानिक शोध के अनुसार, लंबे समय तक श्रवण समस्या को अनदेखा करने से तनाव, सामाजिक अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा बातचीत में भाग लेने में कठिनाई से व्यक्ति का सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है।
सुनने की जाँच कब करानी चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फोन पर बातें समझने में लगातार कठिनाई हो, कानों में घंटी की आवाज़ बनी रहे या परिवार के सदस्य बार-बार आवाज़ बढ़ाने की शिकायत करें, तो तुरंत किसी ऑडियोलॉजिस्ट से जाँच करानी चाहिए। श्रवण जाँच को नियमित स्वास्थ्य जाँच का हिस्सा बनाना उचित माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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